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अब केन्द्रीय मंत्री रामदास अठावले जिग्नेश के समर्थन में ,भाजपा को बड़ा झटका

भीमा कोरे गांव हिंसा मामले में किसी तरह विवाद की आग को बुझाने की कोशिश में जुटी भाजपा सरकार  को उसकी सहयोगी पार्टी आर.पी.आई ने करारा सियासी झटका दिया है.

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भीमा कोरे गांव हिंसा मामले में किसी तरह विवाद की आग को बुझाने की कोशिश में जुटी भाजपा सरकार  को उसकी सहयोगी पार्टी आर.पी.आई ने करारा सियासी झटका दिया है.

आर.पी.आई के नेता  और मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने दलित नेता और गुजरात के विधायक जिग्नेश मेवाणी को क्लीन चिट दे दी है. जबकि महाराष्ट्र सरकार हिंसा के लिए जिग्नेश के भड़काऊ भाषण को न केवल जिम्मेदार ठहरा रही है, बल्कि उनके विरुद्ध एफ.आई.आर भी दर्ज की गयी हैं .

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महाराष्ट्र में हुए  इस जातीय संघर्ष में बुरी तरह उलझी भाजपा को केन्द्रीय मंत्री अठावले से बहुत आशाये थी . भारतीय जनता पार्टी ने रामदास अठावले को एक दलित नेता के रूप में आगे किया था . उनके  माध्यम से ही राज्य में दलित संगठनों की ओर से हो रहे आंदोलन की आग को बुझाने की रणनीति बना रही थी .

अंदरूनी भाजपा के सूत्रो की माने तब रामदास अठावले   शुरू में इस मोर्चे पर भाजपा की सहायता  करने के इच्छुक थे, मगर हिंसा के विरोध मे दलित संगठनों द्वारा कई दशक बाद बुलाए गए महाराष्ट्र बंद को मिली जबर्दस्त सफलता  के बाद अठावले ने तत्काल मेवाणी के पक्ष में  अपनी तरफ से क्लीन चिट दे दी.

रामदास अठावले को अच्छी तरह पता हैं अगर विरोध में गये तब वो अलग थलग पड़ जायेंगे  इस हिंसा के बाद महाराष्ट्र के अन्दर सैकड़ों दलित संगठन एकजुट हो गए हैं .

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महाराष्ट्र में  में प्रकाश अंबेडकर और अठावले दलित राजनीति का एक पुराना चेहरा हैं. ऐसे में अठावले एकजुट दलित संगठनों के बीच खुद को अलग-थलग नहीं करना चाहते थे.

यही कारण है कि अठावले ने न सिर्फ मेवाणी को क्लीन चिट दी, साथ में उन्होंने स्पष्ट किया और अपनी ही सरकार के इरादों पर लगभग पानी फेर दिया . अठावले ने कहा कि वहां जिग्नेश मेवाणी के भाषण से पहले से ही  तनाव की स्थिति थी. कई गांवों के लोगों ने वहां पहले ही रैलियां निकाली थी. ऐसे में जिग्नेश मेवाणी को हिंसा भड़काने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.

भाजपा ने अब तक कोरे गाँव हिंसा पर उन दोषियों के विरुद्ध कोई भी कार्यवाही नहीं की हैं . जिस के कारन दलितों में आक्रोश हैं . उल्टा जिग्नेश मेवाणी पर हिंसा फैलाने का आरोप लगा एक तरफ़ा कार्यवाही कर दलितों के आक्रोश में घी डालने का काम किया हैं.

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