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मायावती के इस कदम से खुद अपना और भाजपा का करेंगी सफाया

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मायावती के बदले सुरों ने बहुत पहले उनके पिछले दिनों आये प्रेस वार्ता में ब्यान से लग गया था . मायावती को समझना बहुत टेढ़ी खीर हैं . वो एक तरफ भाजपा के विरोध की बात करती हैं और दूसरी तरफ छतीसगढ़ में एक ऐसी पार्टी के साथ गठबंधन करती हैं . जिनकी उर्वर शक्ति रमण सरकार हैं . जोगी परिवार के मुख्यमंत्री रमन के साथ पारिवारिक और सियासी व्यापारिक सम्बन्ध रहे हैं . इतना तय हैं की एक तरह से उन्होंने अपने दलित वर्ग के युवाओं को मूक संदेश दे दिया हैं की उन्हें किधर जाना हैं .

इससे पहले मायावती घोषणा कर चुकी हैं कि बसपा मध्य प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ेगी. इस खबर के जिक्र से साथ सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ के घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है. वरिष्ठ पत्रकार बरखा दत्त का ट्वीट है, ‘मायावती ने दिखा दिया है कि क्यों वे 2019 के चुनाव में एक मजबूत पक्ष हैं… नए गठबंधन बन रहे हैं और यह कांग्रेस के लिए अच्छी खबर नहीं है.

छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) और मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन का ऐलान किया है और इस खबर के चलते सोशल मीडिया पर मायावती और अजीत जोगी, दोनों ही ट्रेंडिंग टॉपिक में शामिल हुए हैं.

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सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि मायावती अपने हालिया फैसलों से भाजपा को मजबूत करने जा रहे हैं. वहीं कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि बसपा नेता भाजपा के दबाव में कांग्रेस से दूरी बना रही हैं.

हालात कुछ भी रहे इसी बीच मायावती के ब्यान पर उत्तर प्रदेश के दलित चिन्तक और आन्दोलन कारी चन्द्रशेखर रावण ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी हैं ,तब दूसरी और गुजरात के दलित युवा नेता जिग्नेश मेवानी ने अपने नए ब्यान से सियासी तापमान को बड़ा दिया हैं ..’

मेवानी ने कहा हैं हमारी लड़ाई बाबा साहब आंबेडकर का संविधान बचाने की हैं . अगर संविधान ही नहीं बचा तब बाबा आंबेडकर की सोच कैसे बचेगी . जाहिर हैं बहिन अपना कुछ भी सियासी फैसला ले लेकिन इस वार खुद मायावती शायद अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मार रही हैं .

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मायावती कभी भी किसी ऐसे दलित के साथ नहीं दिखाई दी ,जो दलित गटर साफ़ करते हुए मर गया हो ,उस परिवार के यहाँ जाना तो दूर उसके लिए कभी  दो शब्द उनकी सियासी प्रेस कांफ्रेंस में नहीं  निकले .

मायावती एक दलित नेता के रूप में ज़रूर हो पर पिछली बार के चुनावो में उनकी छवि एक ऐसे नेता की बन गयी जो एक वर्ग का नेता तो बना लेकिन उसने उनके सहारे धन और प्रॉपर्टी बनायी . इस मामले में उनके परिवार के कई लोगो पर आरोप लगे . सी बी आई जांच भी हुई .

भाजपा के शासन काल में विपक्ष के सभी नेताओं के यहाँ कालेधन की खोज छपे डाल कर की गयी पर बहिन मायावती अकेली ऐसी नेता थी जिन पर मोदी सरकार की क्रपा बनी रही हैं .

आने वाले भविष्य में ये देखना दिलचस्प होगा की मायावती से उनका दलित युवा उनके विरुद्ध जाएगा या मायावती का दलित मतदाताओ पर उनका एकाधिकार समाप्त हो जाएगा .

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