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अमित शाह के सियासी दांव को राहुल गांधी का बड़ा झटका मिलेंगे युवा नेताओं को टिकट

भाजपा भी अपने करीब 150 सांसदों के टिकट काट कर नये लोगो को लड़ाने का मन बना चुकी हैं . कांग्रेस की इस नीति को भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की नीति का काउंटर बताया जा रहा हैं

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देश के कई राज्यों में कांग्रेस ने अपनी तैयारी कर ली हैं  कांग्रेस शीर्ष भी नेताओं के साथ बारिश में सियासत की ड्रेनेज बनाने में लगा हैं .कांग्रेस में राहुल गाँधी के अध्यक्ष बन जाने के बाद ये तो तय माना जा रहा हैं की विधानसभा के चुनावों में इस बार अधिकतर नये युवाओं को चुनाव लड़ने का अवसर दिया जायेगा .

भाजपा भी अपने करीब 150 सांसदों के टिकट काट कर नये लोगो को लड़ाने का मन बना चुकी हैं . कांग्रेस की इस नीति को भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह की नीति का काउंटर बताया जा रहा हैं . एक तरह से कांग्रेस ने युवाओं को टिकट देने की बात पर सहमती जाता कर अमित शाह के आने वाले दांव की काट तैयार कर दी हैं .

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छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस लगभग 60 से 65 सीटों पर नया प्रत्याशी खड़ा करेगी. कांग्रेस की इस बार कोशिश है कि अधिकांश क्षेत्रों में अाक्रामक आैर जनता के बीच अच्छी पकड़ रखने वाले नेताओं   को ही चुनाव में खड़ा किया जाए . छत्तीसगढ़ की तरह ही मध्यप्रदेश आैर राजस्थान में कांग्रेस नए चेहरे मैदान में उतारेगी. तीनों राज्यों में सत्ताधारी दल भाजपा के खिलाफ बने माहौल को भुनाने में पार्टी इस बार कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही है. यही वजह कि कांग्रेस सिर्फ उन्हीं पुराने चेहरों को टिकट देगी जो अनुभवी होने के साथ जनता के बीच गहरी पैठ रखते हैं.

इसी रणनीति पर बात करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष ने शनिवार को तीनों राज्यों के कांग्रेस अध्यक्षों के साथ बैठक की हैं बैठक में तीनों राज्यों के प्रभारी भी मौजूद थे .छतीसगढ़ में कान्रेस टिकट वितरण में इस बार कोई भी कमी नहीं छोड़ना चाह रही  हैं . बताया जा रहा है यही वजह है कि छत्तीसगढ़ में लगभग सभी विधानसभा के प्रभारियों से कहा गया है कि इस बात की कोशिश की जाए कि सभी जगहों से केवल एक  नाम ही पीसीसी तक पहुंचे.

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किसी भी प्रकार का विवाद स्थानीय स्तर पर ही समाप्त कर लें ताकि टिकट बांटे जाने के बाद पीसीसी पर कोई आरोप-प्रत्यारोप लगाकर पार्टी के खिलाफ माहौल न बनाएं. बताया गया है कि इस बार के टिकट वितरण में राहुल गांधी आक्रामक आैर जुझारु युवाआें को ज्यादा प्राथमिकता देंगे. इसके पीछे सत्ता के खिलाफ बने माहौल को आैर आगे बढ़ाना तथा नाराज लोगों को अपने पक्ष में करना पहली चुनौती है.

इस चुनौती को पूरा करने के लिए ही आक्रामक शैली की जरूरत हैं . क्योंकि यदि जरा भी ढीले पड़े तो विरोधी उनका यह अवसर उनके हाथ से छीन लेंगे. पार्टी सूत्रों का कहना है कि जिन नेताआें को टिकट देने का इशारा मिल गया है वे अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं. आैर चुपचाप संगठन के निर्देशों का पालन कर रहे हैं.

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