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एम्.पी.किसान आन्दोलन :डेलनपुर हिंसा भाजपा पार्षद के पति समेत सात गिरफ्तार

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एम्.पी.किसान आन्दोलन :डेलनपुर हिंसा भाजपा पार्षद के पति समेत सात गिरफ्तार


मंदसौर से ले कर अब तक बहुत किसानो ने अपने प्राणों को ईश्वर के हवाले कर इस देश से प्रयाण कर दिया . 

न जाने कितने किसान बेंको और् साहुकारो  के क़र्ज़ के नीचे दबे हुए शरम और हया से अपना मुंह समाज में न दिखा पाने की स्थति में आत्म हत्या का शिकार हो रहे हैं । व्यापम हो या किसान आन्दोलन या मध्यप्रदेश सरकार के घोटालो की लिस्ट और पोस्टमार्टम हाउस से अपने घर तक का सफ़र तय करते किसानो के पार्थिव शरीर चुपचाप बे आवाज़ .,बिना कोई सवाल किये लेकिन सत्ता पर उनका मूक प्रहार !

अगर चीखे हैं तो केवल उन प्रियजनों की जिनको उनके  न होने का गम हमेशा याद आएगा . ख़ुशी होगी तब भी उन को याद करके रोयेंगे और दुःख आएगा तब भी उनकी स्म्रतियो में अपनी गीली आँखों और दिल में टीस लिए हुए दर्द को सहने की कोशिश करेंगे ।

किसान आन्दोलन में किसानो द्वारा हिंसा को भाजपा के मुख्य मंत्री ने कान्ग्रेस  नेताओं की भूमिका पर सवाल उठाये थे लेकिन हाल ही में डेलन पुर हिंसा में भाजपा पार्षद के पति  के अलावा सात को पुलिस ने हिरासत में लिया हैं ।

अब तक २५ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी हैं लेकिन सरकार के कांग्रेस पर आरोप का कनेक्शन नही इल रहा हैं ।

आत्महत्याओं का दौर जारी हैं सीहोर हो या मध्य प्रदेश का कोई सुदूर हिस्सा इस बार भारत माँ को किसान ने अपने प्राण न्योछावर कर ,सूबे के मुख्यमंत्री से एक मौन सवाल किया हैं ।

सी . एम् आज कल नर्मदा के वृक्षारोपण कार्यक्रम में व्यस्त हैं .

अभी तक किसानो को हिंसा का दोषी मान कर जहाँ राज्य की पुलिस प्रताड़ना की चरम सीमा को लांघ गए हैं ।

सरकार ने भी असम्वेदन शीलता के  सारे पिछले रिकार्ड भंग कर दिए हैं ।

पकड़े गये भाजपा नेता विजय लक्ष्मी राठौर भाजपा पार्षद के पति  क्या सरकार की भूमिका का कोई हिस्सा हैं ?

जिन सबने मिल कर किसानो को बदनाम करने के लिए हिंसा का कुचक्र रचा और मारे गए भोले भाले किसान युवक ,और अपने लिए रोटी और न्याय मांगते किसान ?

मध्य प्रदेश हो या हरियाणा सरकार का व्यापारिक ताना बाना केवल कुछ उद्योग पतियों की चिंता में लिप्त हैं । एक सुनियोजित प्रयास हैं केंद्र सरकार का अपनी राज्य सरकारों के साथ मिल कर कैसे किसानो को खेती से दूर कर उनकी जमीनों को लिया जाए ।

ऐसी ही कुछ पहल करते दिखे थे ,पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज जो किसानो को नौकरी करने की नसीहत दे रहे थे ।

क्या देश में अघोषित ईस्ट इण्डिया कंपनी की मानसिकता ने भारत में अपने फिर से पैर पसार दिए हैं ?

विपक्ष की भूमिका में कांग्रेस को अब जमीनी तौर पर प्रयास करने होंगे . लगता हैं कांग्रेस शायद अब भी यही सोचे बैठी हैं की सरकार खुद गलती करेगी और जन मत उनको मिल जाएगा ?

जनमत भी जब मिलेगा जब देश की जनता को आप ट्विटर या सोशल मीडिया या फिर यू -टियूब के प्रसारण में नहीं जनता के बीच नजर आयेंगे ,उनके दर्द बांटते हुए ।

अचानक से दिखना और फिर एक दम से अद्रश्य हो जाना विपक्ष के रूप  में एक यही पहचान और आम धारणा कांग्रेस बना रही हैं । राहुल गाँधी को पार्टी की कमान सौपने में हो रहा विलम्ब इस अबरोध का सबसे  बड़ा कारण माना जा रहा हैं ।

देश में किसान हो या व्यापारी वर्ग या फिर संगठित और असंगठित रूप से कार्य करने वाले लोग ,पूरे देश में त्राहि त्राहि हैं ,अब श्रेष्ठ समय हैं कांग्रेस के लिए की वो देश के लोगो की पीड़ा पर आगे आ कर मरहम लगाए ।

अगर ऐसा न हुआ तब मोब लिंचिंग और होंगे ,जनता पर नये टेक्स और लगेंगे ,किसान और ज्यादा आत्म हत्या करेंगे । जिस देश की अर्थ वयवस्था को खड़ा करने में ७० साल लगे. उसका इस सरकार ने तीन साल में बेडा गर्क कर दिया हैं ।

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