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राहुल गाँधी अपनी रणनीति से ढेर करेंगे, भाजपा के शाह और मोदी का प्लान

भाजपा बहुत बुरी तरह बिलबिलाई हुई हैं राहुल गांधी अब अमित शाह से दस कदम आगे सोच रहे हैं . उन्होंने जो भाषण दिया था जन आक्रोश की रैली वाले दिन उस से पीछे हटना उन्हें मंज़ूर नहीं .

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भाजपा बहुत बुरी तरह बिलबिलाई हुई हैं राहुल गांधी अब अमित शाह से दस कदम आगे सोच रहे हैं . उन्होंने जो भाषण दिया था जन आक्रोश की रैली वाले दिन उस से पीछे हटना उन्हें मंज़ूर नहीं .

ये एक लोकतंत्र के लिए स्वस्थ परम्परा राहुल गांधी डाल रहे हैं . जितना में अपने महानायक नेता राहुल गाँधी को जानता हूँ उसके मुताबिक़ उन्होंने कर्नाटक चुनाव के मद्देनज़र अपनी रणनीति बना ली हैं और उस पर सिर्फ वो अपने विश्वसनीय अशोक गहलौत के साथ सांझा करते हैं . उनकी हाँ या न के बाद आगे कदम बढ़ाते हैं .

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नयी सूचनाओं के अनुसार वो भाजपा से पीछे कही नहीं दिखना चाह रहे हैं . इसी लिए हंग असेम्बली को ले कर कुछ विश्वासपात्रो के साथ आज उनका सन्देश कर्नाटक पंहुचा ,उसके बाद सिद्धारमैया ने उनकी मर्जी के अनुसार ब्यान दिया . राहुल गांधी सियासत के हर एंगल से सोच रहे हैं .

सिद्धारमैया ने गठबंधन की  इस अवस्था में मल्लिकार्जुन खड्गे को सी एम् बनाने की बात की ,साथ ही इन चुनावो के बाद सियासत से संन्यास लेने की बात की

भाजपा ने आंतरिक सूत्रों की खबर हैं जे डी एस को फंडिंग भी दी,साथ ही अपना कमजोर प्रत्याशी खड़ा किया . पर हुआ कुछ ऐसा जिसकी आशा शायद भाजपा और देवगौड़ा को भी नहीं थी . सिद्धारमैया और कांग्रेस के विरोधी मतदाता का वोट भाजपा और जे डी एस के बीच बंट गया .

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देवगौड़ा परिवार ने कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों से अपनी बातचीत आंतरिक रूप से कर ली हैं . ऐसा मैंने चुनाव के मतदान से पहले एक लेख में लिख दिया था .

यहाँ बता दें की भाजपा ने न बल्कि जे डी एस को फंडिंग की थी ,अपितु अंदरखाने भाजपा ने उसको साधा था . पर जे डी एस का अपना अलग स्टेंड रहा हैं . वो कोई अवसर खोना नहीं चाहती . वो ये भी जानते हैं की भाजपा केन्द्रीय मुद्दों पर फेल होने के बाद उसकी कर्णाटक में उम्मीद कम हैं .

राहुल कांग्रेस गोवा जैसी गलती दोहराना नहीं चाहती ,इसी लिए आश्वस्त होते हुए भी राहुल गांधी दुसरे और तीसरे ऑप्शन पर अभी से विचार कर रहे हैं . यहाँ साफ़ कर दूँ राहुल गांधी खरीदने और सियासत में व्यापार के कट्टर विरोधी हैं .

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