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शाह साब आप कह कर दिखाइए गोलवलकर सरसंघ चालक था : विनोद दुआ

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शाह साब आप कह कर दिखाइए गोलवलकर सरसंघ चालक था : विनोद दुआ


विनोद दुआ के साथ जन गन मन पर बात ,देश पर बात देश के लोगो की बात

आपकी बात मेरी बात हम सबकी बात जी हाँ हम सबकी बात

नोट बंदी के ऊपर रिजर्व बेंक ने बोलना शुरू कर दिया हैं .सरकारी आंकड़ो में ग्रोथ रेट ६.१ हैं .

ये आरोप नहीं हैं .खुद सरकार कह रही हैं . जो संस्थाए पहले डरी हुई थी

अब उन्होंने भी बोलना शुरू कर दिया हैं की नोट बंदी जल्द्वाजी में उठाया गया कदम था .

सरकार के वित्त मंत्री दावा कर रहे हैं की अभी आठ से नौ महीने पुराने नोटों की गिनती में लगेंगे .

अब समझ में नहीं आता कि वित्त मंत्री ने सबको भक्तो की तरह मूर्ख समझा हैं क्या ?

जब बेंको में नोट जमा हुए होंगे तब वो नोट बेंक वालो ने जाहिर हैं बिना गिने तो नहीं लिए होंगे .

जितने नोट बेंको ने रिजर्व बेंको को दिए होंगे ,वो गिन कर और ओंन रिकार्ड दिए होंगे .

तब वित्त मंत्री क्यों झूठ बोल रहे हैं और क्यों बोल रहे हैं .स्टेट  बेंक ऑफ़ इंडिया का मानना हैं की देश की अर्थवयवस्था  धीमी हो गयी हैं और भी धीमी होगी. बेंक के मुताबिक हालत नहीं सुधरे तो देश की अर्त्वय्वस्था और ध्वस्त होने वाली हैं .

इसका सबसे ज्यादा असर माध्यम वर्ग और गरीबो पर पड़ने वाला हैं .मीडिया अब भी चुप हैं खामोश हैं .गौ की हत्या पर तो खूब शोर हो जाता हैं यहाँ इंसानों को भूखा मारने की तैयारी हैं ,

बिना कोई आवाज़ किये ,बिना कोई शोर मचाये .जापान में मजाक उड़ाया था प्रधान सेवक ने “घर में शादी हैं पैसे नहीं हैं “ कह कर मज़ाक उड़ाया था .लोग खिलखिला कर हस रहे थे . कभी हसना कभी रोना .

हम को चाहिए एक श्वेत पेपर चाहिए ,कीतने  नोट आये. कितना आतंक खत्म हुआ क्या सरकार अपने वायदों पर श्वेत पत्र लायेगी .देश के लिए  .कुछ विरले पत्रकार ही बचे हैं जिनमे आज भी सच कहने की शक्ती हैं . विनोद दुआ उन्ही में से एक हैं . बहुत पुराने से उनको देखा हैं समझा हैं . एक तेज़ तर्रार पत्रकार जो वाकई में अपना ईमान नहीं .

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