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असाम में गिर सकती हैं भाजपा की सरकार ,एक और सहयोगी पार्टी ने छोड़ा साथ

उप चुनाव के बाद भाजपा में मोदी के चमकते जादू की चमक का रहस्य खुल गया हैं . आने वाला समय भाजपा के लिए अब ठीक नहीं लग रहा . कर्नाटक में असफल होने के बाद भाजपा की असाम में सरकार खतरे में आने वाली हैं 

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उप चुनाव के बाद भाजपा में मोदी के चमकते जादू की चमक का रहस्य खुल गया हैं . आने वाला समय भाजपा के लिए अब ठीक नहीं लग रहा . कर्नाटक में असफल होने के बाद भाजपा की असाम में सरकार खतरे में आने वाली हैं

केंद्र के विवादित नागरिकता संशोधन विधेयक 2016 का भाजपा की सहयोगी पार्टी असम गण परिषद ने कड़ा विरोध किया है. यहां तक कि असम की एनडीए सरकार में शामिल अपने मंत्रियों से भी उसने कैबिनेट की बैठक में विधेयक का विरोध करने का निर्देश दिया है.
असम गण परिषद की बैठक में इस आशय का फैसला किया गया। पार्टी का निर्णय है कि इस मामले में वह भाजपा के दबाव में नहीं आएगी .

.एनडीए की एक और सहयोगी दल असम गण परिषद भी अपने अलग स्टेंड पर अड़ गया हैं . मामला इतना गंभीर हो गया है कि मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल की अगुवाई वाली एनडीए सरकार भी खतरे में पड़ गई है.

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असम गण परिषद के अध्यक्ष और कृषि मंत्री अतुल बोरा पहले ही कह चुके हैं कि उनके लिए असम का हित सबसे ऊपर है और उन्हें गठबंधन से बाहर होने में एक सेकंड नहीं लगेगा. परिषद इस विधेयक को असम समझौते का भी उल्लंघन मानती है.

इस विधेयक के विरोध में गुवाहाटी में हुई सामूहिक भूख हड़ताल में हजारों लोगों के साथ-साथ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन, कांग्रेस और करीब 28 अन्य संगठनों के साथ-साथ असम गण परिषद के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया था .

इस विधेयक में धार्मिक अत्याचार के कारण बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आने वाले गैर मुसलमानों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.  भाजपा सरकार इस विधेयक के बहाने बांग्लादेश से आने वाले लोगो  को असम में बसाना चाहती है.

नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर असम के स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है. लोगों का भय है कि इसके बाद कई स्वदेशी जनजातियां अल्पसंख्यक हो जाएंगी.

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इस विधेयक के विरोध में बीते एक महीने में राज्य भर में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं.

मई 2016 में असम गण परिषद ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने का फैसला किया था और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था. असम की भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में असम गण परिषद के तीन कैबिनेट मंत्री हैं.

मौजूदा 126 सदस्यों की असम विधानसभा में भाजपा के 61, असम गण परिषद के 14 तथा भाजपा की एक और सहयोगी पार्टी बोडो पीपुल्स फ्रंट के 12 विधायक हैं। कांग्रेस के 25 और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के 13 विधायक हैं. एक विधायक निर्दलीय है.

असम गण परिषद और बोडो पीपुल्स फ्रंट अगर इस विधेयक का विरोध करेंगे तो विधेयक पारित नहीं हो पायेगा . विधेयक को ले कर अगर  ये दोनों अगर सरकार से बाहर आ जाते हैं तो भाजपा की सरकार गिर भी सकती है.

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