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शाह-जादा की अपार सफलता के बाद भाजपा की नयी पेशकश “अजीत शौर्य गाथा “:राहुल गाँधी

राहुल गाँधी का अब राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोभाल पर निशाना

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राहुल गाँधी ने आज भाजपा की एक दुखती रग पर फिर से हाथ रख दिया . उन्होंने ट्वीट किया एक लेख ,एक रिपोर्ट के बारे में जो द बायर में प्रकाशित हुई हैं . जिस में बायर ने दावा किया हैं की एक अजीत डोभाल  की कम्पनी के बारे में जिसको  वो और उनका पुत्र शौर्य डोभाल मिल कर चलाते हैं .

राहुल गाँधी ने लिखा शाह-जादा की अपार सफलता के बाद भाजपा की नयी पेशकश “अजीत शौर्य गाथा ”

द बायर का ये सनसनीखेज़ खुलासा मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा हैं .

अमित शाह के पुत्र के बाद अब अजीत डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल की कंपनी का 2014 के बाद अचानक से तरक्की  करना अब सवाल खड़े कर रहा हैं .

द बायर की रिपोर्ट के अनुसार शौर्य डोभाल  का इंडिया फ़ाउंडेशन  नामक संस्थान 2014 से पहले तक महज एक ऐसा संगठन था,

जो  केरल में कट्टरवादी इस्लाम और आदिवासियों के जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों पर कुछ ग्राफिक्स बनाता रहता था. यूं तो यह संगठन 2009 से काम कर रहा था, लेकिन 2014 के बाद से इसकी गतिविधियों में तेजी आई और इसने आश्चर्य जनक  तरक्की की हैं . यह तरक्की देखकर आश्चर्य होता है.

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इस कम्पनी का कार्यालय राजधानी के लुटियन जोन में हेली रोड जैसे पॉश इलाके में हैं . जहाँ किराया काफी  महंगा  हैं इसमें कई कर्मचारी भी काम  करते हैं .

सरकार और शौर्य डोभाल पर द वायर के सवाल 

बायर ने साथ में सवाल भी उठाये हैं कंपनी को चलाने के लिए धन कहाँ से आता हैं .उसकी कोई पारदर्शी जानकारी इनकी वेब साइट पर नहीं डाली गयी हैं . इस कम्पनी के संदिग्ध होने का आभास करा रहा हैं .

शौर्य डोभाल  ने राजस्व के स्रोतों के बारे में ज़रूर कहा कि, “कांफ्रेंस, विज्ञापन और जर्नल”. शौर्य डोभाल  ने यह नहीं बताया कि किन कंपनियों से यह राजस्व मिलता है और न ही यह बताया कि एक ट्रस्ट की तरह रजिस्टर्ड इंडिया फ़ाउंडेशन अपने रोज़मर्रा के काम कैसे करता है,

राजधानी के लुटियन जोन में हेली रोड जैसे पॉश इलाके में जगह का किराया कैसे देता है और अपने कर्मचारियों को वेतन कैसे और कहां से देता है.

इंडिया फ़ाउंडेशन के साथ भाजपा संगठन और वर्तमान केन्द्रीय मंत्रियों के संलिप्त होने से मामला और गंभीर हो जाता हैं जाहिर तौर पर शौर्य डोभाल  और संघ से पार्टी में आए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव चलाते हैं.

इस कम्पनी के निदेशक  मंडल में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के अलावा नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जयंत सिन्हा और विदेश राज्यमंत्री एम जे अकबर शामिल हैं.

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केन्द्रीय मंत्रियो की संलिप्तता क्यों 

चार महत्वपूर्ण मंत्रियों, संघ परिवार से आए ताक़तवर बीजेपी नेता और पी.एम.ओ पर प्रभाव रखने वाले व्यक्ति का बिजनेस मैन बेटा जिस संस्था को चलाते हों, उससे उचित और शक्तिशाली जुगल बंदी  और क्या हो सकती है. इस संस्था ने अब तक जितने भी कार्यक्रम किए हैं, उनमें महत्वपूर्ण और वर्तमान नीति निर्धारकों की मौजूदगी रही है, जिसके चलते ये सारे कार्यक्रम ज़बरदस्त कामयाब ही नहीं हुए बल्कि सरकार और देशी-विदेशी कंपनियों ने इन्हें प्रायोजित भी किया हैं .

बायर की रिपोर्ट के अनुसार इस इंडिया फ़ाउंडेशन संस्थान की कामयाबी का राज इसमें शामिल यह 6 महत्वपूर्ण चेहरे हैं, तो यही इस संस्थान की समस्या भी हैं, क्योंकि इससे सीधे-सीधे हितों को टकराव का मामला सामने आता है क्योंकि देशी-विदेशी कंपनियां इस संस्थान के कार्यक्रमों में सहयोग कर, सरकार से अपनी मन मर्जी काम ले सकती हैं या उन नीतियों में बदलाव करा सकती हैं, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो सकता हो .

यह संस्थान एक ट्रस्ट चलाता है, इसलिए कानून के अनुसार  उसे अपनी बैलेंस शीट सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है. इसके अलावा इसके निदेशक मंडल में केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी के बावजूद इस संस्थान ने अपने वित्तीय लेनदेन या राजस्व के स्रोत बताने से इनकार कर दिया.

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संस्थान कैसे करता हैं काम 

बायर की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संस्था का काम ,  देशी-विदेशी उद्योगपतियों और कार्पोरेट परिवारों  को ऐसे मंच उपलब्ध कराता है ,जहां उद्योगपति केंद्रीय मंत्रियों और आला अफसरों से मिलते-जुलते हैं और सरकारी नीतियों की  पर चर्चा करते हैं. इंडिया फाउंडेशन के अपारदर्शी वित्तीय लेन देन, वरिष्ठ मंत्रियों का इस संगठन का डायरेक्टर होना कई तरह के सवाल खड़े करता है, क्योंकि संगठन के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर शौर्य डोभाल  का खुद एक ऐसी वित्तीय संस्था जेमिनी फायनेंशियल सर्विसेज नाम की फर्म चलाते हैं, जिसका काम एशियाई और दूसरे देशों की अर्थव्यवस्थाओं के बीच लेन देन को अंजाम देना है. ऐसे में इससे हितों के टकराव और लॉबिंग का मामला साफ नजर आता है. वो वायदा झूठा प्रतीत होता हैं  ,जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से किया था कि सत्ता से गलियारों से वे दलालों की छुट्टी कर देंगे.

यह इंटरव्यू जेमिनी फायनेंशियल सर्विसेज की वेबसाइट पर उपल्बध है, जिससे पता चलता है कि पारदर्शिता यहां एकदम निरर्थक है। अजीत डोवाल इस जियस कैपिटल नाम की कंपनी चलाते थे, जिसे उन्होंने 2016 में जेमिनी फायनेंशियल सर्विसेज में विलय कर दिया. जेमिनी फायनेंशियल सर्विसेज के चेयरमैन सऊदी अरब के सत्तारुढ़ शाही परिवार के सदस्य और दिवंगत किंग अब्दुल्ला के बेटे प्रिंस मिशल बिन अब्दुल्ला बिन तुर्की बिन अब्दुल अज़ीज़ अल-सऊद हैं .

वेब साईट पर जानकारियाँ 

बायर की रिपोर्ट बताती हैं की इंडिया फ़ाउंडेशन ने जो कार्यक्रम किए हैं उनमें से एक कार्यक्रम था, ‘स्मार्ट बार्डर मैनेजमेंट’, इस कार्यक्रम के प्रायोजकों के नाम कार्यक्रम के दौरान मंच और कार्यक्रम स्थल पर साफ देखे जा सकते थे. इन कार्यक्रमों के फोटो में भी ये नजर आते हैं. इन प्रायोजकों में बोईंग जैसी विदेशी विमानन कंपनी और रक्षा उपकरणों की आपूर्ति करने वाली इजरायली कंपनी मागल के नाम हैं. इसके अलावा डी.बी.एस बैंक के साथ  कई अन्य प्राइवेट कंपनियां भी इस कार्यक्रम के प्रायोजकों में शामिल थीं. लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इन कंपनियों के प्रायोजक बनने की  स्थिति या फिर शर्तें क्या थीं, और उन्होंने इस प्रयोजन के कितने और किसे पैसे दिए.

शौर्य डोभाल  राजनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल  के पुत्र हैं. ये भी मोदीजी के उस वायदे की हवा निकालता हैं जिसमे वंशवाद को खत्म करने की बातें कही गई थीं.

 

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