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आज स्व.भारत रत्न राजीव होते तो देश अपने स्वर्णिम काल में होता एक आंकलन

आज देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का जन्म दिवस हैं ,आज कांग्रेस के पूर्व पी एम् स्व.राजीव गाँधी होते तब इस देश का नज़ारा कुछ और होता

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आज देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का जन्म दिवस हैं ,आज कांग्रेस के पूर्व पी एम् स्व.राजीव गाँधी होते तब इस देश का नज़ारा कुछ और होता . सत्ता के लिए कांग्रेस के सरकार में रहते जितना बबाल विपक्ष ने हमेशा मचाया उससे देश के विकास की गति को नुक्सान पहुचा हैं . भाजपा ने तब विपक्ष में रहते हमेशा नकारात्मक राजनीति की . उसका नेत्रत्व चाहे विपक्ष के किसी भी नेता ने किया हो .

21 वी सदी में कम्पुटर क्रांति के ज़रिये देश के विकास का सपना देखने वाले राजीव गाँधी का व्यक्तितव अपने आप में अनोखा था . दूर द्रष्टि पका इरादा शायद ऊन्हे अपनी माँ स्व. इंदिराजी से मिला था . आज याद आती हैं वो तस्वीरे जब इंदिराजी अन्तरिक्ष में रूस के सहयोग से गए पहले भारतीय अन्तरिक्ष यात्री स्क्वेड्रन लीडर राकेश शर्मा और उनके बीच वार्तालाप …

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बस उसके कुछ दिनों बाद उनकी हत्या ,भारत पर विदेशी ताकतों का साया हमेशा इसी लिए मंडराता रहा . कुछ विकसित देशो को भय था की कही भारत उनको पीछे छोड़ आगे न चला जाए . भारत के पास उसकी पूँजी उसके वो देशवासी थे . जो अपने मुल्क से प्यार करते थे . पर सियासतों की हवा कुछ इस तरह बदली की इंदिराजी की हत्या उन्ही के अंगरक्षकों ने कर दी .

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दूसरा द्रश्य राजीव गांधी का कम्पुटर क्रांति के ज़रिये 21 वी सदी में जाने का संकल्प .आशाये बना कर टकटकी बांधे राजीव गाँधी की तरफ देखता युवा …

फिर आया उस हवा का दौर जब कांग्रेस के ही रक्षा मंत्री ने सत्ता के लिए अपनी पार्टी से गद्दारी कर देश के युवाओं के गले में मंडल कमीशन का पत्ता बाँध दिया और लाल कृष्ण आडवानी ने मंदिर का भगवा पट्टा मंडल कमीशन विरोधियो के माथे बाँध कर देश में एक अलगाव पैदा कर दिया . सत्ता के लिए प्रजा में ही संघर्ष पैदा हो गया . कहाँ कितना खून बहा ,कितनी जाने गयी . ये उन नेताओं के लिए क्या मायने रखता जो सत्ता के लिए कांग्रेस को देश की सत्ता से ही बेदखल कर देना चाहते थे .

सत्ता के लिए आम आदमी की जिन्दगी और लहू बस इस्तेमाल के लिए होता हैं . वो देश की सडको पर बहा 21 वी सदी के सपने को एक बैलगाड़ी ला कर रोकने की कोशिश भी हुई थी .

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आज राजीव गाँधी जिन्दा होते तब शायद देश की तस्वीर इतनी नफरतो के रंग से पुती हुई नज़र नहीं आती . शायद आज हम वाइस्वी सदी में जाने के बारे में बात कर रहे होते ..

– राजीव गांधी ने अर्थव्यवस्था के सेक्टर्स को खोला.
– साल 1988 में की गई उनकी चीन यात्रा ऐतिहासिक थी.
– अगले दशक में होने वाली आईटी क्रांति की नीव राजीव गांधी ने ही रखी.
– मतदान उम्र सीमा 18 साल की और ईवीएम मशीनों की शुरुआत की.
– राजीव ने पंचायती राज के लिए विशेष प्रयास किए .

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जब श्रीलंका में जातीय संघर्ष चल रहा था तो उस वक्त 1987 में भारत और श्रीलंका के बीच एक समझौता हुआ, जिसके तहत भारतीय सेना श्रीलंका में हस्तक्षेप करने पहुंची थी। समझौते के तहत एक भारतीय शांति रक्षा सेना बनाई गई थी, जिसका उद्देश्य श्रीलंका की सेना और लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) जैसे उग्रवादी संगठनों के बीच चल रहे ग्रहयुद्ध को खत्म करना था.

उस दौरान लिट्टे चाहता था कि भारतीय सेना वापस चली जाए, क्योंकि वह हमारी सेना के श्रीलंका में जाने की वजह से अलग देश की मांग नहीं कर पा रहा था। राजीव के फैसले ने लिट्टे के मंसूबों का कामयाब नहीं होने दिया.

हालांकि जब 1989 में वीपी सिंह की सरकार आयी तो उन्होंने भारतीय सेना श्रीलंका से वापस बुला ली थी, जिससे लिट्टे को काफी राहत मिली। लेकिन जब 1991 में फिर से चुनाव होने वाले थे तो लिट्टे को डर सता रहा था कि कहीं राजीव प्रधानमंत्री बन गए तो वह दोबारा श्रीलंका में सेना भेज सकते हैं. इसी वजह के चलते लिट्टे उग्रवादियों ने 21 मई 1991 को तमिनलाडु की एक चुनावी सभा में राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला कर उनकी जान ले ली थी .

ये वही क्रांति आयी जो उनकी हत्या किये जाने के बाद मनमोहन सरकार में अपने सफ़र को तय करने में जुटी रही . विपक्ष का कार्य ही होता हैं आलोचना करना . पर देश हित में सही कार्य के लिए आलोचना करना भी एक तरह से देश के साथ छल हैं .जी एस टी का विरोध भाजपा ने विपक्ष में रहते खूब किया

आधार कार्ड में डाइरेक्ट ट्रांसफर को ले कर विरोध के स्वर मुखर होते रहे . वो विरोध इन योजनाओं का इस लिए था की कही इन योजनाओं के माध्यम से सत्ता में फिर कांग्रेस न आ जाए . जब भाजपा की सत्ता आयी . फिर जिन जिन योजनाओं का भाजपा ने विरोध कर देश को लाखो करोड़ का चूना लगवाया ,आते ही वो जारी कर दी . पर उन्हें जारी करने में भी अपनी कुशलता दर्शाने के चक्कर में उल जलूल तकनीकी फेर बदल कर उनका स्वरूप ही बदल दिया .

आज जहाँ तक भी देश पंहुचा हैं वो कांग्रेस की और राजीव गाँधी जैसे नेताओं के विजन से पंहुचा . यहाँ तक की कम्पुटर का विरोध करने वाली भाजपा के नेता नरेंद्र मोदी  भी इसी का सहारा ले कर ,देश की सत्ता पर एक पी एम् की पहचान के तौर पर जाने जाते हैं .

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती के मौके पर उन्हें याद करते हुए कहा कि वह एक दयालु, सौम्य और स्नेही व्यक्ति थे, जिनकी असामयिक मृत्यु ने मेरे जीवन में एक गहरा शून्य छोड़ा है.

राजीव गांधी की जयंती पर उनके समाधि स्‍थल पर सोनिया गांधी और कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने श्रद्धांजलि दी. उनके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी, प्रियंका गांधी वाड्रा, राबर्ट वाड्रा समेत कांग्रेस के अन्‍य नेताओं ने भी श्रद्धांजलि दी. आपको बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सोमवार को जयंती है और वह देश के छठवें प्रधानमंत्री थे. 20 अगस्‍त, 1944 को जन्‍मे राजीव गांधी की 1991 में तमिलनाडु में हत्‍या कर दी गई थी.

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