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गोरखपुर में 30 नौनिहालों की मौत ,जिम्मेवार मेडिकल कालेज या योगी की सरकार ?

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7 अगस्त को अस्पताल में 9 बच्चों की मौत (death ) हुई.
8 अगस्त को अस्पताल में 12 बच्चों की मौत (death ) हुई थी.
9 अगस्त को अस्पताल में 9 बच्चों की जान जाती है.

अचानक 10 अगस्त को जिस दिन ऑक्सीजन की सप्लाई ठप हुई उसी दिन बच्चों की मौत का आंकड़ा 23 पहुंच जाता है और 11 अगस्त को भी 7 मासूम बच्चों की मौत (death ) हुई है.

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के जिस बाब राघव दास मेडिकल कॉलेज में 48 घंटे के दौरान 30 मासूमों की मौत (death ) हुई है, तीन दिन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वहां का दौरा किया था.

इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही भरा रवैया नहीं छोड़ा. नतीजा 30 मासूमों की जान चली गई. हालांकि प्रशासन ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत की बात को खारिज कर रहा है.

यूपी के अस्पतालों की या सरकार की  लापरवाही

मेडिकल कॉलेज में दो दिन के भीतर तीस बच्चों की मौत (death ) की वजह अचानक 10 अगस्त की शाम ऑक्सीजन सप्लाई का रुक जाना है, क्योंकि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का पैसा लगभग 70 लाख बकाया था.

सरकार के स्वास्थ्य मंत्री की भी नैतिक जिम्मेवारी हैं की वो आगे आ कर प्रदेश की जनता को बताये की कहाँ कमी हुई हैं ?

सफाई तो मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को भी देनी चाहिए न क़ानून का राज हैं न ही नौनिहालों की जिन्दगी सुरक्षित ,इनकी जिम्मेवारी कौन लेगा , अखिलेश राज में इसी मेडिकल कालेज में बच्चो की मौत (death ) पर खूब सवाल भाजपा ने उठाये थे . अब नैतिक ज़िम्मेदारी  किसकी हैं .

जिम्मेवारी केंद्र सरकार के मुखिया मोदीजी की भी हैं ,क्युकी चुनाव उनके नाम पर लड़ा गया था .

सबसे बड़ी बात हैं की योगी आदित्य नाथ का संसदीय क्षेत्र हैं . राज्य में भी भाजपा की सरकार और केंद्र में भी भाजपा अब इसका जिम्मेवार कांग्रेस को तो नहीं ठहराया जा सकता . नैतिकता का दम भरने वाले मोदी जी को इन बच्चो की मौत पर योगी आदित्य नाथ का इस्तीफ़ा तो माँगना चाहिए .

एक  निजी कंपनी पुष्पा सेल्स पर है ऑक्सीजन सप्लाई का जिम्मा

गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन सप्लाई का जिम्मा लखनऊ की निजी कंपनी पुष्पा सेल्स का है. तय अनुबंध के मुताबिक मेडिकल कॉलेज को दस लाख रुपए तक के उधार पर ही ऑक्सीजन मिल सकती थी. लेकिन गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पर तो 66 लाख रुपए से ज्यादा बकाया था.

कंपनी ने कई बार  मेडिकल कॉलेज को उधार चुकाने के लिए चिट्ठियां लिखी थी
छह महीने से कंपनी मेडिकल कॉलेज को उधार चुकाने के लिए चिट्ठियां लिख रही थी. एक अगस्त को ही कंपनी ने गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज चिट्ठी लिखकर ये तक कह दिया था, कि अब तो हमें भी ऑक्सीजन मिलना बंद होने वाली है,पैसा चुका दो.

लेकिन पूरा अस्पताल प्रशासन सोता रहा और 10 तारीख को जैसे ही ऑक्सीजन सप्लाई रुकी, हड़कंप मच गया.

गोरखपुर के पास बांसगांव के बीजेपी सांसद कमलेश पासवान को भी बच्चों की मौत के पीछे वजह ऑक्सीजन का ठप हो जाना लगती है. खुद जिलाधिकारी ने माना है कि अस्पताल की तरफ से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का पैसा  बकाया था.

दावा है किहालांकि गोरखपुर के जिलाधिकारी बच्चों की मौत की सही वजह बताने के लिए जांच की रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कर रहे हैं.

वहीं, यूपी के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन भी ऑक्सीजन सप्लाई रुकने से मौत  से इनकार कर रहे हैं. जब अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई रुकी थी और बच्चों की जान सिर्फ एक पंप के सहारे टिकी हुई थी.

योगी के मंत्री का ऑक्सीजन की सप्लाई ठप होने से इनकार किया जा रहा हैं ,लगता हैं मंत्री जी उसी रूम में बैठे थे जहाँ से आई सी यू को ऑक्सीजन की सप्लाई जा रही थी .

अस्पताल में हुई मौत पर रिपोर्ट आज आने की उम्मीद है. प्रशासनिक अधिकारी और मेडिकल कालेज के डॉक्टर चाहे लाख दावें करें, लेकिन तीन दिन में 30 मरीजों की मौत ने अस्पताल की लापरवाही उजागर कर दी है
इंसेफ्लाइटिस वार्ड में हर दिन जिंदगी और मौत की जंग देखने को मिलती है लेकिन शुक्रवार को वहां का मंजर कुछ और ही भयावह था।

बीता हुआ कल जब मौत का पलड़ा जिंदगी पर भारी था……

इसका भय वहां मौजूद हर उस व्यक्ति पर था, जिसके कलेजा का टुकड़ा इस जिन्दगी की जंग में हार की कगार पर खड़ा था.
कालेज में आक्सीजन खत्म होने का सीधा दर्द भले ही मासूम झेल रहे हों लेकिन उसकी टीस हर पल उनके घरवालो की आँखों में देखने को मिली.

अपनी गलती छिपाने के लिए डाक्टरों द्वारा बार-बार आईसीयू केबिन के गेट को बंद कर दिया जाना, तीमारदारों को और भी सशंकित किए हुए थे.

कइयों को तो यह भय भी सता रहा था कि पता नहीं उनकी आँखों के तारे  अब इस दुनिया में हैं भी या नहीं.अवसर मिलते ही केबिन के बाहर जाकर निहार आते हैं  .

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