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पंचकुला और देश में हिंसा के लिए क्या भाजपा जिम्मेवार नहीं ? ३२ मौतों का कौन गुनाहगार ?

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साक्षी महाराज, भाजपा सांसद ने कहा हैं की कोर्ट लाखों अनुयायियों की बात नहीं सुन रहा है. वह सिर्फ शिकायतकर्ता की बात ही सुन रहा है. इसलिए हिंसा में हुए नुकसान के लिए कोर्ट भी जिम्मेदार है.

साक्षी महाराज इतने पर ही नहीं रुके उन्होंने कहा, एक शिकायतकर्ता के आधार पर कैसे कोई करोड़ो भक्तों को नजर अंदाज कर सकता है. महाराज ने पूरे प्रकरण को भारतीय संस्कृति को बदनाम करने का षड्यंत्र  बताया है.
बीजेपी सांसद ने कोर्ट के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक शिकायतकर्ता सही है या करोड़ों भक्त। सीधे-सादे राम रहीम को बुला लिया ……
सिर्फ साक्षी ही नहीं बीजेपी नेता सुब्रमण्यन स्वामी ने भी राम रहीम का बचाव करते हुए ट्वीट किया,

हाईकोर्ट डेरा सच्चा के समर्थको की भीड़ से नाराज ,डी जी पी को किया तलब

‘साधुओं के लिए नया खतरा: राजनेता और आश्रमों में रहने वाले स्वामीजी को जेल भेजकर आश्रम की संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं . साधुओं को अपने उत्तराधिकारियों को आगे बढ़ाना चाहिए .

अब न्यायपालिका पर भी प्रश्न चिन्ह वो लगा रहे हैं जो खुद में विचाराधीन और कई मुकदमो में वांछित हैं .

कोर्ट ने बाबा राम रहीम को दोषी ठहराने से पहले आदेश जारी कर कहा था की कोई भी नेता इस पर ब्यान न दे ,न ही कोई सरकारी आदमी उनसे मिले .

लेकिन भाजपा की खट्टर सरकार क़ानून का मखौल वैसे ही उडा  रही हैं जिस तरह बाबा राम रहीम के गुंडों ने पंचकुला की सडको पर क़ानून को मज़ाक बना कर रख दिया .

डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को भले ही सीबीआई अदालत ने रेप के आरोप में दोषी करार दे दिया हो, लेकिन बाबा राम रहीम की मौज में कोई कमी नहीं हैं ,उसको एक वी आई पी की तरह सुविधा दी जा रही हैं .

इस विवाद में भाजपा के जेल मंत्री  का नाम शामिल हो गया है .

बिहार में बाढ़ और लालू की रैली में राहुल के ना आने का सच…..

एक साक्षात्कार  में हरियाणा के जेल मंत्री कृष्‍ण लाल पवार ने कहा है कि डेरा सच्चा प्रमुख को रोहतक जिले के सुनारिया जेल में बने गेस्ट हाउस में रखा जाएगा.

अकेले जेल मंत्री ही नहीं सरकार के मुख्य मंत्री से ले कर पुलिस के संतरी तक पंचकुला हिंसा में हुए नरसंहार के लिए जिम्मेवार हैं .

जिस सीएम मनोहर लाल खट्टर ने बाबा राम रहीम को स्वच्छता अभियान का  ब्रांड एंबेसडर बनाया था, तो कार्रवाई के लिए ये हाथ कैसे खुलते. कैसे खट्टर पंचकुला की जनता की सुरक्षा के बारे में सोचते ?

लाखो हजारों की संख्या में डेरा प्रेमी पंचकूला में जुटते रहे,

लेकिन खट्टर  सख्त कदम उठाने के आदेश देने से बचते रहे.

डेरा प्रमुख से अनुयायियों को वापस चले जाने की अपील तो कराई, लेकिन तब तक मोबाइल इंटरनेट और बल्क एसएमएस सेवाएं बंद की जा चुकी थीं.

चार घंटे बाद सीएम ने सफाई दी. कहा-हमने रात को सेक्टर-1 से 21 तक डेरा समर्थकों को हटा दिया था. जबकि, सभी वहीं मौजूद थे. पुलिस के सिपाही ऐसा लग रहा था की डेरा प्रेमियों की सुरक्षा में लगे हुए हैं .

शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा जिनका ब्यान आया की “श्रद्धा पर धारा-144 नहीं लगेगी”

पिछले दिनों ये मंत्री बाबा गुरमीत राम रहीम  के जन्मदिन पर उसके चरणों में दंडवत प्रणाम करते नजर आए थे.

धारा-144 को लेकर मंत्रीजी ने बयान दिया कि बाबा के समर्थक  शांतिप्रिय हैं. श्रद्धा पर धारा 144 लागू ही नहीं होती.

पुलिस अधिकारियों को भ्रमित करती रही ,सरकार के मंत्रियो की बातें .

समर्थको का आना जारी था ,लेकिन धारा १४४ लगाने की बात तो होती रही पर उस प् अम्ल कभी भी नहीं हुआ .

ACS  रामनिवास इनको धारा १४४ लागू कराने में खान गलती हो रही हैं आखीर तक पता नहीं चला .इनकी जिम्मेवारी थी की  पुलिस, सीआईडी, केंद्र के साथ समन्वय की .

रामनिवास ने एक बार भी नहीं सोचा कि धारा १४४ की पाबंदी के बावजूद ऐसा कैसे हो रहा है. तीन अस्थायी जेल बनाई गईं थी , लेकिन डेरा प्रेमियों को शहर के बीच ही रहने दिया गया.  निश्चय ही इस के पीछे मुख्यमंत्री की तरफ से निर्देश रहे होंगे .

डीजीपी; बीएस संधू ने बाबा राम रहीम के  समर्थकों को हटाने के हाईकोर्ट के आदेश नहीं माना

हाईकोर्ट ने वीरवार सुबह 10:15 बजे  को ही इन समर्थको को पंचकुला से  खदेड़ने के ऑर्डर दे दिए थे , लेकिन हीला हवाली के बीच  शुक्रवार सुबह तक एक भी व्यक्ति को नहीं हटाया गया . बावजूद इसके कि वे खुद भी मौके पर गए। पुलिस के जवान पार्को-सड़कों में ही सो गए , और डेरा समर्थक  पंचकूला के कई सेक्टरों में घुस गए.

CID के  चीफ अनिल राव के पास हिंसा से जुड़े इनपुट थे, बाबा के समर्थको  की हिंसक प्रतिक्रिया संबंधी तमाम इंटेलिजेंस इनपुट देने की जिम्मेदारी थी.

लेकिन कोई भी एक्शन  नहीं लिया गया . संभवत: इसमें तालमेल का अभाव रहा. हिंसा के इनपुट सूचनाओं  का सही प्रयोग नहीं  किया गया. सूचनाएं तो यहां तक थीं कि बाबा समर्थको ने बलिदानी जत्थे भी तैयार किए गए थे.

सरकार की नाकामयाबिया

पहली नाकामी... नवंबर, 2014: रामपाल का पक्ष लिया। 6 लोग मारे गए.

दूसरी नाकामी… फरवरी, 2016: जाट आंदोलन के दौरान 10 दिन हिंसा हुई। 30 लोग मरे.

तीसरी नाकामी... अगस्त, 2017: वोटबैंक की खातिर बाबा राम रहीम के समर्थको  पर नरमी दिखाई गयी .

रहा सहा घाटा अब भाजपा के ब्यान्वीर नेता पूरा कर रहे हैं .

 

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1 Comment
  1. ravikamal vijaie says

    BJP ko जनता nE chuna hai इस liye bo chahe kइस i को mare ya kat de unko ye adhikar hum logo ने diya है इसलिये इस par vivad अनुचित hai

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