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2019 लोकसभा चुनाव : क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी होंगे भारत के नेक्स्ट पी एम् ,

राहुल गाँधी आज से कांग्रेस के अधिवेशन में रहेंगे . 12000 कांग्रेस के पी सी सी मेंबर भी इसमें शामिल होंगे .अधिवेशन इस लिए भी महत्व पूर्ण हैं क्युकी इस बार अधिवेशन में संगठन को ले कर राहुल गाँधी गंभीर हैं .

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राहुल गाँधी आज से कांग्रेस के अधिवेशन में रहेंगे . 12000 कांग्रेस के पी सी सी मेंबर भी इसमें शामिल होंगे .अधिवेशन इस लिए भी महत्व पूर्ण हैं क्युकी इस बार अधिवेशन में संगठन को ले कर राहुल गाँधी गंभीर हैं .

उनके सामने आने वाली कई चुनौतियाँ होंगी . उनका कल सुबह दस बजे होने वाला भविष्य की कांग्रेस का एक ट्रेलर होगा जो देश को और आने वाली युवा पीडी को नये भारत का सपना और भविष्य का खांका दे कर जाएगा .

भाजपा के सत्ता रूढ़ होते ही देश के सामने उतनी समस्याए आया खडी हुई जितनी पहले कभी देखी नहीं गयी . इस समस्याओं के शोर में पी एम् मोदी द्वारा किये गए विकास के वायदे और युवाओं के रोजगार का मुद्दा कही  खो सा गया .

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हालांकी और नेताओं के मुकाबले राहुल गाँधी ने  सवाल उठाये और मुखर हो कर उठाये . भले ही और नेताओं ने इस बारे में देर से बोलना शुरू किया . सभी नेताओं को सूबिधा की राजनीति रास आती हैं . चाहे वो पक्ष में हो या विपक्ष में ….

शिव सेना के सामना में एक लेख छपा जिसमे कहा गया राहुल गाँधी के सामने चुनौती खुद प्रधान मंत्री की मह्तवाकंक्षा पाले कुछ नेता हैं . जिसमे उन्होंने बंगाल की ममता बनर्जी ,शरद पवार और मायावती का नाम मुख्य रूप से इसका जिक्र किया था .

निस्संदेह इसमें किसी और राजनैतिक भविष्यवक्ताओं की राय एक मत होगी . ये वास्तव में एक यक्ष प्रश्न भी हैं और यथार्थ भी .पुत्र अखिलेश यादव के लिए भी अपने पिता का सपना पूरा करने की ललक होगी ..

ये व्यक्तिगत सपना  ज़रूर महागठबंधन की  गाँठ में सूत के धागों जैसा काम करेंगी .

कांग्रेस के संगठन को इन्ही गठबन्धनो ने कमजोर किया हैं . ये एक कटु सत्य हैं .सबसे बड़ा राष्ट्रीय दल होने के नाते कांग्रेस को क्षेत्रीय दलों के सामने अपने घुटने नहीं टेकने चाहिए . इससे कान्रेस का संगठन क्षेत्रीय आधार पर कमजोर होता हैं .

कुछ इसके उदाहरण हैं …

सबसे पहले उत्तर प्रदेश जैसे सियासी महत्व वाले सूबे में कांग्रेस ने मायाबती के साथ गठबंधन कर जैसे एक दलित नेता को जन्म देने में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई थी . उसके बाद बहिन मायावती का राजनैतिक ग्राफ शानदार ढंग से ऊंचा होता चला गया . कभी समाजवादी हुआ कभी भाजपा के रंग में रंग मायावती का हाथी सत्ता तक पहुच गया था . इसके कांग्रेस पर बुरे साइड इफेक्ट हुए .कांग्रेस का कट्टर समर्थक ब्राहमण मतदाता कांग्रेस से विरक्त हो कभी भजपा में तब कभी बसपा में तो कभी समाजवादी दर्शन में अपनी पहचान ढूंढता रहा . फिर उसने भगवा की राह  पकड़ ली .

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के गिने चुने नेता आज भी हैं लेकिन कांग्रेस उन्ही तक सिमट कर रह गयी . संगठन का अंग भंग हो चूका  हैं .

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बहिन मायावती कांग्रेस को कोसती रही . बाबा साहब अबेडकर को पंडित जवाहर लाल नेहरु सरीखे आधुनिक सोच वाले नेता ने संविधान समिति सौंपी थी जिसके कारण आज दलित युवाओं को एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व मिला . जिसका जिक्र दलित बड़े गर्व से करते हैं . उल्टा आरोप कांग्रेस पर बाबा साहब अम्बेडकर के साथ भेद भाव के लगाए जाते हैं .

आधुनिक राजनीति में सत्ता के लिए ऐतिहासिक सत्यो को झूठ साबित करने की एक बुरी परंपरा को जन्म कांग्रेस विरोधी राजनैतिक दलों ने दिया हैं . आज मोदी काल में  जिन सारे दलों के अपने समाप्त होने का खतरा हो गया हैं . जो महागठबंधन की वकालत कर रहे हैं .आज भी वो दल कांग्रेस के साथ संवैधानिक सहमती नहीं रखते . एक महागठबंधन का परिणाम हम बिहार में देख चुके हैं . जिसके भागीदार कब मोदी जी की गोद में बैठ गए पता ही नहीं चला .

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महाराष्ट्र में एन सी पी भी एक ऐसी ही पार्टी रही .जिसके सुप्रीमो ने अपनी ताकत महाराष्ट्र के अलावा और भी कई राज्यों में बनाई लेकिन आज वो समाप्ति की और हैं . कांग्रेस का साथ मिलते ही क्षेत्रीय दलों को संजीवनी तो मिलेगी ही ,साथ ही सत्ता को तय करने में इनकी भूमिका बड़ी हो जायेगी . चुनाव के वाद कब इन दलों की आस्थाए भाजपा के मोदी के नाम पर न सही किसी और नाम पर एक मत हो कांग्रेस का साथ छोड़ जाए .

सोनिया गांधी जब सक्रीय राजनीती में आयी तब कांग्रेस का संगठन हिंदी भाषी क्षेत्रो में नरसिम्हा राव के रहते कमजोर हो गया था . इन परिस्थतियो में सोनिया गांधी ने गठबंधन की राजनीति को चुना था .सत्ता में आने के बाद भी संगठन को मज़बूत न करना .कांग्रेस शीर्ष नेत्रत्व की कमजोरी रही हैं .

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राहुल गाँधी को गठबंधन में अपने साथियो का चुनाव करते समय सावधानी और सतर्कता प्रयोग करनी होगी . इस अधिवेशन से पहले राहुल गांधी उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में संगठन को खड़ा करने के बारे में कहा गया हैं . साथ में कहा गया हैं की ये रातो रात नहीं होगा . सही भी हैं रातो रात नहीं होगा लेकिन रातो रात इसके लिए प्रयास तो किये जा सकते हैं .

आज सोशल मीडिया के ज़माने में अगर कोई वीडियो और लेख वायरल हो सकता हैं तब एक वायरल संगठन क्यूँ खड़ा नहीं हो सकता ?

 

 

2019 लोकसभा चुनाव : क्या कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी होंगे भारत के नेक्स्ट पी एम् ,
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