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राहुल गाँधी का मजाक उडाना और कोरोना पर ,असफल मोदी सरकार की असंवेदन शीलता, जनता से खिलवाड़

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भाजपा सरकार द्वारा कोरोना की रोकथाम के लिए चलाये गए रामायण धारावाहिक ,और महाभारत भाजपा के कोरोना काल की महतवपूर्ण उपलब्धि हैं , एक तरफ लोक डाउन के बाद भीड़ का एकत्र होना और उस पर मस्जिद से ले कर जमात पर निशाना साध ,कोरोना में भी आतंक ढूढ़ लेना भारतीय जांच एजेंसियों का नहीं भारतीय मीडिया की श्रेष्ठ उपलब्धि कही जायेगी . हालांकि मीडिया द्वारा बांचे गए इस तरह के समाचारों को भाजपा सरकार की एजेंसियों का पूर्ण समर्थन प्राप्त हैं .https://www.azadmanoj.com/2020/01/live-rahul-gandhi-leads-the-save-the-constitution-march-in-kalpetta/

एक तरफ स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना का शिकार करने के लिए मेमने की तरह प्रयोग करना ,साथ ही पुलिस प्रशासन का बिना किसी सुरक्षा उपकरणों के संक्रमितो के सम्पर्क में आना ,भयावह हैं .स्पष्ट हैं सरकार के पास और उनके प्रशासनिक अधिकारियों के पास योजनाओं का अभाव हैं .मुरादाबाद में स्वास्थ्य कर्मियों और पुलिस वालो पर हमला घोर निंदा किये जाने लायक हैं लेकिन इस सामाजिक ताने वाने अफवाह फैलाने वाले कुछ साधन संपन्न बुद्दिजीवियो का इस में हाथ हैं .जिस की जांच सरकार को एक उच्च कमीशन बना कर की जानी चाहिए .

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष सरकार के द्वारा अपमानित होने के बाद भी सोशल मीडिया से ले कर इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर ज़ूम विडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिये ,मीडिया कर्मियों के साथ कोरोना पर सर्जनात्मक सुझाव देते नज़र आये , सरकार ने ज़ूम अप्लिकेशन के प्रयोग पर सवाल उठा दिए ,लगता हैं सरकार ईर्ष्यालू नादान बच्चो जैसा व्यवहार कर रही हैं !

राहुल गांधी ने देश की अर्थवयवस्था के बारे में चिंता व्यक्त की साथ ही वर्तमान सरकार के कदम को नाकाफी बताया ,उसकी सबसे बड़ी वज़ह पहले लोक डाउन के बीच भारत में संक्रमित मेरे लिखने तक 13 हज़ार के आस पास पहुच चूका होगा ,क्या सरकार इस असफलता के लिए फिर से थाली या दिवाली बनायेगी ?

भीलवाड़ा मोडल अभी तक पूरे देश में लागू हो चूका हैं की नहीं ? शायद सरकार इसका उत्तर नहीं देगी सरकार के प्रवक्ता जो मोदी सरकार कर रही हैं उसी को सही बताएँगे ,जब अचानक से टेस्ट किये जाते हैं और संक्रमितो का आंकड़ा बढ़ जाता हैं,

तब सरकार के पास कोई उत्तर नहीं होता .

पांच सबसे बड़े फ़िल्मी अंदाज़ हैं मोदी सरकार के ,जिन पर विचार किया जाए तब मोदी सरकार घोर असफल नज़र आती हैं .

  • फ़िल्मी अंदाज़ में देश पर लोक डाउन लगा दिया गया ,देश की जनता जिनमे किसान ,श्रमिक ,सरकार की अदूरदर्शिता के शिकार हो गए .
  • राहुल गांधी की चेतावनी का संसद में भाजपा के बुद्दिमान सांसदों द्वारा उपहास ,देश की जनता के साथ खिलवाड़ सा अनुभव हुआ ,अनुभव हुआ गोबर और मूत्र के साथ साथ थाली और दिवाली पर आश्रित मोदी जी का अध्यात्म अभी तक असफल रहा हैं .
  • अगर सरकार द्वारा लोक डाउन कोरोना की सही रोकथाम तब अभी तक कोरोना के रोगी 12 हज़ार से पार कैसे हो गया ?
  • लोक डाउन -2 की देश को आवश्यकता क्यों हुई ? कितने गरीबो किसानो को अभी तक केंद्र सरकार द्वारा सहायता की गयी ?
  • ऐसा प्रतीत होता हैं की राज्य सरकारे अपने प्रयासों से कोरोना से लड़ने के लिए अकेले ही छोड़ दी गयी हैं .

सुना हैं पांच लाख कोरोना के रैपिड टेस्ट किट पहुची हैं ,जबकि देश की आबादी सवा सौ करोड़ हैं ,दो लाख टेस्ट के बाद भारत में मरीजों की संख्या 13 हज़ार हैं ,खुद ही पाठक तुलनात्मक अध्यन कर सकते हैं . राहुल गांधी ने सरकार को सही राय दी हैं ,पर सरकार हैं की जिद्दी पत्नी की तरह मानती नहीं ?

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