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यू पी में एक और भाजपा सांसद की बगावत ,भाजपा की अटकी साँसे

असंतुष्ट सांसदों का एक बड़ा गुट मोदी जी की सरकार में अपने आप को असहज महसूस कर रहा हैं . केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को अपनों के  ही विरोध  का सामना करना पड़ रहा है.

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ओर पी एम् मोदी की सरकार में उन्ही के सांसदों का भरोसा  अपनी केंद्र सरकार से टूटने लगा हैं पी एम् मोदी के आस पास कुछ ही ख़ास चेहरे हैं जिन पर मोदी जी को विशवास हैं बाकी बहुत कम सांसदों को बोलने से रोक दिया जाता हैं . यहाँ तक की उनकी क्षेत्रीय समस्याओं को भी दरकिनार कर दिया जाता हैं .

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख करीब आती जा रही है, असंतुष्ट सांसदों का एक बड़ा गुट मोदी जी की सरकार में अपने आप को असहज महसूस कर रहा हैं . केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को अपनों के  ही विरोध  का सामना करना पड़ रहा है.

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कर्नाटक विधानसभा चुनाव और देश के कई राज्यों में हुए उपचुनावों में मिली हार के बाद भाजपा की अनुवाई वाली राजग के कई घटक भाजपा के खिलाफ बयानबाजी करते नजर आ रहे हैं. केवल इतना ही नहीं, भाजपा सरकार के कुछ सांसदों को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्य प्रणाली में खामियां नजर आने लगी है.

इसी क्रम में भाजपा सरकार का एक और सांसद अपनी ही सरकार की बगावत  करते हुए नजर आ रहे है. मीडिया के अनुसार सलेमपुर से सांसद रवीन्द्र कुशवाहा जिनका कुशवाहा समाज में अपना एक अलग वर्चस्व हैं ,ने अपनी ही पार्टी की केंद्र सरकार के खिलाफ धरने पर बैठने की घोषणा कर दी हैं . यूपी की सलेमपुर सीट से सांसद बने रविन्द्र का आरोप है कि उन्होंने आठ बार अपनी सरकार के रेल मंत्री पीयूष गोयल को खत लिखा लेकिन उन्होंने एक बार भी इस पर ध्यान नहीं दिया गया .

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यह बात सांसद रवीन्द्र कुशवाहा  को नागवार गुजरी है और उन्होंने संसद के मानसून सत्र में संसद के बाहर स्थित गांधी प्रतिमा पर धरना देने का ऐलान किया है.
इस बात की जानकारी देते हुए रविन्द्र कुशवाहा ने मीडिया कर्मियों को  बताया कि जनता का दबाव है कि उनके संसदीय क्षेत्र के बिल्थरा रोड तथा सलेमपुर रेलवे स्टेशन पर अनेक ट्रेनों का ठहराव हो.

उन्होंने बताया कि वह इस सिलसिले में रेल मंत्री पीयूष गोयल को आठ बार पत्र लिख चुके हैं. संसद के पिछले सत्र की समाप्ति पर गोयल द्वारा बुलाई गई बैठक में भी उन्होंने इस मसले को उठाया था, फिर भी कोई परिणाम नहीं निकला.
उन्होंने कहा कि ठहराव घोषित ना होने से आम जनता में सरकार की तो किरकिरी हो ही रही है, खुद उनके प्रति भी नाराजगी बढ़ रही है. इसी को देखते हुए उन्होंने संसद के आगामी मानसून सत्र में गांधी की प्रतिमा के समक्ष धरना देने का फैसला लिया है.

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भाजपा सांसद के एलान के बाद भाजपा के संगठन में खलवली मची  हुई हैं . सांसद को मनाने की भी कोशिश की गयी लेकिन उन्होंने धरना देने का निश्चय और पक्का कर लिया हैं .

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