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विपक्ष की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी मीरा कुमार “विचारधारा “पड़ेंगी भारी

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विपक्ष की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी मीरा कुमार “विचारधारा “पड़ेंगी भारी


विचारधाराओं का जहाँ तक सवाल हैं.

विपक्ष की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी मीरा कुमार ने विचारधारा की बात कह कर एक लकीर खींच डाली हैं .

उन सबके सामने जिनके अन्दर आज भी कही छुपे हुए गांधी वादी मूल्य होंगे ।

उनकी सफलता या असफलता ये तय करेगी की लोग विचारधारा को वाकई आदर्श रूप से मानते हैं या दल बदलने के बाद उनकी विचारधारा सत्ता पक्षी हो जाती हैं ।

ये केवल एक राष्ट्र पति का ही चुनाव नहीं जिसके बारे में नितीश कुमार जी ने अपनी प्रेस कांफ्रेंस में तंज़ कस  विचारधारा के महत्व  को कम करके ,उस पर अपनी बौखलाहट की मिटटी डालने का कार्य किया ।

बेकफुट पर नितीश कुमार

जब से मीरा कुमार जी ने ब्यान दिया था ,नितीश कुमार उहा पोह की स्थति में आ गए थे .

विचारधारा का सवाल हो तो बहुत सी मित्रताओ और समझौतों का नकाब चीर चीर हो जाता हैं ।

उन्होंने किसानो और गौ रक्षा का सवाल उठा कर विचारधारा को कटघरे में ही नहीं खड़ा करने की कोशिश की उन्होंने गांधी से ले कार राहुल गाँधी पर भी अप्रतयक्ष रूप से राजनैतिक भाषा में वार कर दिया ।

नितीश कुमार बहुत सयाने और घनेरे राजनेता हैं । बिहार और विदिशा प्राचीन भारत की राजनीती के मूल में रहे हैं मगध हो या उसके कई सदियों बाद समुद्र गुप्त का अद्भुदय ये अपने आप में अनोखा रहा हैं .

लेकिन ये इतिहास महान था ,एक सम्राट के राज्य में खुला लोकतंत्र विदेशी व्यापारियों और यवनों ने भी अनुभव किया था ।

वर्तमान समय में दो विचारधाराओ की लड़ाई हैं ये केवल एक राष्ट्रपति पद का चुनाव नही हैं ।

ये चुनाव हैं आज़ादी के बाद मिले भारत वासियों के मूल्यों का और संघ पोषित विचारधारा का !

नितीश या तो विपक्ष की राष्ट्रपति पद की प्रत्याशी मीरा कुमार के विचाधारा वाले ब्यान के मूल में गये नही ?

या फिर विपक्षी एकता के नाम पर अपने द्वारा दिए गये धोखे को ,कांग्रेस पर आरोप लगा कर धोने का प्रयास करते हुए लगे ।

विपक्षी दलों के तरफ से राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार को चुना गया है.

जिन्हें 17 विपक्षी दलों का समर्थन हैं ।

जबकि कांग्रेस अन्य दलों से भी मीरा कुमार को समर्थन देने की मांग कर रही हैं ।

मीडिया में चल रही खबरों की माने तो मीरा कुमार के मकाबले NDA उम्मीदवार रामनाथ कोविंद भाजपा के अनुसार  काफी मजबूत स्थिति में हैं ।

उपसंहार

यूपीए अपने उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए काफी मेहनत कर रही है ।

भाजपा के पाले में अधिकतर कांग्रेस के ही बागी उम्मीदवार हैं . अगर वोटिंग गुप्त होगी तो बाज़ी मीरा कुमार के हाथ लगना तय हैं ।
उसका सबसे बड़ा कारण  मीरा कुमार ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत अहमदाबाद में साबरमती आश्रम में से की है ।

यहां उन्होंने, “इस समय मैं जो लड़ाई लड़ रही हूं, वह महात्मा गांधी की विचारधारा के लिए है । हमें गांधी की विचारधारा को आगे ले जाना है. मैं इस जगह से कुछ शक्ति हासिल करने के लिए आई हूं । मैंने आश्रम में गांधीजी के घर हृदय कुंज में कुछ समय बिताया । मुझे आज इस लड़ाई को आगे ले जाने के लिए काफी उर्जा मिली है ।

किसी जमाने में धुर विरोधी  नई दिल्ली में कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेकने वाली आम आदमी पार्टी ने भी यूपीए उम्मीदवार मीरा कुमार को समर्थन देने का ऐलान किया हैं । मीडिया खबरों के अनुसार  नेताओं ने शनिवार को एक मीटिंग बुलाई थी जिसमें में समर्थन का यह फैसला लिया गया हैं ।

जब धुर विरोधी गांधी की विचारधारा से सहमत तो उनका क्या जो गांधी की इसी पार्टी कांग्रेस की गोद में खेले और बुजुर्ग हुए ।

आज अगर गांधी की विचारधारा हारी तब ये स्पष्ट होगा ,की लोग गांधी का नाम राजनीती के लिए करते हैं उनकी विचारधारा से उनका कोई लेना देना नहीं हैं ।

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