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जब राहुल गाँधी ने भगवान् शिव के सहारे, विरोधियों को किया चारों खाने चित

भगवान् शिव के सहारे विरोधियो को किया चारो खाने चित

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चित्रकूट में भाजपा की पराजय चुनावों से पहले एक बड़ा संकेत

चित्र कूट की कांग्रेस विजय ने भाजपा के लिए खतरे की घंटी बजा दी हैं .

चित्रकूट से पहले भी उपचुनावों में कांग्रेस ने अपना परचम प्रदेश में लहरा दिया हैं .

शिव राज सिंह का दो दिन का प्रवास भी काम नहीं आया .

उधर गुजरात में राहुल गाँधी जितना लोगो से संवाद स्थापित कर रहे हैं वो उतना ही निखर रहे हैं .

वाकपटुता और तीखी होती जा रही हैं . मुस्कुराते हुए तंज़ कस जाना .

उनकी शैली का एक ख़ास अंग हैं .

राहुल गाँधी ने जहाँ अपने निजी जीवन के कुछ पन्नों को कांग्रेस कार्यकर्ताओं के सामने खोल कर रख दिया हैं .

उससे कार्यकर्ता भी उत्साहित हो रहा हैं .

हम बदला नहीं ,बदलाव लाना चाहते हैं गुजरात में : राहुल गाँधी

राहुल गाँधी का शिव दर्शन

कल एक ख़ास प्रश्न उनसे पूछा गया गुजरात की सोशल मीडिया की एक मीटिंग में ,जब राहुल गाँधी सभी कार्यकर्ताओं के सवालों का जबाब दे रहे थे . प्रश्न पूछा गया की भाजपा के लोग आपको इतना ट्रोल करते हैं .

क्या आप विचलित नहीं होते . तपाक से राहुल गाँधी ने अपना सवाल उस कार्यकर्ता की तरफ उछाल दिया .

राहुल गाँधी ने पूछा की भगवान शिव जी के बारे में आपको पता हैं .

इतने शब्द से ही उन्होंने आध्यात्मिक रहस्य से भरा उत्तर दे दिया था .

जो केवल भगवान शिव का ही नहीं,विरोधियों को भी एक संदेश अपने शिव दर्शन से दे दिया था राहुल गाँधी ने .

शिव समाधिस्त रहे अपना काम करते रहे हैं .

भगवान् शिव  भोले भाले कृपालु जो थोड़ी सी ही पूजा से प्रसन्न हो जाते हैं .

भोले शंकर  सन्यासी हैं मोह माया भोग से दूर .उन पर इल्ज़ाम भी लगे उनका तिरस्कार उनकी पत्नी माँ गोरा के यहाँ राजा दक्ष ने किया .

शिव शिव हैं अनन्त हैं .

राहुल गाँधी के सामने गुजरात में भाजपा का आत्मघाती,आत्म समर्पण ,जी एस टी पर बदले सुर

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी के कुछ शब्दों ने उनकी आध्यात्म पर गहरी पकड़ का प्रदर्शन कर दिया था .

राहुल गाँधी अक्सर अपनी सभाओं में कहते हैं .

गुजरात में शिक्षा का निजी आर्थिकरण का प्रभाव आदिवासियों और दलितों पर हुआ हैं .

उनके पास अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए इतनी महंगी डोनेशन नहीं की वो अपने बच्चों को पढ़ा सके .

शिक्षा दिला सके .एक तरह से संघ की सोच का पता इस गुजरात मॉडल से चल जाता हैं .

समाज में बही रहे जो धन वान और बलशाली कमजोरो के लिए कोई स्थान नहीं ,लैमार्क वाद से प्रभावित लगता हैं .

जब प्रश्न पूरे  देश का हो तब डार्विन की थ्योरी कही सटीक हैं .

गुजरात चुनाव: क्या भाजपा का सूर्य अब अस्त होने को हैं ,सर्वे से मिल रहे संकेत
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