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श्री मोदीजी की वो दिल्ली वाली चुनावी सभा

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हा हा हा हा
हा  ………………..

 

दिल्ली चुनाव के
दौरान फिर एक कोमेडी शो हुआ था और मुझे बहुत हँसी आई देखकर झुके कंधे और नकारात्मक
शारीरिक भाषा श्री मोदी जी की ……..

 

 दिल्ली में जनसभा के दौरान……..

वही सब पुरानी
बाते याद आई एक वर्ष पहले की बात

‘’में आया नहीं
बुलाया गया हूँ दिल्ली वालों ने मुझे बुलाया हैं यहाँ पर सिर्फ माँ गंगा का नाम
हटा कर दिल्ली आ गया था

में आपका क़र्ज़
उतारूंगा

किस किस का क़र्ज़
उतारोगे और जिस देश का शासक बार बार जनता के प्यार को क़र्ज़ बताए वो तो व्यापार कर
रहा हैं वतन की मुहब्बत कहाँ हैं ?

‘’जो शहंशाह समझे
मुल्क की रियाया की मुहब्बत को क़र्ज़ वो शहंशाह नहीं हो सकता मेरे वतन का

 जिसकी ख्यालो और ख्वावो में  हमेशा जिक्र आता हैं तिजारत की आरजू से भरा ‘’

 

अब बंद करो
भरमाना’’’’’

 

 माना मेने ही नहीं सबने माना हैं दिल्ली दिल
वालों की हैं दिल से सोचती हैं पूरे भारत का प्रतिनिधत्व करती हैं लेकिन इतने भी
मूर्ख नहीं लोग यहाँ के जिनको कुछ भी कह दो ..

 

मोदीजी स्वीकार
कर चुके थे यहाँ झूट की फेक्टरी चल रही हैं हाँ बिलकुल सही रूप से स्वीकार किया था
मीडिया के द्वारा चलाये जा रहे झूट को जनता देख भी रही थी
समझ भी रही थी और आज
पहली बार दिल्ली के मंच पर एक हारा हुआ पराजित हुआ नेता बोल रहा था जिसके पास कोई
उपलब्धि नहीं थी जनता को बताने की एक वर्ष में दिल्ली के लिए बहुत कुछ कर सकते थे
पर नहीं किया रास रंग और विदेशो से ही फुर्सत नहीं ओबामा के लिए पंद्रह हज़ार केमरे
लगे वो दिल्ली में पर्मानेएंट लग जाते इतना ही काफी था
मेरी दिल्ली की जनता का दिल
जीतने के लिए नहीं चुनाव में तमाश करेंगे पैसे खर्च करेंगे पर जनता को ठेंगा…..

 

मीडिया वालो भाई
लोग ज़रा बताओगे आपने तो कसम खाई थी की मीडिया को चोर बताने वाले कजरू भाई का
बहिष्कार करेंगे पर ये क्या खुद वकील बन बैठे सच बताओ जनता को क्या डील हैं तुम
दोनों पार्टीओ के बीच बस दिल्ली के अन्दर दो ही राजनैतिक दल बचे हैं और कोई दल
नहीं …

 

शर्म करो अपना
सम्मान कब तक खोते रहोगे

 

और कल शाम हुई
मीडिया पर बहसों में सारे भाजपा प्रवक्ता और आपी प्रवक्ता अपना आत्म विश्वास खोए
नज़र आये थे ..आज तक पर ज़हा आशीष खेतान और शाहनवाज़ इतने अवसाद में थे की अंजना ओम कश्यप
से व्यक्तिगत हो गए और  सत्य का शेर जनता
का विश्वास लिए सुरजेवाला मुस्कुराता हुआ अविचल खड़ा था ..
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