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क्या भूपिंदर सिंह हुड्डा थामेंगे भाजपा का दामन ? दावा कितना सच कितना झूठ

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हरियाणा के कांग्रेस नेता और भूत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा की पी एम् मोदी से मुलाक़ात ने राजनैतिक गलियारों में चर्चाये और अफवाहों का दौर शुरू हो गया हैं .

सभी ने इन मुलाकातों को ले कर अपने अपने राजनैतिक अनुमान लगाना शुरू कर दिए हैं .

सबसे ज्यादा चर्चित ब्यान दिया हैं हुड्डा समर्थक कांग्रेस  विधायक जयतीर्थ दहियाके हालिया ब्यान ने हरियाणा कान्ग्रेस् में  बबाल मचा दिया हैं.

उसी ब्यान को आधार बना कर आम आदमी पार्टी के  प्रदेशाध्यक्ष नवीन जयहिंद ने कहा कि विधायक जयतीर्थ दहिया के बयान से साफ़ है हुड्डा ने 13 विधायकों के साथ भाजपा में जाने का फैसला कर लिया है.

अमित शाह के 3 दिन के रोहतक दौरे पर हुड्डा की चुपी का राज खुल गया है. मोदी-अमित शाह से गुपचुप हुड्डा की सेटिंग हो चुकी है. उनकी ओर से हुड्डा के सामने तीन ऑप्शन रखे गए हैं,

इनमें एक जेल जाओ, दूसरा भाजपा में आओ तीसरा नई पार्टी बनाओ. अब हुड्डा ने भाजपा में जाने का विकल्प  चुन लिया है. नवीन ने आरोप लगाते हुए कहा कि हुड्डा को कुर्सी से मतलब है जनहित से कोई मतलब नहीं…

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यहाँ गौरतलब हैं की हरियाणा कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर के बीच सियासी वर्चस्व की जंग किसी से छुपी नहीं है.

जो समय-समय पर एक – दूसरे के खिलाफ खुलकर सामने आते रहे  हैं.

हुड्डा ने मोदी से मुलाकात करके अपने मंसूबे भी कांग्रेस आलाकमान के सामने जाहिर कर दिए हैं.

अशोक तंवर के हाथों से पार्टी की कमान लेकर उन्हें नहीं दी जाती तो पार्टी को छोड़कर बीजेपी का दामन थामने में वो देर नहीं करेंगे.

अशोक तंवर की प्रतिक्रिया

इस मुलाकात पर अशोक तंवर ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भूपिंदर सिंह हुड्डा तो नरेंद्र मोदी से मुलाकात को शिष्टाचार की मुलाकात बता रहें हैं.

जबकि एक कांग्रेसी विधायक अलग सुर अलाप कर अनुशासन हीनता कर रहें हैं.

तंवर ने कहा कि नि:संदेह इस घटनाक्रम में कुछ तो चल रहा है. यह संगठन के हित की बात नहीं है. कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में यकीन करती है.

उन्होंने कहा कि ये लोग कांग्रेस को छोड़कर क्यों जाएंगे क्योंकि अगला भविष्य कांग्रेस का है.

पार्टी आलाकमान से दवाब बनाकर कुछ नहीं किया जा सकता है. पार्टी किसी के चेहरे से नहीं सामूहिक रुप के नेतृत्व से चलती है.

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जयतीर्थ के बयान कि हुड्डा साहिब जहां जाएंगे, हम वहीं जाएंगे पर तंवर ने कहा कि कांग्रेस की टिकट पर जीते लोगों द्वारा ऐसी भाषा शैली इस्तेमाल करना अनुशासनहीनता है.

वह आला कमान से तुरंत बात करेंगे. तंवर ने कहा कि यह विधायक का मामला है .

इसलिए आला कमान को सूचित करेंगे. ये मामला विधायक से जुड़ा नहीं होता तो वह अब तक एक्शन ले लेते.

उन्होंने कहा कि बीजेपी अौर इनेलो के कई विधायक उनके संपर्क में हैं जो अन्य दलों में दुखी हैं अौर वे कांग्रेस में आना चाहता है. इनका फैसला योग्यता अौर उपयोगिता के हिसाब से होगा।

तंवर ने कहा कि कांग्रेस के 4 केंद्रीय नेता परवेज हाशमी , प्रदीप टमटा  व दो अन्य नेता सोमवार चंडीगढ़ आएंगे। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का चयन सितम्बर तक होगा.

क्या कहा था जयतीर्थ दाहिया ने ?

इन मुलाकातों पर मोहर लगाते हुड्डा समर्थक राई के विधायक जयतीर्थ दहिया ने कहा कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात महज शिष्टाचार भेंटवार्ता नहीं है.

बल्कि इसके कई राजनैतिक मायने हैं.

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यह बातचीत किसी नए राजनैतिक समीकरण को भी अंजाम दे सकती है, इसमें कोई दोराय उन्हें नहीं दिखती है।

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दहिया ने कहा कि राजनीति में कुछ भी स्थाई नहीं होता है और कोई स्थाई विरोधी नहीं होता. दहिया ने कहा कि बीजेपी हाईकमान लंबे समय से कद्दावर जाट नेताओं पर डोरे डाल रहा है. जब दो अलग-अलग दलों के वरिष्ठ नेता कहीं भी मिलते हैं, तो निश्चित तौर पर उनके बीच राजनैतिक चर्चा होती है. उन्होंने कहा कि हुड्डा व पीएम मोदी की मुलाकात का सवाल है, इसके भी कई राजनैतिक मायने हैं.

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उन्होंने कहा कि वह तो यहां तक मानते हैं कि यह पूरी तरह से राजनैतिक मुलाकात की थी. जयतीर्थ दहिया ने कहा कि दोनों नेताओं ने एकांत में क्या बातचीत की, यह तो वही बता सकते हैं, लेकिन यह तय है कि यह शिष्टाचार भेंटवार्ता भर नहीं थी.

दहिया ने कहा कि हरियाणा के मौजूदा हालात में वैसे भी बीजेपी नेतृत्व प्रदेश के दिग्गज जाट नेताओं पर लगातार डोरे डाल रहा है.

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों कांग्रेस के सारे विधायक बारी-बारी पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी तथा प्रदेश प्रभारी कमलनाथ से मिले थे. इसमें कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को हटाने की बात वह रख चुके हैं. इसके बाद पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा से भी पार्टी नेता राहुल गांधी ने बातचीत की थी। इसमें बातचीत में साफ हो गया था कि प्रदेश में संगठन में परिवर्तन किया जा रहा है.

कुछ राजनैतिक अंदेशे

हाल ही में कांग्रेस से राहुल गाँधी के पोल एजेंट जिसने दावा किया था अपने त्याग पात्र में की राहुल गाँधी को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा एक षड्यंत्र के तहत ,नाकाम और योग्य साबित करने की कोशिश कर रहे हैं .उपरोक्त सारे घटना कर्मो से ये स्पष्ट संकेत मिल रहा हैं की कुछ तो सच्चाई हैं .आशीष कुलकर्णी ने कुछ इसी तरह की कई वज़ह गिनाई थी .

हालिया घटनाक्रम में यदि कांग्रेस आलाकमान को विशवास में ले कर ये मुलाक़ात हुई हैं तब कोई बुराई नहीं यदि निजी और व्यक्तिगत मुलाक़ात हुई हैं तब आम आदमी के प्रदेशा अध्यक्ष नवीन जय हिन्द के कथन में दम नज़र आता हैं .

दीपेन्द्र हुड्डा की सफाई

हालांकि इस पर दीपेन्द्र हुड्डा ने अलग प्रतिक्रिया दी हैं जो लगाए जा रहे कयासों से बिलकुल अलग हैं .

सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने पूर्व सी.एम. भूपेंद्र हुड्डा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात को शिष्टाचार करार दिया है. सोशल मीडिया पर तो इस मुलाकात को यहां तक करार दे दिया गया था कि हुड्डा साहब जल्द ही भाजपा का दामन थाम सकते हैं. लेकिन सांसद दीपेंद्र ने इस बात को खारीज कर दिया। गत दिवस दीपेंद्र चांदोल गांव में एक युवा सम्मेलन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे थे।
उन्होंने तंवर व हुड्डा गुट मतभेद पर कहा कि कांग्रेस में सभी गुट एक हैं और सही समय आने पर सभी गुट एक साथ नजर आएंगे. विकास बराला प्रकरण पर कहा कि इस मामले में हमने कोई राजनीति नहीं की और न ही आज तक इस मामले में बराला का इस्तीफा मांगा. हां जिस तरह से इस मामले में सत्ता का दबाव कानूनी प्रक्रिया में किया उसका हमने विरोध किया और अभी इस मामले में निष्पक्ष हैं.

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