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भारत के भूतकाल से निकलता सिक्ख चौरासी के दंगे का भूत सच क्या था ?

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चुनावी बिसात पर पांचवे चरण के चुनावो में जैसे मोदी नाम का महारथी अपने सारे तीर तरकश से निकाल चूका था ,आश्चर्य था इस बार ये नेता इस तरह से चुनावी रण में खेल रहा था ,जैसे उसके पास आरोपों और अफवाहों का एक बड़ा सा पिटारा था जिसको वो जब चाहे जहाँ चाहे फेंकता जा रहा था . फेंके हुए झूठो को कोई उठाना नहीं चाहता था ,इन बेस्वाद झूठो को जबरदस्ती मीडिया जनता के विचारों की थाली में परोस रहा था पर जनता उसके स्वाद से कसैली हो चली थी .

नया सियासी अवतार

इस बार विकास पुरुष की जगह एक नया अवतार ओढ़ लिया था वो क्या था अंदाजा लगना मुश्किल था . जो भी था शुद्ध सात्विक सियासत से भरपूर एक्शन लिए हुए था .उसके पास उपलब्धिया गिनाने के लिए थी पर वो उन पर बात नहीं कर रहा था . जिस नोट बंदी को देशभक्ति बता कर लोगो को लाइन में लगाया उसके बारे में बो बोल ही नहीं रहा था . सुलतान देश की एकल टेक्स प्रणाली के बारे में भी नहीं बोल रहा था . वो बोला जरूर सेना पर बोला और फिर राष्ट्रवाद के नारे के पीची उसने छुपने की कोशिश की ,जनता ने उसे भी अनसुना कर दिया . उसके बाद अचानक से नेहरूजी के पीछे उसने छुपने की कोशिश की ,पर जनता ने वहां भी सच ढूढ़ निकाला ,चुनावी चरण गुजरते जा रहे थे सुलतान के चहरे पर शिकन और पसीना झुके कंधो के साथ जनता साफ़ महसूस कर रही थी .

उसने फिर से स्व. राजीव गांधी के नाम पर झूठ बोल कर सियासत की तेज़ नाव पर सवार होना चाह लेकिन वो कही लक्षदीप में पुराने जल सेना के नायको ने पलट दी थी .अब उसको बस जैसे किसी तिनके की तलाश थी ,कुछ ऐसा ,शायद मणिशंकर अय्यर जैसा ..

सुलतान ने अपने मक्कार ऐयारो को लगा दिया खबर नबीसो को लगा दिया कुछ तो लाओ ढूंढ कर शायद उसे अपने डूबने और अपनी सांस फूलने का अहसास हो चला था . इसी बीच उसको एडिट किया हुआ सेम पित्रोदा मिल गया , “जो हुआ वो हुआ ” इन शब्दों को ले कर जनसभाओ में सिक्खों की भावनाओं को भड़काने का सियासी कारोबार उसने शुरू करने की ठान ली .

वासुदेव का सुदर्शन

लेखन से दूर कही एकाकी कौने में में बस सुन रहा था ,जो हुआ वो हुआ सुन कर जैसे मेरी कलम की नींद टूट गयी . कुछ प्रलाप ही ऐसा था . एक देश की कलम होने के नाते मैंने भी इतिहास को जिया था , बनते बिगड़ते मिथकों को देखा था .मेरे कुछ सवाल भी सियासी रंग में कब रंग जायेंगे मेने सोचा भी नहीं था . सिक्ख दंगो पर एक वीडियो भी जारी कर दिया गया आनन् फानन में भाजपा के द्वारा राजीव् गाँधी का ..

भगवान् वासुदेव ने भी सौ अपशब्दों के बाद सुदर्शन चक्र धारण कर लिया था . यहाँ तो अब अपशब्दों की वो सीमा भी लांघ दी गयी थी ,मेरी कलम ने भी शब्दारोपो का सुदर्शन धारण करने का मन बना लिया था . असत्य का नाश करना भी लोकतंत्र और देश हित में किया गया कार्य होता हैं

मोदी जी से सवाल नम्बर 1 पी एम् मोदी साहब क्या आप स्व. इंदिरा गाँधी के कृत्य को सही ठहराएंगे या गलत ?

सवालों के घेरे में संघ की भूमिका

2 क्या आप नानाजी देश मुख के उस लेख से सहमत हैं जो उन्होंने 8 नवम्बर 1984 को लिखा था अपने प्रतिपक्ष नमक पत्रिका में जिसके संपादक स्व जार्ज फर्नाडिस थे ?

3 1984 सिख दंगो में आर एस एस की क्या भूमिका थी क्या वो पीड़ित सिक्ख परिवारों की सहायता कर कोई सामाजिक कार्य खाकी नेकर पहन कर कर रहे थे ?

-4 क्या ये सत्य नहीं हैं नानाजी देश मुख ने आपरेशन ब्लू स्टार पर स्व इंदिरा गांधी को महिमा मंडित किया था ?

नम्बर – 5 आप ये भी बता दो की क्या ये सही नहीं हैं की तब हिदुओ के कत्ले आम को ले कर स्व. अटल बिहारी और आडवानी ने फौज भेजने की मांग नहीं की थे ?

पहले इन पाच ही सवालों का ज़बाब दे दो अगर स्व राजीव गांधी पर अपनी खुजाल बाद में मिटाते रहना …

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