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नोट बंदी से कैसे तबाह हुई देश की अर्थव्यवस्था ,काला दिवस :विशेषांक

देश की अर्थ व्यवस्था पर सबसे बड़ी चोट

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नोट बंदी का सच विकास या बर्बादी

नोट बंदी की जगह नोट ज़ब्ती शब्द का इस्तेमाल ज्यादा सटीक बैठता हैं. जो सरकार ने देश की जनता के धन के साथ किया हैं.

आम आदमी की निजता और आज़ादी का अधिकार भी मोदी सरकार ने इस एक साल में छीन लिया हैं .

जनता को मालूम ही नहीं काले धन के सरकारी आन्दोलन में उसका खुद का मिनिमम कमाया धन बैंकों के अधिकार में हो गया हैं . शायद मानवता और संवेदन-शीलता से कोसो दूर हैं.

प्रधानमंत्री मोदी और उसके पार्टी के कार्यकर्ता और सरकारी मंत्री और सांसद जिन्होंने जनता के द्वारा दिए गये भरपूर स्नेह को कलंकित करने का कार्य किया हैं .

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भाजपा की इस सरकार ने देश की जनता को समाजिक सुरक्षा ,आर्थिक सुरक्षा के नाम पर भय युक्त समाज और सरकारी लूट के साथ साथ आर्थिक गुलामी दी हैं.

कोई इतना निर्दयी कैसे हो सकता हैं जो देश की जनता के धन का बलात अपहरण कर बेशर्मी से उसको देश भक्ति का नाम दे ,बेशर्मी से उसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग बताये .

बीते एक साल में बहुत से नेताओं के नोट बंदी को को ले कर बयान आये.

यहाँ तक की देश की भूत पूर्व गवर्नर रघु राज रामन ने भी नोट बंदी पर अपनी राय बहुत खुल कर रखी हैं .

इस काले दिन में उन सब टीका और टिप्पणियों का पुनः स्मरण बहुत ज़रूरी हैं .

कल भूत पूर्व प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने नोट बंदी का सबसे बड़ा नुक्सान और प्रभाव बताया .

वो जुमले फेंकते रहे ,काले धन वाले धन सफ़ेद कर ले उड़े ,फंसी मोदी सरकार

उन्होंने बताया की किस तरह नोट बंदी के कारण चीन का लाभ हुआ और देश का नुक्सान .सही मायने में चीन को चुनौती देता भारत ४५ साल पीछे चला गया हैं .

व्यापार में जहाँ चीन समेत पड़ोसी मुल्कों का व्यापार तेजी के साथ उन्नत हुआ ,भारत का व्यापार घट गया.

अब शेखी बखारते रहो राष्ट्रवाद और देश भक्ति का नारा लगा कर !

इस नारे को लगा कर देश भक्ति की आड़ में देश के साथ बहुत बड़ा छल हुआ हैं .

कांग्रेस नेता आन्नद शर्मा ने पिछले दिनों कहा था …

कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने कहा कि नोट बंदी का चौंकाने वाला फैसला प्रधानमंत्री का निजी फैसला था.

प्रधानमंत्री ने कहा था कि नोट बंदी से भ्रष्टाचार, नकली नोट, काला धन और आतंक खत्म हो जाएगा.

पी एम् की चारों बातें  गलत निकली.कांग्रेस नेता आन्नद शर्मा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में  कहा,

‘आर बी आई कहती है कि 99 प्रतिशत नोट वापस आ गए.

नेपाल और भूटान का पैसा वापस ले लिया जाए, सहकारी का पैसा वापस ले लिया जाए तो ज्यादा हो जाएगा.

15 अगस्त को पी एम मोदी जी  ने गलत बयान दिया कि 3 लाख करोड़ काला धन वापस आ गया.

पी एम अपनी ग़लती स्वीकार करे, वो लगातार गलत बयानी कर रहे हैं.

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जनता के सामने सच बोले.’आनंद शर्मा ने आगे कहा कि सिर्फ 41 करोड़ नकली नोट थे.

नोट बंदी के चलते पूरे देश में आर्थिक अराजकता आ गयी  और GDP में 1.5 फीसदी की गिरावट हुई.

इससे 2.25 लाख करोड़ का नुकसान हुआ जिसकी ज़िम्मेदारी पी एम की बनती है.

सरकार के सांसदों के निशाने पर वित्त मंत्री

भाजपा सांसद सुब्रमण्‍यम स्वामी ने वित्‍त मंत्री अरुण जेटली पर हमला बोला.

उन्‍होंने कहा, ‘मैं नोट बंदी के पक्ष में  था ही नहीं तो इसका जबाब जेटली देगा. मैं क्या कह सकता हूं ?

आर बी आई ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि नोट बंदी के बंद हुए 99 प्रतिशत नोट वापस बैंकों में आ गए.

केवल एक प्रतिशत नोट ही नहीं आए.

इस जानकारी के बाद सरकार के काले धन पर लगाम लगने के दावे पर सवाल उठ रहे हैं.

पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने रिजर्व बेंक की अपने कड़े बयानों में भर्त्सना की हैं .

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा की रिजर्व बैंक ने नोट बंदी को सही कदम बताया था .

वो अपने कथन के लिए पूरे देश से क्षमा मांगे .

यहाँ याद रखने वाली महत्वपूर्ण बात ये हैं की केवल एक प्रतिशत नोट नहीं आयें .

और नये नोटों की छपाई में सरकार ने दुगना पैसा बर्बाद कर दिया .

देश के चौकीदार ने देश की तिजोरी पर डाका डलवा दिया हैं .

रघु राज रमण भूत पूर्व आर बी आई गवर्नर  ने किया था आगाह  :-

रिजर्व बैंक की रिपोर्ट आने के बाद ही रघु राज रमन ने मोदी जी की अदूरदर्शिता के बारे में लिखा हैं .

साथ में ये भी स्पष्ट किया की रिजर्व बैंक तक को जानकारी नहीं थी की मोदी देश के आर्थिक सिस्टम की हत्या करने वाले हैं .

उनकी किताब के हवाले से ये प्रसंग  स्पष्ट हो जाता हैं .

रघु राजन ने अपनी नई किताब ‘आई डू व्हाट आई डू’ में इसका उल्लेख किया है.

यह आर बी आई गवर्नर के तौर पर विभिन्न मुद्दों पर दिए गए उनके भाषणों का संग्रह है.

किताब द्वारा उनके  सरकार से उनके असहज रिश्तों और मतभेदों पर भी प्रकाश अनुभव किया जा सकता  है.

राजन ने स्पष्ट किया कि उनके कार्यकाल के दौरान कभी भी आर बी आई से नोट बंदी पर फैसला लेने को नहीं कहा गया था.

किताब से साफ़ पता चलता हैं की रिजर्व बैंक के तत्कालीन रघु राज किन संविधान की परिपाठियो  से बंधे थे ?

Jammu: Vaishno Devi pilgrims showing demonetized 500 and 1000 rupees notes in Jammu on Wednesday. PTI Photo (PTI11_9_2016_000308A)

रघु राज भूत पूर्व हिन्दुस्तान के रिजर्व बैंक के गवर्नर जिन पर मोदी सरकार ने दबाब डाला .

और देश पर थोप दी नोट बंदी ,बर्बाद कर के रख दी देश की अर्थवयवस्था ….

आर्थिक आपात काल

अगर आपात काल के लिए शहीद इंदिरा गाँधी को दोषी माना जाता हैं ,

तो देश की अर्थवयवस्था का दोषी  वर्तमान पी एम् क्यों नहीं ?

इस बयान से उन अटकलों पर भी विराम लग गया.

कि आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोट बंदी के चौंकाने वाली घोषणा के कई माह पहले ही बड़े नोटों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई थी.

उन्होंने खुलासा किया, फरवरी 2016 में सरकार ने नोट बंदी पर उनसे राय मांगी थी .

उन्होंने मौखिक रूप में अपनी राय बता दी थी.

उनको नहीं मालूम था की सरकार को इतनी जल्दबाजी क्यों थी

.राहुल गाँधी ने यहाँ भी दिखा दिया भाजपा के योगी और मोदी जी को प्रतिबिम्ब ,

रघु राज रमन की पी एम् के कहने पर असहमति के बावजूद आर बी आई द्वारा  नोट तैयार कराया गया .

राजन के अनुसार, असहमति जताने के बाद उनसे इस मुद्दे पर नोट तैयार करने को कहा गया था .

आर बी आई ने नोट तैयार कर सरकार को सौंप दिए.इसके बाद सरकार ने निर्णय करने के लिए समिति बना दी थी.

समिति में आर बी आई की ओर से करेंसी से जुड़े डिप्टी गवर्नर को शामिल किया गया था .

इसका मतलब सीधा से ये निकलता हैं की  तत्कालीन रिजर्व बैंक गवर्नर रघु राजन ने स्वयं इन बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था .

रघु राज जी ने बिना तैयारी नोट बंदी को लेकर पी एम् मोदी को आगाह किया था.

आर बी आई ने नोट में नोट बंदी के पड़ने वाले प्रभावों, फ़ायदों के बारे में पी एम् को  बताया गया था .

साथ ही सरकार जिन उद्देश्यों को पूरा करना चाहती थी कि उनके वैकल्पिक रास्ते भी बताए गए थे .

इसमें कहा गया कि अगर सरकार नफे-नुकसान पर ग़ौर करने के बाद भी नोट बंदी पर आगे बढ़ना चाहती है .

तो उसके लिए समय और तैयारियों की जरूरत होगी. यह भी बताया कि बिना तैयारी के क्या नतीजा हो सकता है?

एक  ज़बरदस्त खेल हुआ देश भक्ति के नारे को लगा कर जिसने देश की अर्थवयवस्था को तहस नहस कर दिया हैं .

सट्टा बाज़ार रोशन हो उठे हैं . काला धन इस बहाने सफ़ेद भी हो गया .

सरकार अभी तक अपनी मूंछो को सहलाते हुए सब कुछ जान कर भी अनजान रहने का मूक अभिनय कर रही हैं .

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