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क्या कांग्रेस और बसपा में राजिस्थान चुनाव में हो पायेगा गठ्बंधन

यह तय है कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन की राजनीति को मजबूर कांग्रेस के पास राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के साथ गठबंधन करने के अलावा कोई रास्ता   नहीं बचा  है.

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दिल्ली में हुई उच्च स्तर की बैठक के बाद पहले विधानसभा और फिर लोकसभा में बसपा के साथ गठबंधन के पहलुओं पर विचार विमर्श हुआ. राजस्थान में बसपा को कितनी सीटें दी जाए इस बात पर मंथन हुआ और आखरी फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया. 

यह तय है कि लोकसभा चुनाव में गठबंधन की राजनीति को मजबूर कांग्रेस के पास राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए बसपा के साथ गठबंधन करने के अलावा कोई रास्ता   नहीं बचा  है.

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बसपा, कांग्रेस के साथ गठबंधन करना तो चाहती है लेकिन 2008 में कांग्रेस के लिए जख्मों को बसपा अभी तक भूल नहीं पाई है जब उसके छह के छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे.

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने आखिरकार यह साफ कर दिया है कि राजस्थान में समान विचारधारा और सिद्धांत वाली पार्टियों के साथ कांग्रेस हाथ मिलाने को तैयार है. यानी बिल्कुल साफ हो गया है विधानसभा चुनाव के महासमर में हाथ और हाथी एक साथ सत्ताधारी पार्टी भाजपा का मुकाबला करेंगे. लेकिन सवाल ये की आखिरकार कांग्रेस की रणनीति में बदलाव क्यों आया ?

वहीं सूत्रों के अनुसार दरअसल, मंगलवार को इस  मुद्दे पर गंभीर चिंतन हुआ. कांग्रेस के संगठन महासचिव अशोक गहलोत प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे पीसीसी चीफ सचिन पायलट के अलावा कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष भी मौजूद रहे.

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करीब 3 घंटे चली इस बैठक में कांग्रेस के सभी आला नेताओं ने इस बात पर माथापच्ची की, कि राजस्थान में बसपा के साथ गठबंधन करना कितना जरूरी है. राजस्थान कांग्रेस के नेताओं की दलील थी कि यहां पर जनता में कांग्रेस को लेकर अति उत्साह है लिहाजा यहां कांग्रेस को किसी गठबंधन की जरूरत नहीं है.

लेकिन सवाल विधानसभा के बाद लोकसभा चुनाव का भी था जहां पर देश भर में कांग्रेस को गठबंधन की आवश्यकता है.इस बार बसपा के साथ सीटों के बंटवारे के लिए कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है. ऐसे में अगर इस बार बसपा कांग्रेस के साथ फिर से हाथ मिलाती है तो उसे राजस्थान में अपने खोए हुए जनाधार के साथ साथ खोया हुआ सम्मान भी फिर से पाने की चाहत रहेगी .

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