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राहुल गाँधी सेनानायक बन कर आओ आगे:- नारा “change the politics “

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राहुल गाँधी सेनानायक बन कर आओ आगे:- नारा “change the politics “


राहुल गाँधी ,छल कपट से परे ,अपनी ही पार्टी में मौकापरस्त लोगो और घाघ नेताओं से घिरे ,सत्ता का लालच नहीं लेकिन देश के लिए समर्पण ,वो नेता जिसको झुकाने मे पूरे दम के साथ केंद्र सरकार लगी हैं .

एक युवा का कांग्रेस के अन्दर दमन ,वो भी एक उच्च पद पर रहते हुए ,उन्होंने एक गलती की राजनैतिक समझौते का प्रतीक दागी बिल फाड़ दिया  ,उन पर आरोप भाजपा लगाती हैं की उन्होंने पी एम् के बिल को फाड़ा . आज नितीश की ईमानदारी के बचाव में ”सियासती गिद्ध, निर्णय को सही बताते हैं . तारीफ़ में उतर आते हैं .

अब बचाव करना हैं किसी मूर्ख नेता का जो अपनी इमेज बनाने के चक्कर में उस संघ के साथ हो जाता हैं . जिसने  संघ मुक्त होने का नारा कभी दिया था .

राजभोग की बात करने वाले नितीश ये तो बता दें की वो राज भोग नहीं तो क्या कर रहे हैं . बिना राज भोग के वो एक झौपडी में रहते एक गाय को पालते ,कोई सरकारी नौकर नहीं  रखते ,और बिहार की सेवा करते तब ज्यादा ठीक था . ये दलील भी समझ आ जाती .

कीचड में रहने वाले कीड़े को कीचड ही पसंद आती हैं . श्रेष्ठ लोगो के सामने वो अपने आपको हीन ही अनुभव करता हैं .ये सामाजिक सत्य हैं . इससे कोई भाग नहीं सकता .राजनीती का स्तर जितना अब गिरा हैं इतना तो तब भी n था जब पी एम् चरण सिंह के जमाने में गन्ना सडको पर डाला गया था .

बात पुरानी ज़रूर हैं लेकिन शिक्षा देती हैं . जनता को भी और देश को भी . चीनी को ले कर तब आन्दोलन हुआ था ,उसमे आपातकाल का आरोप इंदिराजी पर था . एक किसान नेता पी एम् बना . उसको यही सत्ता के बाँकुरे खा गए .आपात काल में कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाने वाले आज मालामाल हैं . विडंबना देखिये आज देश के लिए वही लालू कांग्रेस के साथ हैं . जिनके लिए राहुल गाँधी ने दागी बिल फाड़ा था . काश की राहुल गांधी ने ऐसा नहीं किया होता . तब पार्टी के अन्दर और बहार उनको पप्पू घोषित करने की मुहीम नहीं चलाई गयी होती .

समाजवादियो के नारे ज़रूर लगे लेकिन सही मायने में एक और युवा ने उत्तर प्रदेश में परिवार से ऊपर उठ कर समाजवादी  मर्यादा की और उसके मूल्यों को अपना  कर एक सन्देश दिया . जी हाँ वो दम राहुल के बाद अखिलेश यादव में दिखाई दिया .वो आज भी मजबूती के साथ संघ के सामने विपक्ष के रूप में खड़े हैं .

एक युवा हार्दिक पटेल जो सीधे सीधे संघ की विचारधारा और मोदी के अस्तित्व को नकार रहा हैं .

युवा ज्योतिरादित्य सिंधिया जो मध्य प्रदेश  में किसानो की लड़ाई लड़ रहे हैं . सीधे शिव राज के शवो की राजनीती को चुनौती दे रहे हैं .

तेज़स्वी यादव ने जिस तरह प्रतिकार आज बिहार की विधान सभा में किया उसने नितीश कुमार को पाने से भी बौना साबित कर दिया .

काल का पहिया घूम रहा हैं ,युवा नेता खुल कर आगे आ रहे हैं . इस मामले में कांग्रेस अभी तक ७० साल बूढ़ी हैं . मुझसे शायद बहुत से कांग्रेस समर्थक सहमत नहीं  हो . लेकिन राहुल गाँधी को जिन्हें कांग्रेसी युवाओं के अनुमान से २०१४ में कांग्रेस की बागडोर सम्हाल लेनी चाहिए थी . या अब तक घोषणा हो जानी चाहिए थी ,अब तक नहीं हुई हैं .

फैसले आज भी राजनैतिक सचिव की वज़ह से लिए जाते हैं . एक लाबी का प्रभाव कांग्रेस को अन्दर ही अन्दर समाप्त कर रहा हैं .

अभी तक आख़री उम्मीदे बची हैं ,कल्पना हैं . क्यों न राहुल गाँधी नेत्रत्व करे युवा नेताओं को साथ ले कर जिसमे अखिलेश  यादव ,तेजस्वी यादव ,कन्हैया ,हार्दिक पटेल ,भीम सेना के चन्द्रशेखर ,सारे आदिवासी नेता जो युवा हैं जिनका बस दोहन हो रहा हैं .

देश को केवल युवा सम्हाल सकते हैं . राजनीती के पुराने घाघ बस खा रहे हैं ईमानदारी और भ्रष्टाचार के विरोध के नाम पर .भिखारियों को भगवान् के नाम पर भीख मांगते देखा हैं .भाजपा ऐसी पार्टी हैं जो भक्ति के नाम पर भीख मांगती हैं तो वोट की .सत्ता के मद में चूर हो देश के मान के साथ एक विचारधारा संविधान के साथ बलात्कार कर रही  हैं . देशवासियों क्या ये आपकी नजरो में सही हैं ?

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