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सरदारों के गढ़ में राहुल गाँधी की असरदार जन सभाए ,लोकप्रिय होते राहुल

राहुल गाँधी गुजरात की मिट्टी में ताप कर कुंदन बन रहे हैं .

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राहुल गाँधी जब पहुचे मेहसाणा

बीते दिन राहुल गाँधी भाजपा के गढ़ मेहसाणा में थे .

उनके इंतज़ार में यहाँ युवाओं की बड़ी फौज पिछले पांच घंटे से उनकी राह देख रही थी .

सब देख लेना चाहते थे राहुल गाँधी को .

राहुल गाँधी की जिस तरह से यात्राये गुजरात में सफल हुई हैं उस को देख कर राहुल गाँधी का आत्म विश्वास लबालब भर उठा हैं .

राहुल गाँधी की सभा में लाखों की भीड़ और भाजपा के मंत्रियों को घर घर घूमना पड़ रहा हैं .

उनको कई जगह तो गुजरात की जनता खदेड़ देती हैं .

कई पाटीदार बाहुल्य क्षेत्रो में भाजपा के घुसने पर प्रतिबंध लगा दिया गया हैं .

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राहुल गाँधी जहाँ गुजरात में भ्रष्टाचार के मुद्दे को ले कर अमित शाह के मामले को उठा रहे हैं .

तब भाजपा के पास केवल एक मीडिया ही बचा हैं जो भाजपा का गुणगान करता नज़र आता हैं .

पर कभी भी भाजपा से ये सवाल पूछने का साहस नहीं जुटा पाता हैं .

जो रोज़गार और वर्तमान उपलब्धियों से जुड़ा हुआ हो .

राहुल गाँधी जय सरदार और जय माता दी के नारों के बीच भाजपा के कथित  हिंदुत्व को चुनौती देते नज़र आते हैं .

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तब दूसरी तरफ अल्पेश ठाकोर ,जिग्नेश मेवाती और हार्दिक पटेल की बात करना नहीं बोलते .

राहुल गाँधी अपने तरकश से कांग्रेस नाम के तीर को निकाल ने  से परहेज करते हैं .

अपने भाषणों में चुनावों को गुजरात की जनता की लड़ाई बता कर सबका मन जीत लेते हैं .

पाटीदार युवाओं की गोलाबारी में हुई मौत का जिक्र करके सहानुभूति भरा शाब्दिक सहारा पाटीदारो को देते नज़र आते हैं .

तब दूसरी तरफ उना में दलितों की पिटाई को वो भारतीय संविधान के मूल अधिकार का ज़िक्र छेड़ देते हैं .

वो कहते हैं की गुजरात के हर तबके समाज और आदिवासी सब मिल कर कांग्रेस के घोषणा पत्र को तैयार कराये .

ये लड़ाई अकेले कांग्रेस की नहीं पूरे गुजरात की हैं .

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ये कह कर भाजपा को चुनावी मैदान में मुद्दों की फुटबॉल भी राहुल गाँधी छीन ले जाते हैं .

राहुल गाँधी नोट बंदी और जी एस टी के आक्रोश को भी निशाना बना कर सरकार की नियत पर सवाल उठाते हैं .

जातियों और समूहों की राजनीति करने वाली भाजपा के पास अब राजपूत मतदाताओं में सहारा नज़र आता हैं .

वो संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मा वती के विरोध पर खड़ी नज़र आने का प्रयास करती हैं .

उसके बाद कांग्रेस का भी बयान फिल्म के विरोध में आ जाता हैं .

भाजपा के पास गुजरात चुनाव में गिनाने को कोई उपलब्धि नहीं हैं .

न तो गुजरात राज्य की और न ही केंद्र सरकार की कोई भी उपलब्धि हैं.

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