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प्रणव दा के नागपुर दौरे की इन साइड कहानी ,राहुल के इशारे पर संघ आया साथ

खांटी कांग्रेसी अपने प्रणव दा जिनके खून और डी एन ए में कांग्रेस हैं . जिनको अचानक एक बुलावा पहुचा बीते दिनों संघ के आयोजन में शामिल होने का . वो कार्ड कही पढ़ कर रख भर दिया गया था . प्रणव दा भी जैसे भूल गये थे .

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खांटी कांग्रेसी अपने प्रणव दा जिनके खून और डी एन ए में कांग्रेस हैं . जिनको अचानक एक बुलावा पहुचा बीते दिनों संघ के आयोजन में शामिल होने का . वो कार्ड कही पढ़ कर रख भर दिया गया था . प्रणव दा भी जैसे भूल गये थे .

अचानक राहुल गाँधी कुछ सियासी राय पूंछने के लिए मंदसौर की किसान सभा में आने से पहले उनके पास पहुचे थे . उनके बुलावे पर ,संघ केनिमंत्रण के बारे में राहुल गांधी को उन्होंने बताया गया था . इसी बीच मोहन भागवत का भी कई बार फोन राहुल गाँधी के पास प्रणव दा को ले कर आ चूका था . किसी के भी फोन का उत्तर देने से पहले राहुल गाँधी ने मूक रहना बेहतर समझा था .

आप वहां जाओ और कांग्रेस और संविधान की बात कहो ,बाकी सब आपके साथ हैं.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी में एक सबसे बड़ी कमी हैं अपने फैसलों को मीडिया तक नहीं आने देना चाहते . सस्ते प्रचार से बहुत दूर हैं राहुल गाँधी  ..

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तीस से ज्यादा कांग्रेसियों के अनुग्रह जो प्रणव दा से किये गये वो मीडिया में खूब चले शाह और मोदी के एजंडे के अनुसार , गोदी मीडिया ने उसको प्रचारित खूब किया . राहुल गांधी अपना काम कर चुके थे .कांग्रेस के भीष्म पितामह और अर्जुन ने आपस में मिल कर रणनीति तय कर ली थी .

मीडिया ने मोदी और शाह के समर्थन में कांग्रेस के नेताओ की प्रणव दादा को भेजी चिट्ठियों को ले कर बहुत घेरा ,कांग्रेस में जैसे सन्नाटा छाया हुआ था . शोले फिल्म के राम गढ़ जैसा ..

मीडिया के आज तक चेनल पर रागनी नायक के सवालों का ज़बाब आर एस एस विचारक राकेश सिन्हा के पास कोई ज़बाब नहीं था . वो खुद भी संघ सर चालक के भाषण को पचा नहीं पा रहे थे . अपसेट हो भागने लगे थे . अंजना ॐ कश्यप ने जैसे तैसे रोका .

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संघ समर्थको की बैचैनी समझ आ रही थी

प्रणव दा आये और संघ को राष्ट्रभक्ति और देशभक्ति के मायने इतिहास सुना कर और संविधान के क़ानून बता कर ,एक सही रास्ता दिखा गये .

उन्होंने बोला देश में सात धर्म हैं 122 भाषा ,और 1600 विभिन्न बोलिया उनके साथ हिन्दोस्तान को साथ मिल कर चलना होगा .

मोहन भगवत भी आज कांग्रेस से सहमत नज़र आये .

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