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भीड़ तंत्र और नफरत के सामने गांधी विचारधारा के साथ जीत पाएंगे राहुल गाँधी

राहुल गाँधी अब ज्यादा सहज नज़र आने लगे हैं . एक देश की आशा नज़र आते हैं नफ़रत को सत्य प्रेम अहिंसा की चुनौती देते नज़र आते हैं . भ्रष्टाचार को सदाचार की चुनौती देते नज़र आते हैं .

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झारखंड के गुस्सैल हिन्दुत्व ने एक अस्सी साल के बूढ़े संत को पीटा गया . मीडिया की सुर्खियों तक ये खबर सीमित हो कर रह गयी . भीड़ के भीड़ तंत्र ने देश में एक अलग तरह के कट्टर समाज को जन्म दे दिया हैं . जिसकी अवधारणा का आधार खाप पंचायतो की तरह हैं . जिसका न्याय वयवस्था पर से विशवास हट गया हैं . ये भीड़ खुद फैसला सुना कर ,आरोपी का फैसला कर देना चाहती हैं

इस भीड़ तंत्र को भाजपा नेताओं का वरद हस्त प्रदान हैं . जैसा कभी कुछ नेताओं का दस्यु कनेक्शन हुआ करता था . संस्क्रती को बढ़ावा देते ये जनसेवक भविष्य के अपराधियों और आतंकी समूहों को जन्म दे रहे हैं जिसका देश के समाज पर और देश पर गहरा बुरा प्रभाव अभी से दिखने लगा हैं . अभी शुरुआत हैं .

क्या राहुल गाँधी कुछ अलग सोच पायेंगे ,लोकसभा चुनावों के लिए अलग रास्ता ?

बुरी आदते इंसान जल्दी सीखता हैं . जिस पर भी वैधानिक चेतावनी जारी करो ,उसकी आदत और नशे को आदमी एक बार अपना कर ज़रूर देखता हैं . सिगरेट ,तम्बाकू या फिर मदिरा का सेवन या अन्य नशे जिनका कारोबार भारत में फल फूल रहा हैं . पंजाब की हालत देश के सामने उदहारण हैं . जब नक्सलवाद और कश्मीर के पत्थर वाजो पर चर्चाये हो सकती हैं तब इन तथाकथित भगवा जो श्री राम का नारा लगा कर अपनी हिंसा को सही ठहराने का प्रयास करते हैं,उन पर चर्चा और कानून क्यों नहीं बनता . हमारा देश इतना हिंसक कभी नहीं रहा जितना आज बन गया हैं . जिस देश ने विश्व को शांति का सन्देश दिया हो . जिसके सत्य प्रेम अहिंसा के सिधांत को अमेरिका ने आत्मसात किया हो.

वो देश वाकई बदल गया . दूसरो के दर्द बांटने वाले भारतवासी अब दर्द देने में यकीन रखते हैं ..

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ये भीड़ तंत्र विकसित क्यों हो रहा हैं इस पर चर्चा होना बहुत ज़रूरी हैं . मीडिया की टी वी डिबेट में शायद ही चार साल पहले इतना मछली बाज़ार जैसा बना हो . भाजपा के अपरिपक्व नेता झूठी खबरों का हवाला देते नज़र आते हैं . सवाल पूंछो तो मीडिया में ही सवाल पूछने वाले को देशद्रोही कह देना गद्दार कह देना ,क्या ये अपराध की श्रेणी में भाजपा के शासन काल में बंद हो गया हैं . मीडिया के एंकर जिनको देश के भोले भाले लोग जनता की आवाज़ समझते हैं जब बो भी सरकार के साथ मिल कर विपक्ष पर हमले बोलता हैं तब लगता हैं . ये वर्ग विपक्षी दलों को आख़री मुग़ल बादशाह बहादुर शहं ज़फर की तरह देश से निर्वासित करके छोड़ेगा .

इन सबके बीच गांधी की विचारधारा का सूत्र थाम कर देश में आशा का दीपक राहुल गाँधी ने रोशन कर रखा हैं. कभी गौर से पी एम् मोदी के मुख की केमेस्ट्री देखिये और दूसरी तारा राहुल गाँधी का कूल चेहरा . जिस पर पी एम् साहेब की तरह चिंताए आशंकाए ,और शब्दों से निकलता नफरत भरा भाषणों का सैलाब .

राहुल गाँधी अब ज्यादा सहज नज़र आने लगे हैं . एक देश की आशा नज़र आते हैं नफ़रत को सत्य प्रेम अहिंसा की चुनौती देते नज़र आते हैं . भ्रष्टाचार को सदाचार की चुनौती देते नज़र आते हैं .

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