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सिद्दारमैया के अतिआत्मविशवास से हारे ,राहुल गाँधी ने किया सर्वश्रेष्ठ : डी शिव कुमार

कभी कभी अति आत्मविश्वास घटनाक्रमों और आने वाली चुनौतियों का अनुमान लगाने में सबसे बड़ा वाधक होता हैं . ऐसा ही कुछ कर्णाटक चुनाव में हुआ .

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कभी कभी अति आत्मविश्वास घटनाक्रमों और आने वाली चुनौतियों का अनुमान लगाने में सबसे बड़ा वाधक होता हैं . ऐसा ही कुछ कर्णाटक चुनाव में हुआ . वीरप्पा मोइली ने भी दोहराया अधिकतर नेता जे डी एस को साथ ले कर चलने के हक मेंठे . परन्तु सिद्धारमैया की वज़ह से कांग्रेस में निर्णय नही हो सका था . कर्नाटक के लिए वहां के स्थानीय तौर से सियासती फैसले लेने के लिए सिद्धारमैया को पूरी छूट दी गयी थी .

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इस बात को अब कर्नाटक के कांग्रेस नेता भी मान रहे हैं . कर्नाटक के ऊर्जा मंत्री डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पर अति आत्मविश्वास का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि उन्हें दो विधानसभा सीटों से चुनाव नहीं लड़ने की सलाह दी गई थी, लेकिन वे नहीं माने. उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के मामले में कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दस फीसदी भी नहीं किया था . भाजपा ने कांग्रेस से सौ गुना प्रचार में खर्च किया था .

यह पूछे जाने पर कि क्या सिद्धारमैया अति आत्मविश्वास से भरे थे, उन्होंने कहा, “बिल्कुल..यह सिद्दारमैया का आत्मविश्वास ही था जिसने हमें इस स्तर पर ला (गिरा) दिया.” सिद्धारमैया को बादामी सीट से जीत हासिल हुई है, जबकि चामुंडेश्वरी से उन्हें हार मिली है. शिवकुमार ने किसी मोदी लहर को भी नकारते हुए कहा, “उन्हें हमारी कमियों का फायदा मिला.

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डी शिवकुमार ने कहा, “कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पिछले तीन महीनों में यहां आकर और राज्य में चुनाव प्रचार कर अपना सर्वश्रेष्ठ दिया, लेकिन यह स्थानीय नेताओं के लिए अच्छा संकेत नहीं है कि वे अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों का रुझान नहीं समझ सके .

उन्होंने कहा कि दो जगह से चुनाव नहीं लड़ने की सलाह मिलने के बावजूद सिद्धारमैया ने बादामी और चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा. उन्हें लगता था कि वे दोनों विधानसभाओं को अच्छी तरह जानते हैं. कांग्रेस नेता ने जोर देकर कहा, “यह निर्णय उन्होंने लिया था क्योंकि वे विधानसभाओं को बेहतर समझते थे. हम अति आत्मविश्वास में थे; अंदरूनी रूप से हमने उन्हें सिर्फ एक विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की सलाह दी थी.

इतने पर भी ये मान लेना की कोई एंटी इन्कोम्बेसी फेक्टर नहीं था ,बिलकुल गलत होगा . लिंगायतो के बारे में फैसला लेने के कारन देवगौड़ा को वोक्कालिंगा का पूरा साथ मिला . फिर भी कांग्रेस ने 78 सीट पा कर अपना सर्वश्रेष्ठ दिया हैं . लोकसभा के हिसाब से मत् प्रतिशत लगाया जाए तब एक तरह से आने वाले लोकसभा चुनावों में होने वाले परिवर्तन का ईशारा छुपा हैं .

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