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जी न्यूज़ चेनल बिकाऊ हैं कोई खरीदेगा क्या ,सुभाष चंद्रा अब मांग रहे हैं माफ़ी

ईश्वर के यहाँ देर हैं पर अंधेर नहीं जी हां ऐसा कहा गया हैं लेकिन एक कहावत और भी हैं की न्याय की लाठी की आवाज़ सुनाई नहीं देती

जी न्यूज़ चेनल बिकाऊ हैं कोई खरीदेगा क्या ,सुभाष चंद्रा अब मांग रहे हैं माफ़ी
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ईश्वर के यहाँ देर हैं पर अंधेर नहीं जी हां ऐसा कहा गया हैं लेकिन एक कहावत और भी हैं की न्याय की लाठी की आवाज़ सुनाई नहीं देती . एक समय था जब जी न्यूज़ के चेनलो पर पूरे देश में झूठ परोसा जा रहा था . मोदी और भाजपा के गुणगान में ये मीडिया समूह पूरी तरह आकंठ डूबा हुआ था . कोई दिन  ऐसा खाली नहीं जाता जिस दिन देश के महान नेताओं का चरित्र हनन इन चेनलो पर नहीं किया जाता हो .

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वो तो शुक्र हैं देश में लोगो को सचचाई पता थी वो लोग ही मूर्ख बन पाए जिनका सामान्य ज्ञान इन चेनलो से विकसित हुआ या फिर व्हाट्स एप्प की यूनिवर्सिटी में बांटा गया . देश की अर्थवयवस्था का सच छुपाया गया . अब जैसे जैसे चुनाव आ रहे हैं वैसे वैसे मोदी काल में अवैध तरीको से खड़ा किया गया काले धन का सफ़ेद पहाड़ खुद अब उन चोरो को भयभीत करने ला हैं जिन्होंने नोट बंदी में अपना काला धन सफ़ेद कर लिया .

अब जी मीडिया समूह के मालिक सुभाष चंद्रा को वित्तीय संकट से जूझना पड रहा हैं . सफाई के साथ साथ कांग्रेस के नेताओं से संपर्क किया जा रहा हैं . पर प्रियंका गांधी जो हाल ही में कांग्रेस की महासचिव बनाई गयी हैं . उन्होंने कांग्रेस नेताओं से इन सबसे दूर रहने की सलाह दी हैं . यहाँ से होती हैं शुरुआत असली खेल की ..

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देश की एक और बड़ी कंपनी कर्ज के बोझ और वित्तीय संकट में घिर गई है. शुक्रवार को एस्सेल समूह के जी एंटरटेनमेंट, डिश टीवी और एस्सेल प्रोपैक के शेयरों में भारी गिरावट के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे काफी चौकाने वाले हैं। समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने खुद इसकी पुष्टि करते अपनी गलतियों के लिए माफी मांगी . उन्होंने इसके लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर आक्रामक तरीके से दांव लगाने और वीडियोकॉन का D2H कारोबार खरीदने के निर्णय को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कर्जदाताओं से खेद जताते हुए कहा कि कुछ नकारात्मक ताकतें उन्हें जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज की हिस्सेदारी की बिक्री के जरिए पूंजी जुटाने के प्रयासों से रोक रही हैं।

जी समूह की कंपनियों पर म्यूचुअल फंड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें 7,000 करोड़ रुपये एमएफ कर्ज और 5,000 करोड़ रुपये एनबीएफसीज का कर्ज है। इसके कारण देश में एक और IL&FS संकट का खतरा पैदा हो गया है.

बताया जा रहा है कि एमएफ कर्ज जोखिम पूरी तरह से जी के प्रमोटर के स्तर पर है. इसमें से बिरला एएफ से 2,900 करोड़ रुपये, एचडीएफसी से 1,000 करोड़ रुपये और आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल से 750 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया है, जिसके फंसने का संकट है. वहीं, एनबीएफसी के मोर्चे पर माना जा रहा है कि एचडीएफसी लि. और एलएंडटी फाइनैंस का कर्ज फंसेगा.

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देश अभी IL&FS संकट से ही नहीं उबर पाया था, तबतक इस तरह का यह दूसरा संकट भारतीय वित्तीय प्रणाली को झटका देने वाला है.जी के शेयरों में यह गिरावट उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई जिसमें दावा किया गया है कि सरकारी संस्था सीरीयस फ्रॉड इनवेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) नित्यांक इंफ्रापावर कंपनी की जांच कर रही है, जिसने 8 नवंबर 2016 को की गई नोटबंदी के तुरंत बाद 3,000 करोड़ रुपये जमा कराए थे.

रिपोर्ट में दावा किया गया कि नित्यांक इंफ्रापावर और एक कथित सेल कंपनी ने वित्तीय लेन-देन किए, जिसमें सुभाष चंद्रा की अगुवाई वाले एस्सेल समूह से 2015 से 2017 के बीच जुड़ी कुछ कंपनियां भी शामिल थीं .

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