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क्या राहुल गाँधी कुछ अलग सोच पायेंगे ,लोकसभा चुनावों के लिए अलग रास्ता ?

प्रदेशो में क्षेत्रीय दलों का आधिपत्य बनाए रखना भाजपा के लिए संजीवनी हैं . ये बात अमित शाह और मोदी जी को बहुत अच्छी तरह मालूम हैं

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प्रदेशो में क्षेत्रीय दलों का आधिपत्य बनाए रखना भाजपा के लिए संजीवनी हैं . ये बात अमित शाह और मोदी जी को बहुत अच्छी तरह मालूम हैं . उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा हो या पश्चिमी बंगाल में ममता बनर्जी .भाजपा के लिए वो सांस की नलिया हैं जो भजपा को कांग्रेस के खिलाफ ऑक्सीजन प्रदान करती हैं .राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस भाजपा का एक बड़ा ज़बाब हो सकती हैं . अब परिस्थतिया बिलकुल अलग हैं .

सभी क्षेत्रीय पार्टियों को लगता हैं लोकसभा चुनावों में शायद उनकी भी लाटरी कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री  कुमार स्वामी की तरह दिल्ली में पी एम् पद के लिए लग जाए .

अपने स्वार्थ से देश के लिए कोई ऊपर उठने को तैयार नहीं एक ही बाधा भाजपा और क्षेत्रीय दलों की हैं ,कांग्रेस का वो एक ही नेता हैं जिस पर भाजपा के साथ महागठबंधन में शामिल सभी दलों के भूपतियो की सहमती हैं केवल इस बात पर की वो देश का पी एम् न हो जिसका नाम राहुल गाँधी हैं .

बहुत दिनों के बाद अपना लेख लिखने का साहस कर पाया हूँ लेकिन लोकतंत्र में सब कुछ बिक चूका हैं देश की आवाज़ अपनी सच्चाई के साथ अभी जिन्दा हैं इस लोकतंत्र में ,जिस आवाज् को कांग्रेस और उन सभी राजनैतिक दलों को सुनना होगा,जिस पर भविष्य के भारत की तस्वीर लिखी जानी हैं .

अमित शाह के सियासी दांव को राहुल गांधी का बड़ा झटका मिलेंगे युवा नेताओं को टिकट

राहुल गांधी के नाम पर सभी को खुजली हैं . हो भी क्यों न ,दागी नेताओं का जबसे बिल फाड़ा हैं सबके दिमाग की माँ बहन जो हो गयी हैं . ऐसा नेता जो अपनी ही सरकार का पास किया हुआ बिल बिना नफा नुक्सान देख फाड़ दे . ऐसे ईमानदार नेता से देश को बचाओ भले ही अपनी सरकार बचाने के लिए कांग्रेस को सत्ता से बाहर रखने के लिए कुछ भी करना पडे. मोदी कम से कम ममता सरकार में चिट फंड घोटाले के आरोपी को अपनी पार्टी में शामिल कर क्लीन चिट दे दे .

ममता और भाजपा का मुकाबला सही ,कांग्रेस तो कही हैं ही नहीं कुछ कांग्रेस के बक्चोद नेता ममता के पैर छु अपना राजनैतिक वर्चस्व बचा रहे हैं. भाजपा के कई कार्यकर्त्ता शहीद हुए ,कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को भी मारा गया हत्याए की गयी . कांग्रेस के ही नेता ममता की गोद में बैठे रहे ,पंचायत चुनावों में ममता सरकार का रवैया एक तरफा तानाशाह की तरह रहा हैं .

उड़ गयी विकास की चिड़िया “कांग्रेस के अनोखे चुनाव प्रचार से भाजपा के उड़ गए होश

उत्तर प्रदेश में सपा के साथ भाजपा की सेटिंग सबसे ज्यादा लाजबाब थी . रामगोपाल के जरिये ,कांग्रेस को धोखे में रखा गया . गठबंधन पार कांग्रेस को फेंसा दिया गया . नतीजा कांग्रेस खत्म . अगर सपा भाजपा की सहायता कर सकती हैं तब बिना सम्मानजनक समझौते के बिना लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का सपा और बसपा के साथ जाना फिर से बड़ी गलती .

आज कल कांग्रेस नेत्रत्व की मीटिंग दिल्ली तक सिमट गयी हैं ,कांग्रेस अध्यक्ष को खुल कर सडको पर उतर कर आना होगा . इन्दिराजी और संजय गांधी की तरह ,जनता को विशवास दिलाना होगा . क्योकि मोदी के लिए ,और कांग्रेस के खिलाफ उसका सबसे बड़ा कारण प्रिंट मीडिया और टी वी मीडिया मिथ्या प्रचार कर रहा हैं .

भाजपा में फ़ैली हैं बैचेनी ,कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के खौफ से उडी हैं नींद

इस बीच राहुल गाँधी के समर्थको में एक धडा महागठबंधन की वकालत करता नज़र आ रहा हैं वही दूसरा धडा ताल ठोंक कर अकेले चलने की बात बोल रहा हैं .

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