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भारत बंद और राहुल के तंज़ से भाजपा सरकार में बौखलाहट

पिछले चार साल तक मोदी सरकार का इतना विरोध नहीं था . जितना महज़ पिछले सात दिनों में देश का गुस्सा सडको पर दिखाई देने लगा हैं आखिर गलती कहाँ और किस्से  हुई

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पिछले चार साल तक मोदी सरकार का इतना विरोध नहीं था . जितना महज़ पिछले सात दिनों में देश का गुस्सा सडको पर दिखाई देने लगा हैं आखिर गलती कहाँ और किस्से  हुई ,या शिव के कैलाश धाम पर राहुल गाँधी की यात्रा पर उठाये गए सवालों ने भाजपा की ही छिछालेदारी करा दी हैं . भाजपा सरकार के नेताओं और प्रवक्ताओ द्वारा स्तर हीन वक्तव्य उनकी राजनैतिक संस्क्रती को संक्रमित कर रहे हैं . आखिर ये गुस्सा अचानक आया या फिर देश अन्दर अन्दर उबल रहा था .

ब्राहमण मतदाता तय करेंगे भाजपा की बड़ी हार और कांग्रेस की जीत

पिछले सात दिनों में स्वर्ण आन्दोलन ने इस चिंगारी को जन्म दिया . मोदी सरकार ने एक उच्च न्यायालय के फैसले को एक नया विधेयक ला कर बदल दिया . जिसमे एस एसटी कानून को और अधिक प्रभावी बना दिया जिसको ले कर स्वर्ण समाज आक्रोशित हो उठा था . यहाँ गौर तलब हैं की स्वर्ण समाज भाजपा का परम्परागत वोट बेंक रहा हैं . उनके द्वारा आन्दोलन के बाद कांग्रेस ने फ्रंट फुट पर आ कर पेट्रोल डीजल और मंहगाई का नारा दे कर भारत बंद का एलान कर दिया . इस भारत बंद में सभी विपक्षी दल शामिल हुए . कांग्रेस का दावा था की इक्कीस सियासत हैसियत रखने वाले दलों ने सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी की .

भाजपा का वोट बेंक अब कांग्रेस के पाले में ,भाजपा में खलबली

राहुल गाँधी ने राजघाट महात्मा गांधी की समाधी तक पद यात्रा की ,कैलाश मानसरोवर से लाया जल बापू की समाधी पर चढ़ाया ,कैलाश का पवित्र पत्थर उनकी समाधि पर उन्होंने रखा शायद एक प्रतीकात्मक शपथ ले रहे थे मन ही मन की अब भाजपा और उनकी विचारधारा को हराने के लिए वो सब कुछ करेंगे जो उनके बस में होगा . देश मीडिया के समाचार सुन उसके अंदाज़े और अर्थ खुद आंकलित कर लेता हैं .रामलीला मैदान पर एक जूट विपक्ष था वो नेता भी थे जो कांग्रेस के साथ कभी नहीं दिखे ,जी हां वहां आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने अपना भाषण दिया .

काश्मीर से ले कर कन्या कुमारी तक विपक्ष भी एक जूट था और देशवासी भी . अधितर जगह पर व्यापारियों ने अपनी मर्जी से बाज़ार बंद रखे भाजपा की तरफ से केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद की प्रतिक्रिया आयी जो चौकाने वाली थी . उन्होंने कहा की सरकार ईधन के दामो पर अपना नियंत्रण नहीं रखती . ये आश्चर्य से भरा बयाँ था .क्युकी ये ही मुद्दे 2014 में भी थे और तब भाजपा उस समय बड़े हुए दामो के लिए मनमोहन सरकार को जिम्मेवार बताती थी ..

इन सब बातो और घटना कर्मो को देखे तब एक ही बात निकल कर आती हैं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी एक अगुआ नेता की तरह दिखाई दिए .

राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया पर शेयर की पवित्र मानसरोवर की तस्वीर
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