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सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों ने चीफ जस्टिस पर उठाये कुछ सवाल ,ये हैं पांच मुद्दे ख़ास

आज एक ऐतहासिक दिन बन गया जब सुप्रीम कोर्ट  के पांच न्‍यायाधीश जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मीडिया के बीच अपनी बात कही

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आज एक ऐतहासिक दिन बन गया जब सुप्रीम कोर्ट  के पांच न्‍यायाधीश जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में मीडिया के बीच अपनी बात कही .

उन्‍होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासन ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। हमने चीफ जस्टिस से इस बारे में मुलाकात भी की और चीफ जस्टिस से कई गड़बडि़यों की शिकायत की थी, जिन्‍हें ठीक किए जाने की जरूरत है.

पूरा देश इन पांच जजों के इस कदम से अवाक हैं . चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर उन्होंने जो पांच आपत्तिया रखी वो निम्न प्रकार से हैं .

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ये हैं वो ख़ास पांच शिकायते और मुद्दे

१ .चारों न्यायधीशो का कहना था ऐसे मामले और मुक़दमे भी सामने आये  ,जिनका व्यापक असर हो सकता हैं और उनके दूरगामी नतीजे हो सकते हैं, इन मामलों में चीफ जस्टिस ने मनमाने तरीके से बेंचों का चुनाव किया, जिससे कामकाज की शैली प्रभावित होती है. जजों का कहना है कि ऐसी कार्यशैली को हर कीमत पर रोका जाना चाहिए .

२ . मेडिकल कॉलेज एडमिशन घोटाले की जांच का मामला चीफ जस्टिस ने कोर्ट नबंर 7 को भेज दिया, जबकि जस्टिस चेलामेश्वर की अगुवाई वाली बेंच ने यह मामला 5 जजों की उस बेंच को भेजा था . जिसमें जस्टिस चेलामेश्वर के अलावा चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस गोगोई, जस्टिस लोकुर और जस्टिस जोसेफ भी शामिल थे . मेडिकल एडमिशन घोटाले में कुछ मौजूदा और कुछ रिटायर्ड जजों के शामिल होने का आरोप था .

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३.  प्रेस कांफ्रेंस करने वाले चारों जजों का मुख्य एतराज जज बी एम लोया की रहस्यमय मौत की जांच की मांग करने वाली याचिका की सुनवाई कोर्ट नंबर 10 को सौंपी गई, जबकि पहली चीफ जस्टिस की अगुवाई के अलावा पहली चार सीनियर बेंचों के ये मामला नहीं सौंपा गया. यहाँ गौरतलब हैं बी एम् लोया वही जज हैं जो अमित शाह के केस की सुनवाई कर रहे थे . जिनकी बाद में रहस्मयी तरीके से म्रत्यु   गई थी .

४  चारो  जजों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में आने वाले सभी महत्वपूर्ण मुकदमे सिर्फ उसी बेंच में जा रहे हैं, जिसके मुखिया चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा हैं। इस तरह दूसरे वरिष्ठ जजों की अगुवाई वाली बेंचों को महत्वपूर्ण मुकदमों और मामले से दूर रखा जा रहा है.

५ . प्रेस कांफ्रेंस करने वाले चारों जजों का मानना  है कि चीफ जस्टिस का एक छोटी बेंच की अगुवाई करना गलत है, क्योंकि इससे पहले इस तरह की बेंच में 5 जज हुआ करते थे.

जजों की इस प्रेस कांफ्रेंस ने एक बहस लोकतंत्र के बारे में छेड़ दी हैं . शाम होते होते सियासी पारा अपने पूरे उफान पर होगा .

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