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GST के जश्न की तुलना आज़ादी के पर्व से क्या सरकार का उचित कृत्य ?

NDTV Khabar
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GST के जश्न की तुलना आज़ादी के पर्व से क्या सरकार का उचित कृत्य ?


सरकार आज parliament में मध्य रात्रि जश्न मनायेगी. चर्चे ख़ास ए-आम हैं की एक नया GST कर जनता के ऊपर लगने वाला हैं । कभी दस साल तक GST को जनता पर अत्याचार बताने वाले मुख्यमंत्री मोदी ,आज प्रधान सेवक बनते ही इसके सबसे बड़े हिमायती हो गए . एक कर एक टेक्स की अवधारणा को तोड़ मरोड़ लूट कर में बदल दिया गया हैं.

जशन की इसमें क्या बात हैं ?

वो भी जनता के ही पैसो से ?

जश्न क्यों क्या किसानो की हो रही आत्महत्याओं का हैं .

या फिर भीड़ तन्त्र द्वारा मारे गये बेगुनाहों की मौत पर ये बेरहम हास्य का तांडव हैं ?

जश्न किस बात का ,क्या इस बात का की रोजाना जम्मू और कश्मीर में भीड़ तन्त्र पुलिस को मार रहा हैं.

जश्न इस बात का हैं की रोजाना देश के वीर सपूत सीमा पर मारे जा रहे हैं .

जनता पर नया टेक्स लगाने की इतनी ख़ुशी इतना बड़ा भव्य आयोजन का महल खड़ा किया जा रहा हैं.

जिसकी नीव में पता नही कितने किसानो की लाशें ,कितने अल्पसंख्यको की हत्याओं की ईंट लगी हुई हैं.

सरकार कुछ तो शर्म करो ,कुछ तो सहम जाओ ,तुम कोई देश की जनता को सौगात या ईनाम नहीं दे रहे उससे देश में रहने से लेकर, उसके व्यापार की कमाई में ,अपना हिस्सा कानून बना कर, अपनी सत्ता की दादागिरी से ले रहे हो ।

मध्य रात्री संविधान का मन्दिर जब खुला था जब राष्ट्रीय  गौरव हमने आज़ादी के रूपमें पाया था.उसकी तुलना देशवासियों को दुःख देने वाले कानून के जश्न से कैसे की जा सकती हैं ?

कांग्रेस सहित वाम दलों ,ममता और लालू प्रसाद से ले कर सारे विपक्ष ने ईसका बहिष्कार कर सही निर्णय लिया हैं . कम से कम विपक्ष ने अपनी संवेदनशीलता का परिचय तो दिया ।

कोई भी टेक्स व्यवस्था लोक कल्याण की कैसे हो सकती हैं ?

ये GST का भव्य आयोजन नहीं देश के किसानो ,व्यापारियों और बेरोजगार युवाओं की  बर्बादी का जश्न मनाया जा रहा हैं ।

ये जश्न तब होता जब देश बिना किसी टेक्स के सांस ले रहा होता ,किसान के घर आंसुओ और विलाप का मंज़र न होता ।

क़र्ज़ से तंग आ कोई व्यापारी कोई किसान  अपनी गर्दन में रस्सी डाल कर न लटकता ? उसके घर दिवाली  मनाई जाती वो भी दिए जलाता .अपना घर सजाता ,सवारता .

बड़ा जश्न सब मिल कर बनाते ,कम से कम दस करोड़ युवाओं को तो रोजी रोटी मिल गयी होती .

और भी बड़ा जश्न तब मनाते बाजारों और गंगा के घाटो पर घूम रही गाय को वो लोग चारा खिला पाल रहे होते जो गाय के नाम पर खून बहा रहे हैं ।

जश्न तब भी जायज था जब पाकिस्तान के सेना के जवानो के दस सर काट लाये होते ?

हज़ार बल्बों से संसद को सजाने का क्या मतलब जब देश के किसानो के घर मातम का अँधेरा पसरा हुआ हो ।

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2 Comments
  1. shah jankilal jagannath says

    Aj congres natak kyo karrahi hay GST to congres ki baby thi vo satta say bahar huy ab virodh kyo janta ki sahabuti kay liy ya milajula natak praja kya samzay janta bavkuf banana achi bat nahi hay podha apny ropa abhi vo pad ho gaya janto maf nahi karti koi bhi ho

    1. YoungIndian says

      विरोध तरीके और ज्ल्द्वाजी का ,बिना तैयारी ,बिना किसी योजना के .और बबुआ बिल दस साल से मोदी ही लटकाए थे ?
      सारी दुकानों में बिजली पहुच गयी ,बेक अप के लिए जेनरेटर लग गए ?
      सारे दूकान दार कम्पुटर सीख गये ?

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