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सारे राहुल गाँधी समर्थक,कहे अकेले लड़ेंगे ,देश और अपने नेता पर अविश्वास मंजूर नहीं

देश की एकता और लोकतंत्र लगता हैं सत्ता के किसी अस्पताल में दम तोड़ रहा हैं . जिस आज़ादी के लिए लोगो ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया . 

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देश की एकता और लोकतंत्र लगता हैं सत्ता के किसी अस्पताल में दम तोड़ रहा हैं . जिस आज़ादी के लिए लोगो ने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया .

वो सब कुछ नष्ट होने के दौर में हैं . एक ऐसी पार्टी जिसने देश को आज़ादी दिलाई हो वो आज क्षेत्रीय दलों के सामने घुटने टेक कर खड़ा हुआ हैं .ज़रूर कुछ संविधान में कमी रह गयी .

सोनिया गाँधी की डिनर पोलिटिक्स से घबराई भाजपा और मोदी मीडिया

जिसका लाभ फिरंगियों की सेना ने भरपूर उठाना सीख लिया हैं . देश की राजनीति एक उद्दंत सिद्धांत का रूप ले रही हैं . जिसमे सबका योगदान स्पष्ट नज़र आ रहा हैं .

एक बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की नेता और महागठबंधन की चेयर पर्सन सोनिया गांधी जिन्होंने पहल की एक महागठबंधन की उसमे क्षेत्रीय पार्टियों के राष्ट्रीय नेताओं का न आना भाजपा के आतंक की कहानी खुद कह रहा हैं .

स्वार्थी नेताओं को साथ ले कर चलना कांग्रेस के लिए आत्मघाती साबित होगा . ये बात अपने पूर्व अनुभव से शायद सोनिया गांधी नहीं सीख पाई हैं .

राहुल गांधी का शंखनाद,क्या होगी कांग्रेस के महाधिवेशन में एक और गांधी की एंट्री ?

कांग्रेस के संगठन को मज़बूत करने की अपेक्षा उनको जोड़ तोड़ पर यकीन ऐसे राजनैतिक दलों पर हैं . जिनका जनाधार केवल जातियों के गठजोड़ पर आधारित हैं . जिसको अमित शाह की राजनैतिक केलकुलेशन  एक अपनी  पैसे और सत्ता से भरी फूंक से  उडा  देगी .

कांग्रेस की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के डिनर में सहयोगी दलों के मुख्य नेताओं का न आना पूरे देश में गलत तरीके से प्रचारित किया जाएगा . जिसका नुक्सान कांग्रेस का होगा कार्यकर्ताओं का …

काश इतना ही ध्यान कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भी दे दिया जाता ….?

गाँधी मेजिक कम देश में अब कम इसी लिए हो गया हैं क्युकी जंग लगे सेनापति और दरबारी अपनी आपसी लड़ाइयो में लगे हैं .

कुछ नेता कांग्रेस के लिए रोग जैसे हैं ,जिनको प्रयोग गलत जगह किया जाता हैं जैसे पूर्वोत्तर के राज्य …

के कथित प्रभारी

कुछ अच्छे हैं जिन्हें संगठन के बारे में समझ हैं वो नर्मदा माँ की यात्रा करने निकल जाते हैं .

कार्यकर्त्ता का मनोबल टूटने लगता हैं . जो राहुल गांधी में देश के भविष्य की उम्मीद रखता हैं .

हम जैसे कार्यकर्त्ता तो यही कहेंगे ..

माँ तेरा बिटवा ज़वान हो गया ..

अब अपने हिसाब से काम करने दो …

…या राहुल जी से इस्तीफ़ा करा दो और जो आपको पसंद हो उसे कांग्रेस का अध्यक्ष बना दो . आपका देश की राजनीति में डिनर पोलिटिक्स कांग्रेसी युवाओं को रास नहीं आता हैं .

न मेरे नेता के व्यक्तित्व से मेल खाता हैं .

जो विंदास हैं ..

दागी सांसदों का बिल फाड़ देता हैं ..

हम लड़ेंगे जोरदार लड़ेंगे ,पैर होते हुए कोई बैसाखी हमको मंज़ूर नहीं .

अगर हिन्दू होने के नाते अंत समय में राम राम कह कर मरना पसंद करूँगा तब कांग्रेस के लिए ,कांग्रेसी होने के कारण राहुल राहुल कह कर जान देना पसंद करूँगा !

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