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भारतीयता और राहुल गाँधी ।Religion or Development?



मध्य प्रदेश के मनीष सिर्सीवाल भाई कांग्रेस के लिए सोशल मीडिया पर अपनी तथ्यात्मक और धनात्मक शक्ति के लिए जाने जाते हैं । कांग्रेस के विद्वान कार्यकर्ताओं और समर्थको के बीच उनको आदर की द्रष्टि से देखा जाता हैं ।आअज फेसबुक पर उन्होंने एक सवाल लिखा कुछ इस तरह...


Whats your choice?
Religion or Development?

इस पर कोमेंट करने वालो ने अपने अपने कमेन्ट दिए ,लेकिन एक भाई ने तो रिलीजन और धर्म को ही अलग अलग कर दिया ।
शांतनु मिश्रा नाम के एक युवा ने अपना पांडित्य कुछ इस तरह से उगला


" and sir kindly do differentiate between dharma and religion for it may help you to understand SANATAN AND RELIGION WHICH GANDHI IS TALKING ABOUT.

ज़बाब में मनीष भाई ने लिखा

I do understand Gandhi, politics as well as religion and that is the reason I asked the question.

शांतनु जी ने लिखा

gandhi is the man of centuries who's guidance will help mankind not just Indian's and modi n shah carries it and nt just they everyone should ... and sonia - rahul GANDHI'S ERA SHOULD GO NOT MAHATMA'S. THIS IS WHERE CONGRESS LACKS SIR.

मेरा ज़बाब हिंदुत्व भरा और राष्ट्रीय भाषा में था ज्यादा कन्फुजियाओ मत भाई ,लड़का सही कह रहा हैं ,चुनाव लड़ते टैम धर्म का नारा लगाओ ,जब जीत जाओ तो उसे विकास की जीत बताओ क्यों हैं न सिम्पल हिन्दुइज्म का तड़का ये वाला जरा ज्यादा ही आधुनिक हैं ।

उत्तर साफ हैं चुनाव बहुसंख्यको और अप्संख्यको के नाम पर जब तक लडा जाएगा,तब तब साम्प्रदायिक शक्तिया जीतेंगी ,विकास बहुत बाद की बात हैं।
जब धर्म के सामने भारतीयता की बात होगी निश्चय  ही धर्म हार जाएगा । धर्म से तात्पर्य हिन्दू नहीं ,मुसलमान नहीं और न सिख और ईसाई !

अब रही बात आपके कालजयी प्रश्न की

प्रश्न अपनी जगह वाजिब हैं लेकिन धर्म हावी हैं उसके कारण भी हैं । थोड़ी देर के लिए EVM मशीनों को अलग रख कर बात करें तो ये साफ़ हो जाता हैं ।
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राहुल गाँधी की खामोशियाँ

मोदी का जनाधार घटा हैं एक युवा नेता राहुल गाँधी ने आपने वरिष्ठ नेताओं के साथ बेहतर टीम वर्क किया । लेकिन एक राजनैतिक चूक हुई जहाँ भाजपा हिन्दू बन कर लड़ी तब दूसरी और कांग्रेस कांग्रेस बन कर सपा भी सपा बन कर लड़ी भारतीय बन कर कोई भी पार्टी नहीं लड़ी या भारतीयता का सन्देश विपक्ष नहीं दे पाया ।

अल्पसंख्यक अपने पूर्वाग्रह के साथ सयाना  बनने की कोशिश में गच्चा खा गए । उन पर से अब मुझे लगता हैं अधितर राजनैतिक पार्टियों का भरोसा कम हो गया हैं । मेरा अनुमान गलत हो सकता हैं लेकिन एक कडवा सत्य भी हैं । आज भी अल्पसंख्यक समुदाय बर्हद रूप से कांग्रेस को दोषी मान कर बैठा हैं ।
 में उनसे यही कहूँगा उनके साथ कभी भी अन्याय होने देने के विरोध में कांग्रेस थी । एक अकेली पार्टी ऐसी रही जिसके नेताओं को मुगलों के खानदान से बता दिया गया । आपके दिलो में उसके प्रति नफरत इसी लिए भरी गयी की आप उससे दूर हो जाए और आपका शिकार आसान हो जाए । यही हुआ भी हैं ।


यही से भारतीयता कमजोर हुई बिखरी हैं ।

एक आसान सी बात हैं आप जब विदेश जाते हो तब आपको भारतीय कहा जाता हैं । जब आप अपने देश में अपने प्रदेश से बहार जाते हो तब प्रदेश आपकी पहचान होता हैं ।जब आप अपने ही प्रदेश के दुसरे जिले में जाते हो तब भी आपको दिशाओं के आधार पर जाना जाता हैं । केवल और केवल अपने स्थानीय स्तर पर ही आपको आपके धर्म से जाना जाता हैं ।

स्थानीय बहुत छोटा और संकुचित ,प्रदेश के भाग उससे बड़े ,देश के स्तर पर आपके प्रदेश और बड़ा दायरा और विश्व के स्तर पर आप सिर्फ और सिर्फ भारतीय ।
अब आप खुद सोचे सुख आपको अपनी पहचान स्थानीय स्तर पर धर्मो के नाम या भारतीय कहलाने में ।

आज का हमारा ब्लॉग नहीं देखे हैं न देखिएगा ज़रूर आज कल आप अपनी राय भी नहीं देते भाई 


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