Azadmanoj
Hindi News, Today's Latest News in Hindi, News - हिन्दी समाचार

विपक्ष का नारा मोदी हटाओ नहीं ,असली नारा देश की जनता का” मोदी भगाओ “

अपने ही ख्यालो और आभासी दुनिया की सैर करते पी एम् मोदी ,वास्तविकता से दूर खुद को श्रेष्ठ मान बैठे हैं

0 818

नरेंद्र  मोदी भारत के पी एम् माननीय नरेंद्र मोदी , विकास के घोड़े पर बैठ कर अपना सत्ता पाने का सपना पूरा कर चुके हैं . अच्छे दिनों के नाम पर ,बेंको के सामने लगी हुई लम्बी लाइन ,जी एस टी से बेहाल भारत का व्यापार ,खेती का अच्छे दामो के इंतज़ार में क़र्ज़ से डूबा, आत्म हत्या करता किसान ,विदेशो में घटता सम्मान .

बेंको का पैसा ले कर भागते व्यापारी दोस्त ,नोट बंदी के नाम पर भाजपा अध्यक्ष की देख रेख में बुना गया काले धन को सफ़ेद करने का माया जाल ,जिस पर राष्ट्रवाद को प्रेरित करता एक बड़ा सा पर्दा ,और आरोपों पर एक लम्बी चुप्पी साधे सरकारी तंत्र और देश का बादशाह नरेंद्र मोदी .

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के बिना भाजपा में पत्ता नहीं हिलता ,मोदी करते हैं जुमलेबाज़ी

अब पी एम् साब कश्मीर में समस्या पैदा कर वहां से भाग चुके हैं . ऐसा ही कुछ देश की अर्थ्वय्वस्था  के साथ होने जा रहा हैं . पी एम् साब लोकसभा 2019 लोकसभा चुनाव में विपक्ष के साथ लड़ाई को अपने मोबाइल की सेल्फी की तरह समझ रहे हैं जिसमे बस उन्ही का चेहरा फिट होता हैं . आत्म केन्द्रित पी एम् मोदी 2014 से ही आत्म मुग्धता की वीमारी से ग्रसित हैं . जो एक तरह का अवसाद हैं . जो हर उस बादशाह को हुआ जिसने  अपने आपको हमेशा श्रेष्ठ दिखाने की और दिखने की कोशिश की हैं.

हाल ही में उनका एक साक्षात्कार के दौरान आया हुआ ब्यान हैं . जिसमे उनका कहना हैं की विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं हैं . एक ही मुद्दा हैं वो हैं मोदी हटाओ . इसका अर्थ ये हैं की वो खुद मानते हैं की देश में जितना भी अब तक बुरा हुआ उसकी वज़ह वो हैं .

सिद्धू की दहाड़ .मजीठिया पर करो कार्यवाही ,पंजाब की सारी लोकसभा सीट जीता दूंगा

तब तो विपक्ष को पी एम् मोदी के शासन काल में हुई गंभीर प्रशासनिक भूलो ,लिए गये गलत निर्णय ,उन पर सवालिया निशाँ लगाने का अधिकार तो खुद ही मिल जाता हैं . अब बाते करते हैं मोदी जी और उनके द्वारा प्रचारित जुमले की ,जुमला हैं पी एम् मोदी नहीं तो और कौन ?

इसका सीधा सा उत्तर खुद पी एम् मोदी और उनके समर्थक दे चुके हैं . सबसे ज्यादा टार्गेट मुख्य शत्रु को किया जाता हैं . ये सारे कार्य बीते चार सालो में मोदी जी सार्वजनिक मंचो और सोशल मीडिया पर कांग्रेस और राहुल गाँधी पर हमले कर दे चुके हैं . उस पर संदेह नहीं किया जा सकता .

पी एम् मोदी के बिलकुल उलट सुलझे हुए राहुल गाँधी ,जो अपनी आलोचनाओं को एक सीख के रूप में स्वीकार करते हैं . उनकी स्वीकार्यता तब और ज्यादा हो जाती हैं जब वो अपने साथ सहयोगी दलों को प्राथमिकता और सम्मान देते हैं . अहंकार मुक्त राहुल की वैचारिक लड़ाई अहंकार युक्त एक ऐसे पी एम् से हैं . जिसके आस पास चाटुकारों की फौज हैं ,एक ऐसी दुनिया का जाल जो आभासी हैं .जिसमे बादशाह को अपने अलावा और दूसरा कोई दिखाई नहीं देता .

इंदिरा गाँधी के योगदान पर सवाल उठाना देशद्रोह : शिव सेना के इस ब्यान से हडकंम्प

इस बार लोकसभा का चुनाव विपक्षी दलों के साथ भाजपा का मुकाबला नहीं हैं . इस बार भाजपा का मुकाबला पूरे देश से हैं . जिसमे बेरोजगार युवा हैं तो किसान भी हैं ,सीमा पर कटते और शहीद होते जवानो के बेसहारा परिवारों से हैं . भजपा का मुकाबला देश के तमाम उन लोगो से हैं जो बेंको के सामने अपने ही पैसे के लिए खड़े रहे . उन महिलाओं से हैं जिनकी सुरक्षा का नारा दे कर सबसे ज्यादा दमन और शोषण हुआ . भाजपा का मुकाबला उस हिन्दुत्व से भी हैं जिसकी दुहाई दे कर श्री राम मंदिर का नारा दे कर आज तक तिरपाल में बैठे राम लला से हैं .इस बार भाजपा का मुकाबल उन अपने सहयोगी दलों से हैं जिनको अपमान का घूँट पी कर मोदी के साथ सरकार में रहना पडा. उस भाजपा का चेहरा यदि नरेंद्र मोदी हैं तब ये भी कहा जा सकता हैं इस बार देश की जनता बनाम पी एम् मोदी का चुनाव हैं.

Leave A Reply

Your email address will not be published.