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राहुल गाँधी का मिशन यू पी इस बार ख़ास हैं होंगे कई कद्दावर नेता शामिल

ये बात आजम खान के एक ब्यान से साफ़ हो जाती हैं जिसमे उन्होंने कहा हैं की कांग्रेस वोट कटवा पार्टी नहीं बने

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सपा-बसपा गठबंधन में मामूली कोना दिए जाने लायक भी न समझी गई कांग्रेस के लिए यह ‘मास्टर स्ट्रोक’ से कम नहीं है कि जहाँ प्रियंका पूर्वी यूपी की 34 सीटों पर टिक कर विजय की राह तलाशेंगी, वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 18 लोकसभा सीटों पर जोर-आजमाइश करेंगे. कांग्रेस नेताओं की मानें तो अगले महीने न केवल राहुल गाँधी कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कर सकते हैं बल्कि उत्तर प्रदेश को लेकर कुछ नायाब चालें भी चल सकते हैं.

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कांग्रेस अध्यक्ष के इस फ़ैसले पर जहाँ बीजेपी ने इसे पार्टी के भीतर का मामला बताया, वहीं गठबंधन से उत्साहित सपा-बसपा नेताओं के माथे पर लकीरें साफ़ दिख रही हैं . ये बात आजम खान के एक ब्यान से साफ़ हो जाती हैं हिसमे उन्होंने कहा हैं की कांग्रेस वोट कटवा पार्टी नहीं बने . हालाँकि आज ही राहुल ने कहा कि जहाँ भी संभावना होगी, वह सपा-बसपा के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं. उन्होंने साफ़ किया कि प्रियंका और ज्योतिरादित्य को उत्तर प्रदेश केवल लोकसभा चुनावों में दो महीने के लिए नहीं भेजा गया है बल्कि उन्हें यहाँ लंबे समय तक टिक कर पार्टी को मजबूत करने का जिम्मा दिया गया है.

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अब सरप्राइज पैकेज के अगले हिस्से में फरवरी के पहले हफ़्ते से प्रदेश के कद्दावर नेताओं की पार्टी में आना शुरू हो जाएगा . आने वाले दिनों में पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रामलाल राही,  पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी, पूर्व सांसद कैसर जहाँ, पूर्व विधायक जासमीर अंसारी, शब्बीर वाल्मीकि, राकेश सिंह राना, पूर्व मंत्री रामहेत भारती, यूपी के मंत्री रहे आर.के. चौधरी सहित बड़ी संख्या में अन्य दलों के नेता कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं।

गठबंधन के बाद समाजवादी और बहुजन समाज पार्टी (सपा-बसपा) में  एक-दूसरे के नेता न तोड़ने का क़रार हो जाने के बाद चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं का कांग्रेस मुफ़ीद ठिकाना बन सकती है .

रामविलास पासवान की तरह उत्तर प्रदेश में ‘मौसम वैज्ञानिक’ का खिताब पा चुके नरेश अग्रवाल भी बीजेपी में असहज महसूस कर रहे हैं. नरेश का रुख भी इन दिनों कांग्रेस को लेकर नरम पड़ा है. कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले नरेश बाद में अपनी पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस बनाकर अलग हुए थे और अब तक सपा-बसपा का सफ़र तय कर वर्तमान में वो  बीजेपी में हैं .

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कैसरगंज लोकसभा सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव में तीन लाख वोट पाकर बीजेपी के ब्रजभूषण शरण सिंह से हारने वाले सपा के पूर्व विधायक व मंत्री पंडित सिंह भी कांग्रेस के पाले में आ सकते हैं. पंडित सिंह कैसरगंज से सपा के टिकट के दावेदार हैं पर इस सीट के बसपा के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है .

बहराइच से सपा विधायक रहे शब्बीर वाल्मीकि भी वहाँ से बीजेपी सांसद सावित्रीबाई फुले की पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से बढ़ती नजदीकियों को लेकर नाराज़ हैं। बीते लोकसभा चुनाव में बहराइच से दूसरे स्थान पर रहे शब्बीर वाल्मीकि भी इस बार टिकट के लिए कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं .

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