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राहुल गाँधी की बंगाल के नेताओं से मीटिंग बेनतीजा रही , गठबंधन पर एक मत नहीं

कांग्रेस का वाररूम कहे जाने वाले ‘15 रकाबगंज रोड’ पर राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान इन नेताओं ने राज्य में पार्टी को मजबूत करने के सन्दर्भ में अपने विचार साझा किए

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कांग्रेस के वार रूम में पश्चिमी बंगाल को ले कर माथा पच्ची 

कांग्रेस का वाररूम कहे जाने वाले ‘15 रकाबगंज रोड’ पर राहुल गांधी के साथ मुलाकात के दौरान इन नेताओं ने राज्य में पार्टी को मजबूत करने के सन्दर्भ में अपने विचार साझा किए और गठबंधन को लेकर भी अपनी राय से उनको अवगत कराया.कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के प्रमुख नेताओं के साथ बैठक की जिस दौरान नेताओं ने आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन एवं संगठन को मजबूत करने के लिए अपने विचार उनके साथ साझा किए.

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बैठक के बाद यह जानकारी सामने आई है कि आगामी लोकसभा चुनाव में राज्य में गठबंधन को लेकर पार्टी दो धड़ों में बंटी हुई है. पश्चिम बंगाल कांग्रेस का एक धड़ा तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं तो एक धड़ा सीपीएम के साथ जाने के पक्ष में है.
AICC के राष्ट्रीय सचिव और पश्चिम बंगाल में कांग्रेस विधायक मोइनुल हक ने तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन की खुलकर पैरवी की है. हक ने संवाददाताओं से कहा, कांग्रेस अध्यक्ष  राहुल गांधी से मुलाकात का एक ही मुद्दा था .
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कि लोकसभा चुनाव में किसके साथ जाने से हमें फायदा होगा. मैंने अपनी बात रखी. मैंने स्पष्ट किया कि 2016 में हालात अलग थे जब हमें सीपीएम के साथ चुनाव लड़ना पड़ा. मूल्यांकन के बाद पता चला कि गलत निर्णय था.

उन्होंने आने वाले समय में कांग्रेस छोड़ने संबंधी खबरों से इनकार किया.  इस खबर को उन्होंने निराधार बताया .सूत्रों के मुताबिक अधीर रंजन चौधरी तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन के पक्ष में नहीं हैं.

हक़ ने आगे  कहा की अभी की परिस्थिति में एक तरफ बीजेपी और दूसरी तरफ टीएमसी है. सबसे बड़ी समस्या बीजेपी है. अगर बीजेपी को रोकना है तो तृणमूल कांग्रेस के साथ जाना होगा.’’ मोइनुल हक ने कहा, …

सीपीएम के साथ जाने का मतलब खुदकुशी करना होगा. अगर हम तृणमूल कांग्रेस के साथ नहीं जाते हैं तो इससे कांग्रेस को नुकसान होगा और तृणमूल कांग्रेस को भी नुकसान होगा.

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