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सिंधिया ने शीश झुका दी अटल जी को श्रद्धांजलि ,भौचक्के रह गए भाजपाई

एक पार्थिव शरीर मानव का ,शव ही शिव हैं ये कहा जाता हैं . शत्रु के पार्थिव शरीर का भारतीय सेना भी सम्मान करती हैं . हम भारतीयों को यही सोच विश्व के दुसरे देशो से अलग पहचान देती हैं .

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एक पार्थिव शरीर मानव का ,शव ही शिव हैं ये कहा जाता हैं . शत्रु के पार्थिव शरीर का भारतीय सेना भी सम्मान करती हैं . हम भारतीयों को यही सोच विश्व के दुसरे देशो से अलग पहचान देती हैं . भारत मैं हाल ही के घटना चक्रों पर एक नज़र  डाली जाए . तब एक ही घटना ने बड़ी खबर बन देशवासियों को प्रभावित किया .

वो थी भारत के तीन बार पी एम् रह चुके श्री अटल बिहारी वाजपेयी .एक ऐसे संस्थापक जिन्होंने एक बीज को धरा में बोया और उसे वट व्रक्ष की तरह विशाल आकार लेते हुए देखा .आजादी के बाद से विपक्ष की राजनीति में कांग्रेस का अन्तर्विरोध चलता रहा . सत्ता आयी और चली गयी चेहरे आये और बदलते गए . विश्व की राजनीति ने करवट ली लेकिन विश्व के महान  लोकतांत्रिक देशो में एक देश लोकतंत्र की पताका लिए अपनी विकासोन्मुखी यात्रा पर आगे बढ़ता गया

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मिज़ाज यहाँ भी बदला जब बदला जब अटल बिहारी ने भाजपा की सक्रीय राजनीति से संन्यास ले लिया .सात साल एकांतवास में रहे चुके अजात शत्रु ने महाप्रयाण किया फिर से आने को ,कूंच किया फिर से जन्म लेने को . गीता में लिखा हैं शरीर नाशवान हैं आत्मा नहीं .

एक घटना ने मेरे अंतर्मन को बहुत प्रभावित किया शायद लाखो को शायद करोडो को ..

एक द्रश्य जो महाद्र्श्य था मीडिया ने इसको इतना तूल नहीं दिया न तुलना की लेकिन ये अपने आप में अद्भुत था .

ये तब का द्रश्य हैं जब कांग्रेस नेता ग्वालियर के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने शीश को अटल जी के पार्थिव शरीर के सामने जमीन पर माथा लगा उनको अपनी श्रद्धांजलि  दी . सारे भाजपाई जैसे सन्न रहे गए बड़े भाजपा नेताओं के माथे पर आयी पसीने की बूंदों ने जैसे उन्हें खुद शर्म से ही गाड दिया था .

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सिंधिया का इस तरह से अटल जी को श्रद्धांजलि देना अटल जी के चेले चपाटो को एक सबक था . किसी ने भी किसी भाजपा के नेता उनके पी एम् हो या मंत्री या कार्यकर्त्ता या फिर मुख्यमंत्री किसी को भी इस तरह सम्मान देते किसी ने नहीं देखा .

किसी राजनैतिक व्यक्तित्व के शरीर के हाव भाव ,भंगिमा और प्रतीकात्मक आचरण बड़े राजनैतिक संदेशो को जन्म देने लगता हैं . अनुमान लगने लगे हैं . यहाँ तक कहा जाने लगा दबी ढकी चर्चा शुरू भी हो गयी . मध्य प्रदेश चुनावों को ले कर ,कहा जाने लगा सिंधिया जी की इस श्रद्दांजलि ने भाजपा का परम्परात्मक एक बड़ा तबका अपने पक्ष में खड़ा कर लिया हैं .

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पहले कुछ इसी अंदाज़ में राहुल गाँधी ने पी एम् मोदी को गले लगा कर प्रेम के सन्देश को सांझा किया था . अब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक संवेदन शील श्रद्दांजली दे कर भाजपा के उन अनुचरो को सन्देश दिया जो आज शासक वर्ग का हिस्सा हैं .

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