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सरकारे जनता की हाकिम नहीं .लोकतंत्र में वो सर्विस प्रोवाइडर

The Indian Express
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सरकारे जनता की हाकिम नहीं .लोकतंत्र में वो सर्विस प्रोवाइडर


अगले लोकसभा का चुनाव आने में अब सिर्फ एक साल दस महीने का समय बचा हैं .

मोदी जी सरकार का हनीमून कब खत्म हुआ पता ही नहीं चल रहा हैं . शायद  अभी तक चल ही रहा हैं.

मोदी सरकार ने लोकसभा चुनावों में अपना एक संकल्प पत्र जारी किया था उनमे से कुछ का ज़िक्र यहाँ करना चाहूँगा .

बचे हुए एक साल में क्या गंगा साफ़ हो पायेगी  ?

क्या  बचे हुए समय में दो करोड़ युवाओ को नौकरिया मिल पाएंगी ?

क्या बचे हुए एक साल में कितना काला धन वापिस आया पता चल पायेगा ?

एक साल दस महीने में क्या नोट बंदी के दौरान कितने नोट जमा हुए रिजर्व बेंक के गवेर्नर बता पायेंगे ?

वो ये बता पाएंगे की कितना पैसा चीन से और कितना पकिस्तान से जमा हुआ ?

नोटों की गिनती बचे साल में पूरी हो पायेगी की नहीं ?

एक साल में किसान को उसकी फसल का सही दाम मिल पायेगा ?

क्या महिला आरक्षण बिल बचे हुए एक साल में पास हो पायेगा ?

और जो भी संकल्प पत्र में मुझसे छूट गया हो क्या मोदी सरकार एक साल दस महीने में उसे पूरा कर पायेगी ?

बचे हुए सालो में अपने पडौसी देशो से सम्बन्ध सही कर पायेगी ?

जो अब कश्मीर में हो रहा हैं ,क्या वो बचे एक साल में सही हो पायेगा ?

एक साल दस महीने बहुत छोटा समय बचा हैं , प्रधान सेवक ने विदेश यात्राओं और चुनाव में ही समय निकाल दिया .

सरकारे कोई हाकिम नहीं होती देश की जनता की ,वो लोकतंत्र में आम देश वासी को सर्विस प्रोवाइडर का कार्य करती हैं .

उसकी सुरक्षा और जनता की बेहतरी के लिए काम करती हैं .यहाँ तो मोदीजी ने सत्ता को एक लिमेटेड कंपनी में बदल दिया हैं .

जो अपने देश में रहने वालो से शासन व्यवस्था चलाने का शुल्क नहीं ,

उनसे भारी भरकम टेक्स के रूप में किराया वसूलने का कार्य कर रही हैं .

इन बचे एक साल दस महीने में किसानो के क़र्ज़ और समर्थन मूल्य प्रधान सेवक अपने संकल्प पत्र के अनुसार दे पायेंगे ?

किसानो की आत्महत्या का दौर थमा नहीं था ,अब शिक्षित युवा बेरोजगारों ने भी आत्म हत्या करनी शुरू कर दी .

बेंगलौर में आई टी क्षेत्र में बड़ी मात्र में युवा बेरोजगार हुए हैं .

उनके सामने अनिश्चितताओं का पहाड़ हैं .क्या मोदी सरकार बचे एक साल में उनके लिए भी कुछ करेगी ?

देश में रोजगार कम हुए हैं . अर्थव्यवस्था के आर्थिक आंकड़े सरकार के मुताबिक़ बहुत गिर हुए हैं . फेक न्यूज़ बनाई जाती हैं की पी एम् को अभी भी ७३% लोग भारत में पसंद करते हैं .

भाजपा के आई टी सेल के लोग गलत खबर फैलाने के लिए पकड़े जाते हैं . जो लेख  साम्प्रदायिकता फैलाती हैं. वो सोशल मीडिया पर फैलाई जाती हैं .

क्या भ्रष्टाचार दूर करने का वायदा करने वाले मोदी जी इन बचे एक साल दस महीने में भ्रष्टाचार के  रत्नों पर सुषमा स्वराज ,वसुंधरा राजे ,व्यापम ,पंकज मूंदे ,अमित शाह ,येदुरप्पा ,और रेड्डी बंधू सहित उन पर कार्यवाही कर पायेगी ?

चीन पर लाल आँख और मेक इन इंडिया का नारा देने वाले प्रधान्सेवक चीनी कंपनी को दिए गये रेल के ठेके के बारे में अपनी मजबूरी ,उनकी तानाशाही के नीचे दबी जनता को बचे एक साल दस महीने में  बता पायेंगे ?

अभी तक नोट बंदी ,और गोद लिए GST बिल के अलावा अपनी कोई उपलब्धी ये सरकार जनता के सामने गिना पायेगी ?

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