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राहुल गाँधी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का दांव कर देगा भाजपा को चित

राहुल गाँधी की कर्नाटक में हो रही जनसभाओ में भारी जनसैलाब ने भाजपा के दिल की धडकनों को बढ़ा  दिया हैं . इस चुनाव में भाजपा में जहाँ गुटवाजी के कारण उसके ही विधायक भाजपा को छोड़ कांग्रेस में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार बैठे हैं

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राहुल गाँधी की कर्नाटक में हो रही जनसभाओ में भारी जनसैलाब ने भाजपा के दिल की धडकनों को बढ़ा  दिया हैं . इस चुनाव में भाजपा में जहाँ गुटवाजी के कारण उसके ही विधायक भाजपा को छोड़ कांग्रेस में अपनी किस्मत आजमाने के लिए तैयार बैठे हैं

.राहुल गाँधी का प्लान ए अपनी फुल स्पीड पर काम कर रहा हैं . राहुल गाँधी भाजपा के लिए कोई भी स्पेस देने को तैयार नहीं हैं .

राहुल गाँधी ने आंध्र प्रदेश की सीमा से सटे के उत्‍तरी जिलों से उन्‍होंने अपनी जन आशीर्वाद यात्रा शुरू की. ये कर्नाटक के उत्‍तरी जिलों को कांग्रेस का गढ़ माना जाता है. यहाँ पिछली बार  40 में से 23 सीटों पर कांग्रेस को सफलता  हासिल हुई थी. 2004 में सोनिया गांधी ने बेल्‍लारी से ही लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था. बेल्लारी में राहुल गाँधी ने पारिवारिक रिश्ता जोड़ यहाँ के लोगो का दिल जीत लिया हैं .

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लिगायत  समुदाय की इस राज्‍य की आबादी में 18 प्रतिशत हिस्‍सेदारी है. इनको विशुद्ध  रूप से बीजेपी का वोटर माना जाता है. बीजेपी के मुख्‍यमंत्री पद का चेहरा बीएस येद्दयुरप्‍पा इसी समुदाय से ताल्‍लुक रखते हैं. 10 साल पहले जब दक्षिण भारत के पहले राज्‍य के रूप में कर्नाटक में ‘कमल’ खिला था, तो उस वक्‍त इस समुदाय के बूते बीजेपी सत्‍ता के रथ पर सवार हुई थी. तब से यह समुदाय बीजेपी का वोटबैंक रहा है. राजनीतिक विश्‍लेषकों के मुताबिक इसी समुदाय में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए राहुल गाँधी भरसक प्रयास कर रहे हैं . 12वीं सदी के दार्शनिक बासवा ने इस संप्रदाय की स्‍थापना की थी.

राहुल गाँधी को सुनने और देखने के लिए विशाल जन समूहों के रूप में आ रहे जत्थे पूरे देश में चर्चा का विषय बन गये हैं .

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गुजरात चुनाव की तर्ज पर राहुल गांधी ने सबसे पहले कोप्‍पल जिले में प्रसिद्ध हुलिगम्‍मा मंदिर में दर्शन किए. उसके बाद उनका काफिला गवी सिद्धेश्‍वर मठ के लिए रूका. था .

 

 

यह मठ बहुसंख्यक लिंगायत समुदाय का है. इसके अलावा अपनी यात्रा के दौरान बसावा कल्‍याण स्थित अनुभवा मंटपा जाएंगे. बसावा कल्‍याण को 12वीं सदी के समाज सुधारक बासवाना के कारण जाना जाता है. ये मंदिर लिंगायत समुदाय की धार्मिक आस्‍थाओं से जुड़े हैं.

कांग्रेस अबकी बार इस समुदाय को अपने पाले में लाने की कोशिशों में लगी है. लिंगायत समुदाय में से एक समूह हिंदू धर्म से अलग नई धार्मिक पहचान की मांग कर रहा है. माना जाता है कि बीजेपी ने इस पर अपनी यदि सधी प्रतिक्रिया दी है तो वहीं कांग्रेस के बारे में माना जा रहा है कि इसने इस मांग को अपनी स्वीकृति दे  दी है. यही वजह है कि कांग्रेस ने लिंगायत समुदाय को अपने पाले में लाने के लिए उनको राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा देने और तमाम सुविधाओं की मांग उछाल दी है.जिसकी मांग  खुद लिंगायत समुदाय के तमाम महत्वपूर्ण संगठन कर रहे हैं.

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पिछड़ी जाति से आते हैं. कर्नाटक में कांग्रेस की जीत का फॉर्मूला पिछड़ी जाति, दलित और अल्पसंख्यक  के गठजोड़ पर टिकी हुई है. लेकिन कर्नाटक की सियासत में प्रभावशाली वोक्‍कालिका और लिंगायत समुदाय ही चुनावों में जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.   वोक्‍कालिका समुदाय को परंपरागत रूप से पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा की पार्टी जेडीएस का समर्थक माना जाता है.

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