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राहुल गाँधी को नेतृत्व सौपे शीर्ष नेता ,वरना भूल जाए 2019 का चुनाव

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राहुल गाँधी को नेतृत्व सौपे शीर्ष नेता ,वरना भूल जाए 2019 का चुनाव


NDTV पर फेक न्यूज़ संबंधी रविश के शानदार जानकारी भरे कार्यक्रम ने जहाँ बहुत सी जानकारियों से अपडेट कराया .

वही दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर जैसे फेक अजेंडा और खबरे चलाने का चलन और भी ज्यादा बड गया हैं .

अब कुछ इतिहासकार नकाब लगा कर उतर आये हैं मैदान में अपनी फ़ंतासी को ले कर . जिसमे वो अपनी काल्पनिक दुनिया में कांग्रेस को समाप्त प्राय देखते हैं .

लिखते हैं की अब कांग्रेस का अध्यक्ष नितीश को बना देना चाहिए .

अजबी सा ख्याल हैं ,साथ ही मूर्खता पूर्ण सोच …


कांग्रेस अपने शीर्ष नेतृत्व में बड़े बदलाव करके ही अपना आगे का रास्ता निकाल सकती है,

जाने माने इतिहासकार गुहा ने अपनी किताब ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ की 10वीं वर्षगांठ पर इसके पुनरीक्षित संस्करण के विमोचन अवसर पर यह बात कही.

उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए. इस सुझाव को अपनी ‘फंतासी’ करार देते हुए गुहा ने कहा कि यदि जदयू अध्यक्ष नीतीश दोस्ताना तरीके से कांग्रेस पार्टी का कार्यभार संभालते हैं तो यह जन्नत में बनी जोड़ी की तरह होगी.

उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि कांग्रेस बगैर नेता वाली पार्टी है और नीतीश बगैर पार्टी वाले नेता हैं. उन्होंने नितीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक वाजिब नेता हैं.


गुहा साहब को ये नहीं पता की कांग्रेस के अन्दर ही बहुत ऊर्जावान नेत्रत्व हैं . आज भी जिसने पूरे १७ राजनैतिक दलों को एक किया हुआ हैं .

कांग्रेस का अपना खुद का वोट बेंक हैं परंपरागत जो हमेश से साथ था .

थोड कांग्रेस केवल अपने बल को नहीं पहचान रही हैं .

कांग्रेस अध्यक्ष ने उपाध्यक्ष राहुल गाँधी को नेपथ्य में धकेल कर खुद उनके एक प्रश्न बनाया जा रहा हैं .

ये भारत हैं यहाँ प्रजा आज भी परिवार देख कर चुनती हैं . ये परम्परा हैं इसी लिए परिवार वाद की जड़े इतनी गहरी हैं .

मेरा अपना निजी अनुमान हैं सही हैं या गलत लेकिन अधिकतर कांग्रेस कार्यकर्त्ता खुद भी सहमत होंगे .

कांग्रेस को अपने अकेले ही बल पर आगे आना चाहिए .क्षेत्रीय दलों पर से लोगो का मोह भंग होने लगा हैं . बिहार नौटंकी के बाद दोनों ही नेताओं चाहे वो लालू हो या नितीश ?

या इस सब के लिए पेड़ और फेक मीडिया जिम्मेवार हो . उनकी विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गयी हैं .

राहुल गाँधी को नेतृत्व देना ज्यादा श्रेयस्कर इस समय वो पूरी तरह इस जिम्मेवारी  के लिए तैयार हैं .

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