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विश्व के ठंडे देशों में लाशें बिछ जाती आखिर मीडिया डरता क्यों हैं : हार्दिक पटेल

हार्दिक पटेल के एक ट्विट ने जैसे सोशल मीडिया की खुमारी को अपनी गर्मी का अहसास करा दिया था . सवाल वाजिब भी था और समसामयिक भी .....

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हार्दिक पटेल के एक ट्विट ने जैसे सोशल मीडिया की खुमारी को अपनी गर्मी का अहसास करा दिया था . सवाल वाजिब भी था और सम सामयिक भी …..

मीडिया की भूमिका मोदी सरकार के दौर में हमेशा मुद्दों से अलग हट कर बहस करने की रही हैं . मीडिया ने अभी तक देश के हालातों की सही स्थिति देश के सामने रखी ही नहीं हैं .

राहुल गाँधी से ले कर देश के युवा नेता सिर्फ रोज़गार की और बढ़ती बेरोजगारी की बात कर रहे हैं . ऐसी दलीले दी जाती हैं की नकारात्मक बहस चलाने से देश अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बदनाम होता हैं . ये कौन सा लोजिक हैं की कमजोरियों और कमियों की बात न की जाए तब किसीकी की जाए .

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हार्दिक पटेल ने लिखा :-हमारा ‘मीडिया’ कहता है कि ठंड से मौतें यहां हुई वहां हुई किन्तु ये नहीं बताया जाता की मौत ठंड से नहीं गरीबी और लाचारी से हो रही है।सोचो अगर ठंड से ही मौत होती तो विश्व के ठंडे देशों में लाशें बिछ जाती।आखिर ‘मीडिया’ सच दिखाने से डरता क्यों है ?

सही भी था और सच लिखा था हार्दिक पटेल ने की मौत गरीबी और लाचारी से ठंड में और गर्मियों में ही होती हैं . बड़े आलीशान घरो में रहने वालो को कभी गर्मी में लू से बीमार या मरते नहीं देखा . मौत का शिकार कोई खुले में रहने वाला रोजगार की तलाश में कोई मेहनत कश  होता हैं .

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कम्बल बांटने की राजनीती इन्ही दिनों में शुरू होती हैं . कम्बल हर साल टीवी मीडिया के कैमरों के आगे बांटते पूर्व में कई नेताओं को हम देख चुके हैं .

मोदी सरकार की संवेदनाओं का बहुत अधिक प्रभाव अब योगी आदित्य नाथ पर दिखाई देने लगा हैं . हार्दिक पटेल की कही बात को इससे जोड़ कर देखा जा सकता हैं .

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के ही गोरखपुर के अस्पताल में ६० बच्चो की मौत आक्सीजन न मिल पाने की वज़ह से हुई थी . उस गोरखपुर में एक महोत्सव का आयोजन योगी जी कर रहे हैं .

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शानो शौकत के साथ जैसे कोई बच्चो की मौत का ज़श्न मना  रहा हो . काश इतना खर्चा योगी जी ने महोत्सव के बदले प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने का निर्णय लिया होता . उन गरीबो का भी कुछ भला हो जाता जो इस ठंड में अपना इलाज़ कराने सरकारी अस्पतालों में आते हैं .

प्रदेश में स्वास्थ्य सम्बन्धी सेवाओं का हाल बुरा हैं . एक बैरागी जो हर मोह से दूर होता हैं . महोत्सव मनवा रहा हैं .

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