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राहुल के सिख दंगो पर ब्यान के समर्थन में आये पत्रकार भाजपा के झूठ का पर्दाफाश

.कुछ लोग अपनी जानकारी के बल पर 1984 के बारे में लंदन में कही गयी राहुल की बातों को काटने के लिये मचल उठे हैं. इनमें इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी शामिल हो गए हैं

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राहुल गाँधी के भाषणों और उनके बयानों पर भाजपा अपनी लाल पीली आँख दिखाते हुए . उन्हें पूरी तरह भले ही झुठलाती नज़र आये लेकिन देश के कुछ पत्रकारों ने राहुल गाँधी के उस वक्तव्य का समर्थन किया हैं जिसमे उन्होंने कहा हैं की कांग्रेस पार्टी ने निर्णय ले कर सिख दंगे नहीं कराए थे .कुछ लोग अपनी जानकारी के बल पर 1984 के बारे में लंदन में कही गयी राहुल की बातों को काटने के लिये मचल उठे हैं. इनमें इतिहासकार रामचंद्र गुहा भी शामिल हो गए हैं .ठीक इसके विपरीत  ओंम  थानवी ने अपने एक लेख में कुछ इस तरह से पुष्टि की हैं . जिसको पढने के बाद सच्चाई खुद ब खुद सामने आ जाती हैं .

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हिंदुस्तान टाइम्स (2-2-2002) की इस क्लिपिंग से जहां यह पता चलता है कि कांग्रेस के कुछ नेता इन दंगों में शामिल पाये गये थे, वहीं यह भी जाहिर होता है चौरासी के सिख दंगों में भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भी कई कार्यकर्ता शामिल  थे.

खालिस्तान नाम से अलग सिख देश बनाने की मांग से ये लोग पहले से क्रुद्ध थे . ओम थानवी जी ने यह भी बताया है कि “ दंगों में आहत-हताहत मामलों की गवाहियों की जांच के लिए दिल्ली शासन ने जस्टिस जैन-अग्रवाल की एक समिति गठित की थी.

उस समिति (जिसकी रिपोर्ट कुछ साल पहले दिल्ली सरकार से मैंने किसी तरह जुटाई थी) की अनुशंसा पर भाजपा और संघ के 49 कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ 14 मुक़दमे दर्ज किए गए. ज़्यादातर मुक़दमे श्रीनिवासपुरी थाने में दर्ज हुए. दंगों के सिलसिले में गिरफ़्तार भाजपा-संघ के अनेक कार्यकर्ताओं के नाम उक्त ख़बर में मिलेंगे।….हाल में चल बसे स्व.अटल बिहारी वाजपेयी के एक चुनाव-एजेंट रामकुमार जैन का नाम भी एक एफआईआर (FIR 312/15 dt. 18.6.1992) में था.

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ओम जी लिखते हैं कि “कहने का मतलब यह कि चौरासी के दंगे मूलतः हिंदू-सिख हिंसा थे. उसमें कांग्रेस के कार्यकर्ता तो शामिल थे ही, भाजपा-संघ के भी जुट गए थे. एक  वहशी दौर था .” इस विषय में हम राहुल गांधी से पूरी तरह सहमत होते हुए यह और जोड़ना चाहेंगे कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा या कार्यपद्धति में दंगा नाम की चीज का कोई स्थान नहीं है, जबकि इसके विपरीत आरएसएस दंगों को, भारत में मुस्लिम बस्तियों को उजाड़ना अपना पवित्र कर्तव्य मानता है . उसके नेता मानते हैं  कि भारत में मुस्लिम बस्तियां मिनी पाकिस्तान हैं . इसलिये यह कहना पूरी तरह से सही नहीं है कि कोई भी पार्टी आदेश जारी करके दंगों में शामिल नहीं होती है .

आरएसएस और उसके दूसरे संगठन बाकायदा निर्णय लेकर दंगों में शामिल होते रहे हैं. 2002 का गुजरात दंगा तो इसका सबसे बड़ा प्रमाण है .आरएसएस वालों की सैद्धांतिक दीक्षा में यह सब शामिल है . आरएसएस पर मेरी किताब में इस बारे में उनके नेताओं के महान वचनों को बाकायदा उद्धृत किया गया है .

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