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सत्ता का समझौता और धारा 370

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अधितर राजनैतिक दल
आम तौर पर चुनाव जीतने के बाद आम तौर पर मतदाताओं और समर्थको से किये वायदे भूल जाते
हैं और सत्ता के जोड़ तोड़ बिठाने में इतने मशगूल हो जाते हैं की उन्हें देश की मूल्भाव्नाओं
का ध्यान नहीं रहता ज़हा तक जम्मू काश्मीर का मुद्दा हैं हमारे देश में वो हमेशा से
एक अतिसंवेदन शील मुद्दा रहा हैं जिसको बार बार राजनीति की चिंगारी देकर भाजपा ने घाटी
में भड़काया हैं और पूरे देश में धारा 370 का बखान इस तरह किया की आम लोगों तक यही सन्देश
गया की भूतपूर्व कांग्रेस की सरकारों ने धारा 370 खुद बना कर लगा दी हो और जम्मू काश्मीर
को देश के बाकी हिस्सों से अलग कर दिया हो पर सत्य से देश के लगभग ८०% मतदाता अनज़ान
हैं जिसके बारे में सच्च अधितर को नहीं मालूम …?

 

जो काम भाजपा जम्मू
कश्मीर के मामले में करती रही वही काम अलगाववादी संगठनों से मिल कर पी डी पी जम्मूकश्मीर
में करती रही नतीजा धर्मनिरपेक्ष दल कमज़ोर हूएं और दोनों ही दलों को अधितर सीटें मिली
और दोनों ही दलों की राजनैतिक धुरी और विचारधारा अलग थी और जब इस तरह के दलों में समझौता
होता हैं तो वो सिर्फ स्वार्थ सिध्दी के लिए होता हैं भाजपा ने हमेशा देश के मतदाता
को मूर्ख बनाया और हमेशा भ्रम का एक जाल बुनकर देश के लोगों को गुमराह किया

 

आत्मविश्वास और अति आत्मासाक्ति

ठीक नहीं ?

कभी राम मंदिर ,कभी
धारा 370,कभी कालाधन ,और भी जाने क्या क्या …….

विपरीत विचारधारों
के लोगों के गठ्वंधन का एलान हुआ और उन समर्थको और मतदाताओं को मालूम ही नहीं की किन
शर्तो पर भाजपा और पी डी पी में सहमती हुई कौन सा कोमेंन मिनिमम प्रोग्राम तय हुआ देश
की जनता को भी जानने का हक हैं उस जम्मू और कश्मीर की अवाम को भी हक हैं जिसने विकास
के नाम पर अपना वोट दिया …./

–भाजपा ने क्या अलगाव
वादी नेताओं को छोड़ने की शर्त मानी थी ?

मुफ़्ती के ब्यान ने और मुफ़्ती सरकार ने अलगाववादी  नेता मसरत आलम
को रिहा कर  अपनी विश्वशनीयता  अलगाववादी नेताओ के प्रति दिखाई हैं

फैसलों से लगता हैं भाजपा भले ही विरोध का नाटक करें लेकिन इसकी
जिम्मेवारी से बो बच नहीं सकती सत्ता के लिए समझौते होते हैं लेकिन राष्ट्र की एकता
और अखंडता की कीमत पर नहीं

लेकिन भाजपा की सत्ता की भूख के आगे न कोई मर्यादा थी कोई
आस्था और न ही कोई अपने वायदे की प्रतिव्द्धता

एक निराशा हुई हैं भाजपा के  समर्थको में अलगाववादिओं
से हाथ मिलाने पर

और प्रधान मंत्री तो गलत भी करें तो वो
उसको भी अपनी उपलब्धि बताते हैं आत्मविश्वास अच्छा होता हैं अति

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