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गुजरात चुनाव: क्या भाजपा का सूर्य अब अस्त होने को हैं ,सर्वे से मिल रहे संकेत

क्या भाजपा बचा पायेगी अपना किला

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क्या गुजरात चुनाव में हारेगी भाजपा

सरकार अतिवाद की तरफ अग्रसर हैं .बहुत सारी विसंगतियों के बाद वो अपने राग में मस्त सत्ता के रथ को दौड़ा रही हैं .

हिमाचल के चुनाव परिणाम ई वी एम् मशीनों में क़ैद हैं .

गुजरात चुनाव का बोलबाला बहुत जोरों से लोगो के बीच हो रहा हैं .

राहुल गाँधी अपनी सादगी के साथ लोगो के बीच पहुंच कर संवाद स्थापित कर रहे हैं .

दूसरी तरफ भाजपा सरकार के राष्ट्रीय अध्यक्ष को गुजरात में ही भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा हैं .

अभी तक तमाम प्रेस कांफ्रेंस बिना कारण बताये रद्द कर दी गयी हैं .

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राहुल गाँधी पिछले दिनों सूरत में व्यापारियों और लघु उद्यमियों  के साथ एक संवाद में थी .

आत्मविश्वास और उनकी शारीरिक भाषा और आत्म विश्वास में ग़जब का संतुलन था .

वो बात करते लोगो को ध्यान से सुनते और अपनी राय देते .

साथ ही कुशलता से सरकार पर ये कह कर की क्या कोई नेता मेरी तरह आज तक इस तरह से आपसे बात करने आया ?

सरकार पर निशाना और सवाल उठा देते .

GST के मामले में फंसी भाजपा की हालत सांप छुछुंदर जैसी हो गयी हैं .

न उगलते बन रहा हैं न निगलते ,गुजरात में भारी व्यापारिक विरोध के मध्य भाजपा को अपनी दीवारें हिलती नज़र आने लगी हैं .

गुजरात में भाजपा का दरकता किला , राहुल गाँधी का गुजरात में बढ़ता क्रेज

आज जी एस टी काउंसिल की मीटिंग गोहाटी में हो रही हैं .

अपने राजनैतिक लाभ के चलते भाजपा अपना चुनावी लाभ पहले देखेगी .

ये भी हो सकता हैं की केवल एक स्लैब के अन्दर ही सब उत्पादों और सेवाओं को समायोजित किया जाए .

राहुल गाँधी के गुजरात प्रवास के कारण भाजपा के आँखों की नींद ग़ायब हैं .

उसे अपनी प्रत्यक्ष पराजय गुजरात में नज़र आने लगी हैं .

आम तौर पर मीडिया में भाजपा के पक्ष में सर्वे दिखाए जाते रहे हैं .

इस बार ये पहली बार हो रहा हैं की गुजरात चुनाव में एक तरफ़ा चुनावी सर्वे दिखाने में मीडिया चैनल सावधानी का प्रयोग कर रहे हैं .

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ये करना मीडिया की इस लिए भी मजबूरी हैं .

चुनाव की रिपोर्टिंग उनके ही मीडिया कर्मियों को जनता के बीच जा कर करनी हैं .

गलत सर्वे दिखाए जाने पर जनता उनसे सवाल कर सकती हैं . हो सकता हैं विरोध भी किया जाए या उनका बहिष्कार किया जाए .

हिमाचल में हुए मतदान के प्रतिशत में बढ़ोत्तरी ने भाजपा की पेशानी पर बल ला दिया हैं .

भूत पूर्व सैनिकों और सरकारी कर्मचारियों के वोट इस चुनाव में निर्णायक सिद्ध होंगे .

जिन पर कांग्रेस सरकार ने चुनाव पूर्व काफी फैसले लिए थे .

कुल मिलाकर भाजपा को इस बार दोनों ही राज्यों में भारी हार का सामना करना पड़ सकता हैं .

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