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भाजपा में बागी होते नेता ,उमा भारती का भी मोदी और शाह से मोह भंग

भाजपा में भाजपा के कई पुराने नेता मोदी और शाह की शैली के साथ ताल मेल नहीं बिठा पा रहे हैं . अब दबे छुपे ढंग से नेता अपनी नाराजगी भी जाहिर करने लगे हैं . इसी कढी में एक नाम और जुड़ गया हैं .

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भाजपा में भाजपा के कई पुराने नेता मोदी और शाह की शैली के साथ ताल मेल नहीं बिठा पा रहे हैं . अब दबे छुपे ढंग से नेता अपनी नाराजगी भी जाहिर करने लगे हैं . इसी कढी में एक नाम और जुड़ गया हैं .

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता वर्तमान भाजपा सांसद और केन्द्रीय मंत्री उमा भारती ने ऐलान किया है कि वह भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ेंगी. हालांकि वह पार्टी के हितों के लिए काम करती रहेंगी.

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उमा भारती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला अपने खराब स्वास्थ्य के चलते लिया है. आंतरिक सूत्रों की माने तो  वो पार्टी में की जा रही  अपनी उपेक्षा से नाराज हैं. सूत्रों का दावा है कि उनकी नाराजगी पीएम नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह यहां तक कि आरएसएस चीफ मोहन भागवत के खिलाफ  भी है. इसलिए उन्होंने फिलहाल उचित समय का इंतजार करने का फैसला किया है.

कभी मोदी जी के बारे में बोल कर चर्चा में रहने वाली उमा भारती आज शाह और मोदी जी की जोड़ी ने किनारे पर लगा दिया हैं . यह पहली बार है जब वो केंद्रीय मंत्री रहते हुए इतना समय गुजार रहीं हैं.

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इससे पहले केंद्रीय मंत्रालय उनके पास 6 माह से ज्यादा नहीं रहा हैं . इस बार गंगा नदी और उसकी सफाई से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में उनका काफी अपमान हुआ,गौरतलब हैं गंगा के नाम से शुरू की गयी नमामी गंगे परियोजना से जुडी फाइल फंडो के अभाव में धुल से अटी हुई हैं .

गंगा की सफाई के नाम पर बस घोषणा और सिर्फ घोषणा होती रही .जबकी लोकसभा 2014 के चुनावों से पहले प्रदूषित गंगा को ले कर आमरण अनशन कर आन्दोलन करने वाली उमा भारती घोर उपेक्षा का शिकार हुई हैं . सूत्रों का कहना है कि वो पीएम नरेंद्र मोदी व अमित शाह से दुखी हैं परंतु इस बार उन्होंने रणनीति बदली है .

उन्होंने पहले की तरह कोई धमाकेदार घोषणा नहीं की .  बल्कि आडवाणी जी के कहने पर वक्त का इंतजार करना उचित समझा . दो धडो में बंट चुकी भाजपा में एक और नेता दुसरे धड़े में चला गया हैं .

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ये पहली बार नहीं हैं जब उमा भारती की उपेक्षा की गयी हो अक्सर उनको कई बार भाजपा में रहते अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा हैं . उमा भारती ने राममंदिर आंदोलन के समय सक्रिय भूमिका निभाई थी.

उमा ने पार्टी के लिए काफी काम किए परंतु वो पार्टी से कभी संतुष्ट नहीं रहीं . एक वक्त ऐसा था जब उनसे उनकी पहचान ‘राम मुद्दा’ भी छीन लिया गया. मप्र में उन्होंने भाजपा की सरकार बनाई परंतु उन्हे सीएम पद से हटा दिया गया.

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