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मुंबई में बूथ कार्यकर्ताओं के दिल को झकझोर गए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी

राहुल गाँधी बूथ कार्यकर्ताओं के बीच उन सबका उत्साह बढाने के लिए कल मुंबई में मौजूद थे . उन्होंने अपने भाषण के बीच कुछ ऐसा बोल दिया जिसने वहां बैठे कांग्रेस कार्यकर्त्ता का दिल झकझोर दिया .

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राहुल गाँधी बूथ कार्यकर्ताओं के बीच उन सबका उत्साह बढाने के लिए कल मुंबई में मौजूद थे . उन्होंने अपने भाषण के बीच कुछ ऐसा बोल दिया जिसने वहां बैठे कांग्रेस कार्यकर्त्ता का दिल झकझोर दिया .

कांग्रेस में इससे पहले कार्यकर्ताओं को सिर्फ एक तरह से बंधुआ मजदूर की तरह बड़े नेता मान लेते थे . राहुल गाँधी ने अभी से कहना और अम्ल में लाना शुरू क्र दिया हैं . अपने भाषणों में ये कह कर की ये नेताओं की नहीं कार्यकर्ताओं की पार्टी हैं . अपरोक्ष रूप से उन नेताओं को भी चेतावनी दे दी हैं जो अपने अपने सियासी गेंग बना कर कार्यकर्ताओं का एक बड़ा झुण्ड अपने हिसाब से चलाते थे

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राहुल गाँधी  के नेत्रत्व में में बदलाव का नारा वाकई में कांग्रेस को बदल रहा हैं . पारिवारिक नेताओं को संगठन में उतना महत्व नहीं दिया जा रहा जितना की जमीन से जुड़े युवा नेत्रत्व को ,सिफारिशों का दौर अब कांग्रेस में बीते दिनों की बात हो गयी हैं .

संगठन में जिम्मेवारी के साथ प्रोफेशनल ढंग से रोजाना के क्रिया कलापों की रिपोर्ट माँगी जा रही हैं .

इसी कड़ी में कल मुंबई में राहुल गाँधी ने एक बड़ी पहल की ,उन्होंने कहा की दिल्ली में हमारा कार्यालय बन रहा हैं ,हम उसकी एक दीवार पर उन सब कार्यकर्ताओं के नाम लिखेंगे जिन्होंने कांग्रेस के लिए कुर्बानी दी . ये सम्मान उनको हमारी तरफ से हैं जिन्होंने आज़ादी से पहले और बाद में कांग्रेस की विचारधारा के लिए बलिदान दिया .

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उनका इस तरह से कह देना भविष्य की कांग्रेस से एक तरह से साक्षात्कार कराने जैसा था . जिसमे कार्यकर्ता को महत्व देने की ,उनकी मंशा साफ़ दिखाई दे रही थी . इसमें छुपा एक सन्देश भी “ कांग्रेस से जुड़ना मतलब सीधे राहुल गाँधी से जुड़ना ,बिना किसी को बीच में लाये . बिना किसी का जूता उठाये .

कार्यकर्ताओं में जोश था जो वहां मौजूद हर नेता देख रहा था .

राहुल गाँधी सबसे विपरीत स्थतियो में कांग्रेस का नेत्रत्व कर रहे हैं . एक सज्जनता का परिचय देते हुए उस झूठ का मुकाबला कर रहे हैं . जो धन वैभव और सत्ता के साथ साथ मीडिया की शक्ति केसाथ देश को अपने मकड जाल में ले चूका हैं .

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